अक्टूबर २०२६
आरंभ: ६:०२ अपराह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१४ अपराह्न, १ अक्टू॰
अवधि: १ घं १२ मि · सूर्यास्त: ६:०२ अपराह्न
संध्यावंदन, गायत्री जप, ध्यान और आत्मशांति के लिए सूर्यास्त काल का पावन समय।
स्थान: भारत
आरंभ: ६:०२ अपराह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१४ अपराह्न, १ अक्टू॰
अवधि: १ घं १२ मि · सूर्यास्त: ६:०२ अपराह्न
आरंभ: ६:०१ अपराह्न, २ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१३ अपराह्न, २ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ६:०१ अपराह्न
आरंभ: ६:०० अपराह्न, ३ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१२ अपराह्न, ३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ६:०० अपराह्न
आरंभ: ५:५९ अपराह्न, ४ अक्टू॰
समाप्ति: ७:११ अपराह्न, ४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५९ अपराह्न
आरंभ: ५:५८ अपराह्न, ५ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१० अपराह्न, ५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५८ अपराह्न
आरंभ: ५:५७ अपराह्न, ६ अक्टू॰
समाप्ति: ७:१० अपराह्न, ६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५७ अपराह्न
आरंभ: ५:५६ अपराह्न, ७ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०९ अपराह्न, ७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५६ अपराह्न
आरंभ: ५:५५ अपराह्न, ८ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०८ अपराह्न, ८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५५ अपराह्न
आरंभ: ५:५४ अपराह्न, ९ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०७ अपराह्न, ९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्यास्त: ५:५४ अपराह्न
आरंभ: ५:५४ अपराह्न, १० अक्टू॰
समाप्ति: ७:०७ अपराह्न, १० अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:५४ अपराह्न
आरंभ: ५:५३ अपराह्न, ११ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०६ अपराह्न, ११ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:५३ अपराह्न
आरंभ: ५:५२ अपराह्न, १२ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०५ अपराह्न, १२ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:५२ अपराह्न
आरंभ: ५:५१ अपराह्न, १३ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०४ अपराह्न, १३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:५१ अपराह्न
आरंभ: ५:५० अपराह्न, १४ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०४ अपराह्न, १४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:५० अपराह्न
आरंभ: ५:४९ अपराह्न, १५ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०३ अपराह्न, १५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:४९ अपराह्न
आरंभ: ५:४८ अपराह्न, १६ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०२ अपराह्न, १६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:४८ अपराह्न
आरंभ: ५:४७ अपराह्न, १७ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०१ अपराह्न, १७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्यास्त: ५:४७ अपराह्न
आरंभ: ५:४७ अपराह्न, १८ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०१ अपराह्न, १८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४७ अपराह्न
आरंभ: ५:४६ अपराह्न, १९ अक्टू॰
समाप्ति: ७:०० अपराह्न, १९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४६ अपराह्न
आरंभ: ५:४५ अपराह्न, २० अक्टू॰
समाप्ति: ६:५९ अपराह्न, २० अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४५ अपराह्न
आरंभ: ५:४४ अपराह्न, २१ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५८ अपराह्न, २१ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४४ अपराह्न
आरंभ: ५:४३ अपराह्न, २२ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५८ अपराह्न, २२ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४३ अपराह्न
आरंभ: ५:४३ अपराह्न, २३ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५८ अपराह्न, २३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४३ अपराह्न
आरंभ: ५:४२ अपराह्न, २४ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५७ अपराह्न, २४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४२ अपराह्न
आरंभ: ५:४१ अपराह्न, २५ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५६ अपराह्न, २५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्यास्त: ५:४१ अपराह्न
आरंभ: ५:४१ अपराह्न, २६ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५६ अपराह्न, २६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:४१ अपराह्न
आरंभ: ५:४० अपराह्न, २७ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५५ अपराह्न, २७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:४० अपराह्न
आरंभ: ५:३९ अपराह्न, २८ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५४ अपराह्न, २८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:३९ अपराह्न
आरंभ: ५:३९ अपराह्न, २९ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५४ अपराह्न, २९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:३९ अपराह्न
आरंभ: ५:३८ अपराह्न, ३० अक्टू॰
समाप्ति: ६:५४ अपराह्न, ३० अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:३८ अपराह्न
आरंभ: ५:३७ अपराह्न, ३१ अक्टू॰
समाप्ति: ६:५३ अपराह्न, ३१ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्यास्त: ५:३७ अपराह्न
सायं संध्या दिन के अवसान और रात्रि के आगमन का पावन संधिकाल है। वेदों में विहित त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न और सायं) में सायं संध्या का विशेष महत्व है, जो मन को बाह्य प्रपंचों से मुक्त कर अंतर्मुखी बनाती है।
यह समय सूर्यास्त से प्रारंभ होकर ३ घटी (लगभग ७२ मिनट) तक रहता है। यह काल सायं संध्यावंदन, गायत्री मंत्र जप, संध्या अर्घ्य और मौन ध्यान के लिए शास्त्रसम्मत माना गया है। दिनभर के मानसिक तनाव को शांत करने के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
सायाह्न संध्या दिन और रात्रि की संधि है और त्रिसंध्या की अंतिम संध्या है। परंपरा में पश्चिम की ओर मुख करके गायत्री मंत्र का जप और जल अर्पण करने का विधान है।
सायं संध्या की गणना स्थानीय सूर्यास्त और आगामी रात्रि मान के आधार पर की जाती है। इस शांत संधिकाल में ईश्वर चिंतन और उपासना करने से मानसिक शांति और सात्विक ऊर्जा प्राप्त होती है।
समय आपके चुने हुए स्थान के अनुसार निकाले गए हैं (जब तक आप कोई स्थान न चुनें, भारत के लिए)। अपने स्थान के पूरे दिन के लिए दैनिक पंचांग खोलें।