शुक्ल पक्ष चतुर्दशी • ९८% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २ मार्च २०२६

१४, फाल्गुनशुक्ल पक्ष, चतुर्दशी
२०८२ गुजराती संवत
२
मार्च २०२६
सोमवार
पर्व एवं व्रत सूची:फाल्गुन पूर्णिमाइष्टिहोली / धुलंडीGanda Moola∞योग:अतिगण्ड✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न
अगला: पूर्णिमा

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:५१ पूर्वाह्न
अगला: मघा

योग

समाप्ति समय १२:१८ अपराह्न
अगला: सुकर्मा

करण

समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:३५ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:१८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:३५ पूर्वाह्न, मार्च ३ (अगला सूर्योदय)
तिथि
चतुर्दशी (समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न)
पूर्णिमा
नक्षत्र
आश्लेषा
मघा
योग
अतिगण्ड (समाप्ति समय १२:१८ अपराह्न)
सुकर्मा
करण
वणिज (समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०५:२८ पूर्वाह्न, मार्च ३)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:३५ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:१८ अपराह्न
सूर्य राशि: कुंभदिनमान: ११ घंटे ४२ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२६ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०५:२० अपराह्न
चंद्रास्त
०६:२० पूर्वाह्न, मार्च ३
चंद्र राशि: कर्करात्रिमान: १२ घंटे १६ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
चतुर्दशीसमाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न• अगला: पूर्णिमा
अतिगण्डसमाप्ति समय १२:१८ अपराह्न• अगला: सुकर्मा
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
फाल्गुन
आश्लेषासमाप्ति समय ०७:५१ पूर्वाह्न• अगला: मघा
करण
वणिज(०५:५६ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(०५:२८ पूर्वाह्न, मार्च ३)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: शतभिषा (पद ४)
चंद्र राशि
कर्क(०७:५१ पूर्वाह्न तक)→ सिंह (०७:५१ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
कुंभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
आश्लेषा (पद ४)०७:५१ पूर्वाह्नमघा (पद १)०१:४३ अपराह्नमघा (पद २)०७:३८ अपराह्नमघा (पद ३)०१:३३ पूर्वाह्न, मार्च ३मघा (पद ४)जारी
सूर्य भोगांश: ३१७.२३°चन्द्र भोगांश: ११९.२८°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
१८(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
फाल्गुन(पूर्णिमांत)
फाल्गुन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५७ पूर्वाह्न – ०५:४७ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:२२ पूर्वाह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न
  • १२:०४ अपराह्न – १२:५० अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:११ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१८ अपराह्न – ०६:४३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१८ अपराह्न – ०७:३२ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:३७ अपराह्न – ०१:१२ पूर्वाह्न, मार्च ३
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०२ पूर्वाह्न – १२:५१ पूर्वाह्न, मार्च ३
शुभ योग (८)२ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०८:०४ पूर्वाह्न – ०९:३१ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    १०:५९ पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:५५ अपराह्न – ०३:२२ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:५० अपराह्न – ०१:३७ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०७:४१ अपराह्न – ०९:१५ अपराह्न
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    ०५:५६ अपराह्न – ०५:२८ पूर्वाह्न, मार्च ३
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०७:५१ पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, मार्च ३
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(०७:५१ पूर्वाह्न तक)→पूर्व
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०५:५६ अपराह्न)→श्मशान
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
चन्द्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०६:३५ पूर्वाह्न – ०७:१७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:१७ पूर्वाह्न – ०८:४८ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०८:४८ पूर्वाह्न – १०:२९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:२९ पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:२७ अपराह्न – ०२:४० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०२:४० अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:५६ अपराह्न – ०७:०७ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:०७ अपराह्न – ०९:१७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०९:१७ अपराह्न – ११:३२ अपराह्न
शुभ पंचक
११:३२ अपराह्न – ०१:४७ पूर्वाह्न, मार्च ३
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:४७ पूर्वाह्न – ०३:५३ पूर्वाह्न, मार्च ३
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:५३ पूर्वाह्न – ०५:४० पूर्वाह्न, मार्च ३
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०५:४० पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, मार्च ३
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:३५ पूर्वाह्न – ०७:१७ पूर्वाह्न
०७:१७ पूर्वाह्न – ०८:४८ पूर्वाह्न
०८:४८ पूर्वाह्न – १०:२९ पूर्वाह्न
१०:२९ पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
१२:२७ अपराह्न – ०२:४० अपराह्न
०२:४० अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
०४:५६ अपराह्न – ०७:०७ अपराह्न
०७:०७ अपराह्न – ०९:१७ अपराह्न
०९:१७ अपराह्न – ११:३२ अपराह्न
११:३२ अपराह्न – ०१:४७ पूर्वाह्न, मार्च ३
०१:४७ पूर्वाह्न – ०३:५३ पूर्वाह्न, मार्च ३
०३:५३ पूर्वाह्न – ०५:४० पूर्वाह्न, मार्च ३
०५:४० पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, मार्च ३
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२६३६
लाहिरी अयनांश
२४.२२१७४९°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११०१
संशोधित जूलियन दिन
६११०१
राता डाई (RD)
७३९६७७
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
११ फाल्गुन, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
१७ फ़रवरी, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

फाल्गुन पूर्णिमा

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला फाल्गुन पूर्णिमा का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

इष्टि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला इष्टि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

इष्टि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

होली / धुलंडी

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला होली / धुलंडी का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

होली / धुलंडी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Ganda Moola

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ganda Moola का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ganda Moola का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।