अशुभ (अमंगलकारी)•योग · वार · तिथि

क्रकच योग

क्रकच योग तब तक रहता है जब वार की संख्या (रविवार = 1) और पक्ष की तिथि की संख्या (1 से 15) का योग 13 हो, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

०४
अगली बार५:५४ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰
आरंभशनि, १७ अक्टू॰, ५:५४ पूर्वाह्न
समाप्तिशनि, १७ अक्टू॰, ६:११ पूर्वाह्न

अक्टूबर २०२६ का कार्यक्रम

स्थान: भारत

२शुक्र

अक्टूबर २०२६

आरंभ: १०:१५ पूर्वाह्न, २ अक्टू॰

समाप्ति: ६:०६ पूर्वाह्न, ३ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): शुक्रवार · तिथि: कृष्ण सप्तमी

६मंगल

अक्टूबर २०२६

आरंभ: २:०७ पूर्वाह्न, ६ अक्टू॰

समाप्ति: ६:०७ पूर्वाह्न, ६ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): सोमवार · तिथि: कृष्ण एकादशी

१७शनि

अक्टूबर २०२६

आरंभ: ५:५४ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰

समाप्ति: ६:११ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): शुक्रवार · तिथि: शुक्ल सप्तमी

२०मंगल

अक्टूबर २०२६

आरंभ: १२:५० अपराह्न, २० अक्टू॰

समाप्ति: ६:१३ पूर्वाह्न, २१ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल दशमी

३१शनि

अक्टूबर २०२६

आरंभ: ६:१८ पूर्वाह्न, ३१ अक्टू॰

समाप्ति: ४:५७ अपराह्न, ३१ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण षष्ठी

क्रकच योग क्या है?

क्रकच योग तब तक रहता है जब वार की संख्या (रविवार = 1) और पक्ष की तिथि की संख्या (1 से 15) का योग 13 हो, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

  • रविवार: पक्ष की तिथि संख्या १२
  • सोमवार: पक्ष की तिथि संख्या ११
  • मंगलवार: पक्ष की तिथि संख्या १०
  • बुधवार: पक्ष की तिथि संख्या ९
  • गुरुवार: पक्ष की तिथि संख्या ८
  • शुक्रवार: पक्ष की तिथि संख्या ७
  • शनिवार: पक्ष की तिथि संख्या ६

अशुभ योग वार, तिथि या नक्षत्र का ऐसा संयोग है जिसमें परंपरा नए कार्य, समारोह और यात्रा आरंभ करने की सलाह नहीं देती। ऐसे समय में सामान्यतः दूसरा मुहूर्त चुना जाता है।

पारंपरिक महत्व

पंचांग का अनुसरण करने वाले लोग इन योगों में से कोई योग चल रहा हो तो महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः दूसरा मुहूर्त चुनते हैं। दैनिक कामकाज पर सामान्यतः कोई रोक नहीं मानी जाती।

समय आपके चुने हुए स्थान के अनुसार निकाले गए हैं (जब तक आप कोई स्थान न चुनें, भारत के लिए)। अपने स्थान के पूरे दिन के लिए दैनिक पंचांग खोलें।