अक्टूबर २०२६
आरंभ: ११:३९ अपराह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२८ पूर्वाह्न, २ अक्टू॰
अवधि: ४८ मिनट · सूर्यास्त: ६:०२ अपराह्न
मध्यरात्रि का अत्यंत पावन मुहूर्त, जो शिव उपासना, तंत्र, गहन ध्यान और शक्ति साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
स्थान: भारत
आरंभ: ११:३९ अपराह्न, १ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२८ पूर्वाह्न, २ अक्टू॰
अवधि: ४८ मिनट · सूर्यास्त: ६:०२ अपराह्न
आरंभ: ११:३९ अपराह्न, २ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२७ पूर्वाह्न, ३ अक्टू॰
अवधि: ४८ मिनट · सूर्यास्त: ६:०१ अपराह्न
आरंभ: ११:३८ अपराह्न, ३ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२७ पूर्वाह्न, ४ अक्टू॰
अवधि: ४८ मिनट · सूर्यास्त: ६:०० अपराह्न
आरंभ: ११:३८ अपराह्न, ४ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२७ पूर्वाह्न, ५ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५९ अपराह्न
आरंभ: ११:३८ अपराह्न, ५ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२६ पूर्वाह्न, ६ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५८ अपराह्न
आरंभ: ११:३७ अपराह्न, ६ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२६ पूर्वाह्न, ७ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५७ अपराह्न
आरंभ: ११:३७ अपराह्न, ७ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२६ पूर्वाह्न, ८ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५६ अपराह्न
आरंभ: ११:३७ अपराह्न, ८ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२५ पूर्वाह्न, ९ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५५ अपराह्न
आरंभ: ११:३६ अपराह्न, ९ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२५ पूर्वाह्न, १० अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५४ अपराह्न
आरंभ: ११:३७ अपराह्न, १० अक्टू॰
समाप्ति: १२:२६ पूर्वाह्न, ११ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५४ अपराह्न
आरंभ: ११:३६ अपराह्न, ११ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२५ पूर्वाह्न, १२ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५३ अपराह्न
आरंभ: ११:३५ अपराह्न, १२ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२५ पूर्वाह्न, १३ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५२ अपराह्न
आरंभ: ११:३५ अपराह्न, १३ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२५ पूर्वाह्न, १४ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५१ अपराह्न
आरंभ: ११:३५ अपराह्न, १४ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२४ पूर्वाह्न, १५ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:५० अपराह्न
आरंभ: ११:३५ अपराह्न, १५ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२४ पूर्वाह्न, १६ अक्टू॰
अवधि: ४९ मिनट · सूर्यास्त: ५:४९ अपराह्न
आरंभ: ११:३४ अपराह्न, १६ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२४ पूर्वाह्न, १७ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४८ अपराह्न
आरंभ: ११:३४ अपराह्न, १७ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, १८ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४७ अपराह्न
आरंभ: ११:३४ अपराह्न, १८ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२४ पूर्वाह्न, १९ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४७ अपराह्न
आरंभ: ११:३४ अपराह्न, १९ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २० अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४६ अपराह्न
आरंभ: ११:३४ अपराह्न, २० अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २१ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४५ अपराह्न
आरंभ: ११:३३ अपराह्न, २१ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २२ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४४ अपराह्न
आरंभ: ११:३३ अपराह्न, २२ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २३ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४३ अपराह्न
आरंभ: ११:३३ अपराह्न, २३ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २४ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४३ अपराह्न
आरंभ: ११:३३ अपराह्न, २४ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २५ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४२ अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, २५ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २६ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४१ अपराह्न
आरंभ: ११:३३ अपराह्न, २६ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २७ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४१ अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, २७ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २८ अक्टू॰
अवधि: ५० मिनट · सूर्यास्त: ५:४० अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, २८ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, २९ अक्टू॰
अवधि: ५१ मिनट · सूर्यास्त: ५:३९ अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, २९ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, ३० अक्टू॰
अवधि: ५१ मिनट · सूर्यास्त: ५:३९ अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, ३० अक्टू॰
समाप्ति: १२:२३ पूर्वाह्न, ३१ अक्टू॰
अवधि: ५१ मिनट · सूर्यास्त: ५:३८ अपराह्न
आरंभ: ११:३२ अपराह्न, ३१ अक्टू॰
समाप्ति: १२:२२ पूर्वाह्न, १ नव॰
अवधि: ५१ मिनट · सूर्यास्त: ५:३७ अपराह्न
निशिता मुहूर्त (अथवा निशीथ काल) रात्रि का ठीक मध्य भाग अर्थात् ८वां मुहूर्त होता है, जो खगोलीय मध्यरात्रि (सूर्यास्त और सूर्योदय के ठीक मध्य) में पड़ता है। जब रात्रि की अवधि को १५ समान भागों में विभाजित किया जाता है, तो ८वां भाग निशिता काल कहलाता है।
यद्यपि सामान्य लौकिक कार्य और यात्रा मध्यरात्रि में त्याज्य माने जाते हैं, परंतु आध्यात्मिक साधना, तंत्र, मंत्र सिद्धि, भगवान शिव और मां काली की उपासना के लिए निशिता काल अत्यंत सिद्ध और फलदायी माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भी भाद्रपद अष्टमी को निशीथ काल में ही हुआ था। महाशिवरात्रि की लिंगोद्भव पूजा इसी मुहूर्त में की जाती है।
महाशिवरात्रि की लिंगोद्भव पूजा और जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण का जन्म, दोनों निशीथ काल में होते हैं। सांसारिक कार्यों के लिए इसे टाला जाता है, परंतु मंत्र जप, गहन ध्यान और रात्रि पूजा के लिए यह सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
निशिता मुहूर्त का समय सूर्यास्त और सूर्योदय के आधार पर प्रतिदिन बदलता है। रात्रि की लंबाई के अनुसार इस मुहूर्त की अवधि सामान्यतः ४४ से ५२ मिनट के बीच होती है।
समय आपके चुने हुए स्थान के अनुसार निकाले गए हैं (जब तक आप कोई स्थान न चुनें, भारत के लिए)। अपने स्थान के पूरे दिन के लिए दैनिक पंचांग खोलें।