८% प्रकाश

दैनिक पंचांग, ८ अक्टूबर २०२६

२८, भाद्रपद

कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी

२०८२ गुजराती संवत
•
८
८ अक्टूबर २०२६
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:Chaturmasa Period

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

त्रयोदशी
समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न
अगला: चतुर्दशी

नक्षत्र

पूर्वाफाल्गुनी
समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न
अगला: उत्तराफाल्गुनी

योग

शुक्ल
समाप्ति समय १२:५७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
अगला: ब्रह्म

करण

वणिज
समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न
पूर्व: गरज (समाप्त १०:४४ पूर्वाह्न)

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०८ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००५:५५ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०९ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९ (अगला सूर्योदय)
तिथि
त्रयोदशी (समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न)
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी (समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न)
उत्तराफाल्गुनी
योग
शुक्ल (समाप्ति समय १२:५७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९)
ब्रह्म
करण
गरज (१०:४४ पूर्वाह्न)
वणिज (समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०८ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०५:५५ अपराह्न
सूर्य राशि: कन्यादिनमान: ११ घंटे ४६ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:०२ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०४:४२ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०४:२४ अपराह्न
चंद्र राशि: सिंहरात्रिमान: १२ घंटे १४ मिनट

विस्तृत पंचांग

तिथि
त्रयोदशी(समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न)
अगला: चतुर्दशी
पक्षकृष्ण पक्ष
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी(समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न)
अगला: उत्तराफाल्गुनी
योग
शुक्ल(समाप्ति समय १२:५७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९)
अगला: ब्रह्म
करण
गरज(समाप्ति समय १०:४४ पूर्वाह्न)
वणिज(समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)(समाप्ति समय सम्पूर्ण रात्रि)
मास (अमान्त)भाद्रपद
मास (पूर्णिमान्त)आश्विन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

चंद्र राशि
सिंह(०३:१७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९ तक)
कन्या (०३:१७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९ से)
सूर्य राशिकन्या
सूर्य नक्षत्रहस्त (पद ४)
नक्षत्र पद
पूर्वाफाल्गुनी (पद २)समाप्ति समय ०९:२७ पूर्वाह्न
पूर्वाफाल्गुनी (पद ३)समाप्ति समय ०३:२३ अपराह्न
पूर्वाफाल्गुनी (पद ४)समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न
उत्तराफाल्गुनी (पद १)समाप्ति समय ०३:१७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
उत्तराफाल्गुनी (पद २)
सूर्य व चंद्र रेखांशSun: १७०.५३° · Moon: १३८.१३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

विक्रम संवत्२०८३सिद्धार्थी
शक संवत्१९४८पराभव
गुजराती संवत्२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते२२
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी (तक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६)
रौद्र
चन्द्रमास
आश्विन(पूर्णिमांत)
भाद्रपद(अमांत)

चन्द्र मास एवं संवत्

विक्रम संवत्
२०८३
शक संवत्
१९४८
गुजराती संवत्
२०८२
संवत्सर (६० वर्षीय बृहस्पति चक्र)
पराभव

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त
    ध्यान, योग और विद्यारंभ के लिए सर्वोत्तम काल
    ०४:३१ पूर्वाह्न – ०५:२० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    प्रातः कालीन पवित्र संध्या वंदन समय
    ०४:५६ पूर्वाह्न – ०६:०९ पूर्वाह्न
  • अभिजित मुहूर्त
    सर्वकार्य सिद्धिदायक अत्यंत शुभ दोपहर काल
    ११:३९ पूर्वाह्न – १२:२६ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    विजय और सफलता प्रदान करने वाला शुभ मुहूर्त
    ०२:०० अपराह्न – ०२:४७ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    सायंकालीन गोधूलि वेला, पूजन के लिए श्रेष्ठ
    ०५:५५ अपराह्न – ०६:२० अपराह्न
  • सायं संध्या
    संध्या पूजन एवं ईश्वर स्मरण का समय
    ०५:५५ अपराह्न – ०७:०९ अपराह्न
  • अमृत काल
    अमृत तुल्य शुभ फलदायी समय
    ०३:२५ अपराह्न – ०४:५९ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    मध्यरात्रि साधना एवं शिव आराधना काल
    ११:३८ अपराह्न – १२:२७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९

अशुभ काल

  • राहु काल
    अशुभ समय; नए व महत्वपूर्ण कार्यों से बचें
    ०१:३० अपराह्न – ०२:५९ अपराह्न
  • यमगंड
    यमगंड काल; यात्रा व शुभ कार्य वर्जित
    ०६:०९ पूर्वाह्न – ०७:३७ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    गुलिक काल; नवीन कार्यों के लिए अनुपयुक्त
    ०९:०६ पूर्वाह्न – १०:३४ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    अशुभ दुर्मुहूर्त काल; मुख्य कार्यों से बचें
    १०:०४ पूर्वाह्न – १०:५१ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    विष घटी काल; पूर्णतः त्याज्य
    ०४:३१ पूर्वाह्न – ०६:०७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
  • बाण दोष
    बाण दोष काल; निर्माण व यात्रा त्याज्य
    Roga –

शुभ योग & आनंदादि एवं तमिल योग

sarvarthaSiddhiYoga
कोई नहीं
—
रवि योग
सक्रिय
०६:२१ पूर्वाह्न – ०९:१९ अपराह्न से अगले सूर्योदय तक
amritaSiddhiYoga
कोई नहीं
—
पुष्य योग
कोई नहीं
—
आनंदादि योग
❌ गद(समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न)→ ❌ मातंग
अशुभ
तमिल योग
Siddha(समाप्ति समय ०९:१९ अपराह्न)→ Marana
शुभ

ऋतु एवं अयन

दृक अयनदक्षिणायन
वैदिक अयनदक्षिणायन
दृक ऋतुवर्षा ऋतु
वैदिक ऋतुवर्षा ऋतु
नेत्रम्० (नेत्रहीन - अशुभ/वर्ज्य)
जीव०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

चन्द्र निवासपूर्व(०३:१७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९ तक) → दक्षिण
अग्निवासआकाश (अशुभ)(समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न) → पाताल (अशुभ)
दिशा शूलदक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववासin bhojana(समाप्ति समय १०:१६ अपराह्न) → in shmashana
राहु वासदक्षिण
होमाहुतिसूर्य / अग्नि (यज्ञ हेतु शुभ)
कुम्भ चक्रमुख कुम्भ (शुभ)
पंचक रहितशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

kingRaja
मंगल
primeMinisterMantri
सूर्य
commanderSenapati
शनि
financeMinisterDhanadhinatha
बुध
agricultureMinisterSasyeshadhipati
गुरू

चंद्रबलम् एवं ताराबलम्

दिन की अनुकूल राशियाँ:

मेष
प्रतिकूल
वृषभ
प्रतिकूल
मिथुन
शुभ / अनुकूल
कर्क
प्रतिकूल
सिंह
शुभ / अनुकूल
कन्या
प्रतिकूल
तुला
शुभ / अनुकूल
वृश्चिक
शुभ / अनुकूल
धनु
प्रतिकूल
मकर
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
कुंभ
शुभ / अनुकूल
मीन
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

दिन के अनुकूल नक्षत्र:

अश्विनी
taraSampatTara
भरणी
taraJanmaTara
कृत्तिका
taraParamaMitraTara
रोहिणी
taraMitraTara
मृगशिरा
taraNaidhanaTara
आर्द्रा
taraSadhanaTara
पुनर्वसु
taraPratyakTara
पुष्य
taraKshemaTara
आश्लेषा
taraVipatTara

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

०६:०८ पूर्वाह्न – ०६:५२ पूर्वाह्नशुभ पंचक
०६:५२ पूर्वाह्न – ०९:०७ पूर्वाह्नचोर पंचक (हानि भय)
०९:०७ पूर्वाह्न – ११:२२ पूर्वाह्नरोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:२२ पूर्वाह्न – ०१:२८ अपराह्नरोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०१:२८ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्नशुभ पंचक
०३:१५ अपराह्न – ०४:४८ अपराह्नमृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०४:४८ अपराह्न – ०६:१९ अपराह्नअग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:१९ अपराह्न – ०८:०० अपराह्नशुभ पंचक
०८:०० अपराह्न – ०९:५८ अपराह्नमृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०९:५८ अपराह्न – १२:११ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९राज पंचक (राज्य लाभ)
१२:११ पूर्वाह्न – ०२:२७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९चोर पंचक (हानि भय)
०२:२७ पूर्वाह्न – ०४:३८ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९शुभ पंचक
०४:३८ पूर्वाह्न – ०६:०९ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)

उदय लग्न समय

कन्या०६:०८ पूर्वाह्न – ०६:५२ पूर्वाह्न
तुला०६:५२ पूर्वाह्न – ०९:०७ पूर्वाह्न
वृश्चिक०९:०७ पूर्वाह्न – ११:२२ पूर्वाह्न
धनु११:२२ पूर्वाह्न – ०१:२८ अपराह्न
मकर०१:२८ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्न
कुंभ०३:१५ अपराह्न – ०४:४८ अपराह्न
मीन०४:४८ अपराह्न – ०६:१९ अपराह्न
मेष०६:१९ अपराह्न – ०८:०० अपराह्न
वृषभ०८:०० अपराह्न – ०९:५८ अपराह्न
मिथुन०९:५८ अपराह्न – १२:११ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
कर्क१२:११ पूर्वाह्न – ०२:२७ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
सिंह०२:२७ पूर्वाह्न – ०४:३८ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९
कन्या०४:३८ पूर्वाह्न – ०६:०९ पूर्वाह्न, अक्टूबर ९

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

कलियुग वर्ष५१२७
कलि अहर्गण१८७२८५६
जूलियन दिनांकSeptember २५, २०२६ CE
जूलियन दिन२४६१३२१
संशोधित जूलियन दिन६१३२१
राता डाई (RD)७३९८९७
राष्ट्रीय दिनांक१६ आश्विन, १९४८
राष्ट्रीय निरयण दिनांक१० Bhadrapada, १९४८
लाहिरी अयनांश२४.२३०१५८

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

Chaturmasa Period

Major Festival

Auspicious celebration and sacred observance of Chaturmasa Period bringing families and communities together in devotion.

धार्मिक महत्व: Every traditional festival carries a profound timeless message—reminding us of the interconnectedness of all life, the cycles of nature, and the ultimate triumph of goodness, gratitude, and moral integrity. Participating in Chaturmasa Period rejuvenates the spirit, alleviates daily stresses, and passes down cherished cultural values and sacred wisdom to future generations.
पूजा विधि एवं नियम:
  • Early morning purification bath and wearing clean, festive traditional attire.
  • Illuminating the home shrine with ghee lamps and offering fresh fragrant flowers.
  • Performing traditional prayers and chanting uplifting hymns and stotras.
  • Preparing and sharing delicious festive meals and consecrated prasad with neighbors and the needy.
  • Expressing gratitude for health, family unity, and prosperity.

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि: सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र: चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण: एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार: सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।

और जानें