कृष्ण पक्ष प्रतिपदा • ९९% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ३ अप्रैल २०२६

१६, चैत्रकृष्ण पक्ष, प्रतिपदा
२०८२ गुजराती संवत
३
अप्रैल २०२६
शुक्रवार
∞योग:व्याघातसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०८:४२ पूर्वाह्न
अगला: द्वितीया

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:२४ अपराह्न
अगला: स्वाति

योग

समाप्ति समय ०२:०८ अपराह्न
अगला: हर्षण

करण

समाप्ति समय ०८:४२ पूर्वाह्न
अगला: तैतिल

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०६ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:३० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
प्रतिपदा (०८:४२ पूर्वाह्न)
द्वितीया
नक्षत्र
चित्रा (समाप्ति समय ०७:२४ अपराह्न)
स्वाति
योग
व्याघात (समाप्ति समय ०२:०८ अपराह्न)
हर्षण
करण
कौलव (०८:४२ पूर्वाह्न)
तैतिल (समाप्ति समय ०९:२३ अपराह्न)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०६ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:३० अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे २३ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१८ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०७:४३ अपराह्न
चंद्रास्त
०६:३० पूर्वाह्न
चंद्र राशि: कन्यारात्रिमान: ११ घंटे ३५ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
प्रतिपदासमाप्ति समय ०८:४२ पूर्वाह्न• अगला: द्वितीया
व्याघातसमाप्ति समय ०२:०८ अपराह्न• अगला: हर्षण
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
चैत्र
चित्रासमाप्ति समय ०७:२४ अपराह्न• अगला: स्वाति
करण
कौलव(०८:४२ पूर्वाह्न)तैतिल(०९:२३ अपराह्न)गरज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
वैशाख

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद १)
चंद्र राशि
कन्या(०६:२८ पूर्वाह्न तक)→ तुला (०६:२८ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद १
नक्षत्र पद
चित्रा (पद २)०६:२८ पूर्वाह्नचित्रा (पद ३)१२:५५ अपराह्नचित्रा (पद ४)०७:२४ अपराह्नस्वाति (पद १)०१:५५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४स्वाति (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३४९.०५°चन्द्र भोगांश: १७९.८१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
२०(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
वैशाख(पूर्णिमांत)
चैत्र(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३३ पूर्वाह्न – ०५:२० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५७ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न
  • ११:५३ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३० अपराह्न – ०६:५३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३० अपराह्न – ०७:४० अपराह्न
  • अमृत काल
    ०९:५७ पूर्वाह्न – ११:४० पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५४ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल७ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • १०:४५ पूर्वाह्न – १२:१८ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:२४ अपराह्न – ०४:५७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०७:३९ पूर्वाह्न – ०९:१२ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:३५ पूर्वाह्न – ०९:२५ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०१:३१ पूर्वाह्न – ०३:१५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०७:२४ अपराह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
अशुभ योग (९)० सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०६:२८ पूर्वाह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०८:४२ पूर्वाह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
गौरी (गौरी के साथ)(समाप्ति समय ०८:४२ पूर्वाह्न)→सभा (शुभ फलदायी)
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
चन्द्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०६:०६ पूर्वाह्न – ०६:४३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:४३ पूर्वाह्न – ०८:२३ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:२३ पूर्वाह्न – १०:२२ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:२२ पूर्वाह्न – १२:३५ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१२:३५ अपराह्न – ०२:५१ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:५१ अपराह्न – ०५:०२ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०५:०२ अपराह्न – ०७:१२ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:१२ अपराह्न – ०९:२७ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:२७ अपराह्न – ११:४२ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
११:४२ अपराह्न – ०१:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ पंचक
०१:४८ पूर्वाह्न – ०३:३४ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
राज पंचक (राज्य लाभ)
०३:३४ पूर्वाह्न – ०५:०८ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ पंचक
०५:०८ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
चोर पंचक (हानि भय)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०६ पूर्वाह्न – ०६:४३ पूर्वाह्न
०६:४३ पूर्वाह्न – ०८:२३ पूर्वाह्न
०८:२३ पूर्वाह्न – १०:२२ पूर्वाह्न
१०:२२ पूर्वाह्न – १२:३५ अपराह्न
१२:३५ अपराह्न – ०२:५१ अपराह्न
०२:५१ अपराह्न – ०५:०२ अपराह्न
०५:०२ अपराह्न – ०७:१२ अपराह्न
०७:१२ अपराह्न – ०९:२७ अपराह्न
०९:२७ अपराह्न – ११:४२ अपराह्न
११:४२ अपराह्न – ०१:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०१:४८ पूर्वाह्न – ०३:३४ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०३:३४ पूर्वाह्न – ०५:०८ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०५:०८ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२६६८
लाहिरी अयनांश
२४.२२२९७२°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११३३
संशोधित जूलियन दिन
६११३३
राता डाई (RD)
७३९७०९
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१३ चैत्र, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
२१ मार्च, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।