अक्टूबर २०२६
आरंभ: ४:५२ पूर्वाह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०५ पूर्वाह्न, १ अक्टू॰
अवधि: १ घं १२ मि · सूर्योदय: ६:०५ पूर्वाह्न
संध्यावंदन, गायत्री मंत्र जप और सूर्य अर्घ्य के लिए सूर्योदय पूर्व का पवित्र काल।
स्थान: भारत
आरंभ: ४:५२ पूर्वाह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०५ पूर्वाह्न, १ अक्टू॰
अवधि: १ घं १२ मि · सूर्योदय: ६:०५ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५३ पूर्वाह्न, २ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०६ पूर्वाह्न, २ अक्टू॰
अवधि: १ घं १२ मि · सूर्योदय: ६:०६ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५३ पूर्वाह्न, ३ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०६ पूर्वाह्न, ३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०६ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५३ पूर्वाह्न, ४ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०६ पूर्वाह्न, ४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०६ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, ५ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०७ पूर्वाह्न, ५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०७ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, ६ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०७ पूर्वाह्न, ६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०७ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, ७ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०७ पूर्वाह्न, ७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०७ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, ८ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०८ पूर्वाह्न, ८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०८ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, ९ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०८ पूर्वाह्न, ९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०८ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५४ पूर्वाह्न, १० अक्टू॰
समाप्ति: ६:०८ पूर्वाह्न, १० अक्टू॰
अवधि: १ घं १३ मि · सूर्योदय: ६:०८ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५५ पूर्वाह्न, ११ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०९ पूर्वाह्न, ११ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:०९ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५५ पूर्वाह्न, १२ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०९ पूर्वाह्न, १२ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:०९ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५५ पूर्वाह्न, १३ अक्टू॰
समाप्ति: ६:०९ पूर्वाह्न, १३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:०९ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५६ पूर्वाह्न, १४ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१० पूर्वाह्न, १४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:१० पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५६ पूर्वाह्न, १५ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१० पूर्वाह्न, १५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:१० पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५६ पूर्वाह्न, १६ अक्टू॰
समाप्ति: ६:११ पूर्वाह्न, १६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:११ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५६ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰
समाप्ति: ६:११ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:११ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५६ पूर्वाह्न, १८ अक्टू॰
समाप्ति: ६:११ पूर्वाह्न, १८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १४ मि · सूर्योदय: ६:११ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५७ पूर्वाह्न, १९ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१२ पूर्वाह्न, १९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१२ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५७ पूर्वाह्न, २० अक्टू॰
समाप्ति: ६:१२ पूर्वाह्न, २० अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१२ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५८ पूर्वाह्न, २१ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१३ पूर्वाह्न, २१ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१३ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५८ पूर्वाह्न, २२ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१३ पूर्वाह्न, २२ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१३ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५८ पूर्वाह्न, २३ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१४ पूर्वाह्न, २३ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१४ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५८ पूर्वाह्न, २४ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१४ पूर्वाह्न, २४ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१४ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५९ पूर्वाह्न, २५ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१५ पूर्वाह्न, २५ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१५ पूर्वाह्न
आरंभ: ४:५९ पूर्वाह्न, २६ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१५ पूर्वाह्न, २६ अक्टू॰
अवधि: १ घं १५ मि · सूर्योदय: ६:१५ पूर्वाह्न
आरंभ: ५:०० पूर्वाह्न, २७ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१६ पूर्वाह्न, २७ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्योदय: ६:१६ पूर्वाह्न
आरंभ: ५:०० पूर्वाह्न, २८ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१६ पूर्वाह्न, २८ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्योदय: ६:१६ पूर्वाह्न
आरंभ: ५:०१ पूर्वाह्न, २९ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१७ पूर्वाह्न, २९ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्योदय: ६:१७ पूर्वाह्न
आरंभ: ५:०१ पूर्वाह्न, ३० अक्टू॰
समाप्ति: ६:१७ पूर्वाह्न, ३० अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्योदय: ६:१७ पूर्वाह्न
आरंभ: ५:०२ पूर्वाह्न, ३१ अक्टू॰
समाप्ति: ६:१८ पूर्वाह्न, ३१ अक्टू॰
अवधि: १ घं १६ मि · सूर्योदय: ६:१८ पूर्वाह्न
प्रातः संध्या रात्रि के समापन और सूर्योदय के मध्य का अत्यंत पावन संधि काल है। वैदिक शास्त्रों में इसे त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जो आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।
यह काल सूर्योदय से लगभग ३ घटी (१.५ मुहूर्त अर्थात् लगभग ७२ मिनट) पूर्व प्रारंभ होता है। यह समय संध्यावंदन, गायत्री जप, प्राणायाम और सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित करने के लिए शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।
प्रातः संध्या दिन की तीन संधियों (त्रिसंध्या) में पहली है। धर्मशास्त्र तारे दिखते रहते ही प्रातः संध्यावंदन आरंभ करने और सूर्योदय पर सूर्य को जल अर्पित कर उसे पूर्ण करने की सलाह देते हैं।
प्रातः संध्या की सटीक गणना स्थानीय सूर्योदय और रात्रि मान पर आधारित होती है। सूर्य की किरणें दृष्टिगोचर होने से पूर्व की जाने वाली साधना अक्षय पुण्य प्रदान करती है।
समय आपके चुने हुए स्थान के अनुसार निकाले गए हैं (जब तक आप कोई स्थान न चुनें, भारत के लिए)। अपने स्थान के पूरे दिन के लिए दैनिक पंचांग खोलें।