शुक्ल पक्ष पूर्णिमा • १००% प्रकाशपूर्णिमा
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २ अप्रैल २०२६

१५, चैत्रशुक्ल पक्ष, पूर्णिमा
२०८२ गुजराती संवत
२
अप्रैल २०२६
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:चैत्र पूर्णिमाइष्टिहनुमान जयंतीगुडी पडवो∞योग:ध्रुवसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न
अगला: प्रतिपदा

नक्षत्र

समाप्ति समय ०५:३८ अपराह्न
अगला: चित्रा

योग

समाप्ति समय ०२:१९ अपराह्न
अगला: व्याघात

करण

समाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न
अगला: बालव

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०७ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:२९ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०६ पूर्वाह्न, अप्रैल ३ (अगला सूर्योदय)
तिथि
पूर्णिमा
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त (समाप्ति समय ०५:३८ अपराह्न)
चित्रा
योग
ध्रुव (समाप्ति समय ०२:१९ अपराह्न)
व्याघात
करण
बव
बालव (समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न)
कौलव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०७ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:२९ अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे २२ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१८ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०६:५० अपराह्न
चंद्रास्त
None
चंद्र राशि: कन्यारात्रिमान: ११ घंटे ३६ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
पूर्णिमासमाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न• अगला: प्रतिपदा
ध्रुवसमाप्ति समय ०२:१९ अपराह्न• अगला: व्याघात
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
चैत्र
हस्तसमाप्ति समय ०५:३८ अपराह्न• अगला: चित्रा
करण
बव(०७:४१ पूर्वाह्न)बालव(०८:०९ अपराह्न)कौलव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
चैत्र

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद १)
चंद्र राशि
कन्या(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ तुला (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद १
नक्षत्र पद
हस्त (पद ३)११:१५ पूर्वाह्नहस्त (पद ४)०५:३८ अपराह्नचित्रा (पद १)१२:०२ पूर्वाह्न, अप्रैल ३चित्रा (पद २)जारीचित्रा (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ३४८.०७°चन्द्र भोगांश: १६७.३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
१९(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
चैत्र(पूर्णिमांत)
चैत्र(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३४ पूर्वाह्न – ०५:२१ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५७ पूर्वाह्न – ०६:०७ पूर्वाह्न
  • ११:५४ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३० अपराह्न – ०६:५३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३० अपराह्न – ०७:३९ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०८:२० पूर्वाह्न – १०:०२ पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५५ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल७ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०१:५१ अपराह्न – ०३:२४ अपराह्न
  • यमगंड
    ०६:०७ पूर्वाह्न – ०७:४० पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०९:१३ पूर्वाह्न – १०:४६ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:१५ पूर्वाह्न – ११:०४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०२:१३ पूर्वाह्न – ०३:५७ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०६:०७ पूर्वाह्न – ०५:३८ अपराह्न
अशुभ योग (९)० सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
श्मशान(समाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न)→गौरी (गौरी के साथ)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
चन्द्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०६:०७ पूर्वाह्न – ०६:४७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:४७ पूर्वाह्न – ०८:२७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:२७ पूर्वाह्न – १०:२६ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:२६ पूर्वाह्न – १२:३९ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:३९ अपराह्न – ०२:५५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०२:५५ अपराह्न – ०५:०६ अपराह्न
शुभ पंचक
०५:०६ अपराह्न – ०७:१६ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:१६ अपराह्न – ०९:३१ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०९:३१ अपराह्न – ११:४६ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:४६ अपराह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
शुभ पंचक
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:३८ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:३८ पूर्वाह्न – ०५:१२ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०५:१२ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०७ पूर्वाह्न – ०६:४७ पूर्वाह्न
०६:४७ पूर्वाह्न – ०८:२७ पूर्वाह्न
०८:२७ पूर्वाह्न – १०:२६ पूर्वाह्न
१०:२६ पूर्वाह्न – १२:३९ अपराह्न
१२:३९ अपराह्न – ०२:५५ अपराह्न
०२:५५ अपराह्न – ०५:०६ अपराह्न
०५:०६ अपराह्न – ०७:१६ अपराह्न
०७:१६ अपराह्न – ०९:३१ अपराह्न
०९:३१ अपराह्न – ११:४६ अपराह्न
११:४६ अपराह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:३८ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
०३:३८ पूर्वाह्न – ०५:१२ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
०५:१२ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न, अप्रैल ३
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२६६७
लाहिरी अयनांश
२४.२२२९३४°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११३२
संशोधित जूलियन दिन
६११३२
राता डाई (RD)
७३९७०८
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१२ चैत्र, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
२० मार्च, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

चैत्र पूर्णिमा

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चैत्र पूर्णिमा का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

चैत्र पूर्णिमा का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

इष्टि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला इष्टि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

इष्टि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

हनुमान जयंती

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला हनुमान जयंती का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

हनुमान जयंती का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

गुडी पडवो

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला गुडी पडवो का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

गुडी पडवो का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।