पञ्चाङ्ग के पाँच अंग
वार
२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)
स्थानीय सौर दिवससूर्य एवं चन्द्र
सूर्य
चन्द्र
विस्तृत पंचांग
राशि एवं नक्षत्र विवरण
चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:१५ पूर्वाह्न
- प्रातः संध्या०४:५१ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न
- ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३४ अपराह्न
- विजय मुहूर्त०२:१२ अपराह्न – ०३:०२ अपराह्न
- गोधूलि मुहूर्त०६:१८ अपराह्न – ०६:४१ अपराह्न
- सायं संध्या०६:१८ अपराह्न – ०७:२८ अपराह्न
- अमृत काल०४:१९ पूर्वाह्न – ०६:०१ पूर्वाह्न
- निशीथ मुहूर्त११:४६ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, सितम्बर १६
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- ०६:०१ पूर्वाह्न – ०३:२० अपराह्न
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- ०६:०१ पूर्वाह्न – ०३:२० अपराह्न
- कोई नहीं
शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।
अशुभ काल
- ०३:१४ अपराह्न – ०४:४६ अपराह्न
- यमगंड०९:०६ पूर्वाह्न – १०:३८ पूर्वाह्न
- गुलिक काल१२:१० अपराह्न – ०१:४२ अपराह्न
- दुर्मुहूर्त०८:२९ पूर्वाह्न – ०९:१८ पूर्वाह्न
- वर्ज्यम्०९:२५ अपराह्न – ११:०९ अपराह्न
- बाण दोषरोग
- भद्रा (विष्टि)०६:०१ पूर्वाह्न – ०७:४४ पूर्वाह्न
- विंचुडोकोई नहीं
- पंचककोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- ०७:४४ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर १६
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- १२:१९ अपराह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर १६
- कोई नहीं
- कोई नहीं
परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।
ऋतु एवं अयन
निवास, शूल एवं वास
मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)
चंद्रबलम्
ताराबलम्
पंचक रहित मुहूर्त चक्र
उदय लग्न समय
अन्य कैलेंडर एवं युग गणना
पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान
विनायक चतुर्थी
प्रमुख पर्वविघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव एवं १० दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ।
समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।
- ✦वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
- ✦२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
- ✦प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
- ✦अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन
गणेश चतुर्थी
प्रमुख पर्वविघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव एवं १० दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ।
समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।
- ✦वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
- ✦२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
- ✦प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
- ✦अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन
सिद्धिविनायक चतुर्थी
प्रमुख पर्वसमस्त विघ्न-बाधाओं के निवारण, बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और मनोकामना पूर्ति हेतु भगवान श्री गणेश को समर्पित सिद्धिविनायक चतुर्थी का पावन व्रत।
सिद्धिविनायक चतुर्थी का आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व: १. विघ्न-निवारण: जीवन के समस्त संकटों, विघ्नों और नकारात्मक प्रभावों का समूल नाश होता है। २. बुद्धि एवं ऋद्धि-सिद्धि: भगवान गणेश की कृपा से ज्ञान, विवेक, व्यापार में उन्नति और सफलता प्राप्त होती है। ३. सुख-समृद्धि: परिवार में परस्पर सौहार्द, आरोग्य और शांति का स्थायी वास होता है।
- ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें एवं व्रत का संकल्प लें।
- ✦पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर तांबे या पीतल की चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- ✦भगवान गणेश को लाल सिंदूर, अक्षत, सुगंधित चंदन और २१ दूर्वा दल समर्पित करें।
- ✦श्री गणेश चालीसा, अथर्वशीर्ष और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करें।
- ✦मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल एवं नारियल का भोग लगाएं।
- ✦संध्याकाल/चंद्र दर्शन के पश्चात गणेश जी की आरती कर सात्विक प्रसाद से पारण करें।
विनायक चतुर्थी
प्रमुख पर्वसमस्त विघ्न-बाधाओं के निवारण, बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और मनोकामना पूर्ति हेतु भगवान श्री गणेश को समर्पित विनायक चतुर्थी का पावन व्रत।
विनायक चतुर्थी का आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व: १. विघ्न-निवारण: जीवन के समस्त संकटों, विघ्नों और नकारात्मक प्रभावों का समूल नाश होता है। २. बुद्धि एवं ऋद्धि-सिद्धि: भगवान गणेश की कृपा से ज्ञान, विवेक, व्यापार में उन्नति और सफलता प्राप्त होती है। ३. सुख-समृद्धि: परिवार में परस्पर सौहार्द, आरोग्य और शांति का स्थायी वास होता है।
- ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें एवं व्रत का संकल्प लें।
- ✦पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर तांबे या पीतल की चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- ✦भगवान गणेश को लाल सिंदूर, अक्षत, सुगंधित चंदन और २१ दूर्वा दल समर्पित करें।
- ✦श्री गणेश चालीसा, अथर्वशीर्ष और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करें।
- ✦मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल एवं नारियल का भोग लगाएं।
- ✦संध्याकाल/चंद्र दर्शन के पश्चात गणेश जी की आरती कर सात्विक प्रसाद से पारण करें।
भाद्रपद
प्रमुख पर्ववैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Bhadra का पावन पर्व।
Bhadra का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।
- ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
- ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।
चातुर्मास अवधि
प्रमुख पर्ववैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चातुर्मास अवधि का पावन पर्व।
चातुर्मास अवधि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।
- ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
- ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।
पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग
तिथि
1सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।
नक्षत्र
2चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।
योग
3सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।
करण
4एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।
वार
5सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।