शुक्ल पक्ष नवमी • ६४% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ४ अप्रैल २०२८

९, चैत्रशुक्ल पक्ष, नवमी
२०८४ गुजराती संवत
४
अप्रैल २०२८
मंगलवार
पर्व एवं व्रत सूची:श्री राम नवमी∞योग:सुकर्मा✦सर्वार्थ सिद्धि✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय १०:०७ पूर्वाह्न
अगला: दशमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ११:३४ अपराह्न
अगला: आश्लेषा

योग

समाप्ति समय ०४:२२ अपराह्न
अगला: धृति

करण

समाप्ति समय १०:०७ पूर्वाह्न
अगला: तैतिल

वार

मंगलवार
वार (मंगल)
ग्रह स्वामी: मंगल

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०४ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:३० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५ (अगला सूर्योदय)
तिथि
नवमी (१०:०७ पूर्वाह्न)
दशमी
नक्षत्र
पुष्य (समाप्ति समय ११:३४ अपराह्न)
आश्लेषा
योग
सुकर्मा (समाप्ति समय ०४:२२ अपराह्न)
धृति
करण
कौलव (१०:०७ पूर्वाह्न)
तैतिल (समाप्ति समय ०९:०० अपराह्न)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०४ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:३० अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे २५ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१७ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०१:१८ अपराह्न
चंद्रास्त
०२:४५ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
चंद्र राशि: कर्करात्रिमान: ११ घंटे ३३ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
नवमीसमाप्ति समय १०:०७ पूर्वाह्न• अगला: दशमी
सुकर्मासमाप्ति समय ०४:२२ अपराह्न• अगला: धृति
वार
मंगलवार
मास (अमान्त)
चैत्र
पुष्यसमाप्ति समय ११:३४ अपराह्न• अगला: आश्लेषा
करण
कौलव(१०:०७ पूर्वाह्न)तैतिल(०९:०० अपराह्न)गरज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
चैत्र

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद २)
चंद्र राशि
कर्क(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ सिंह (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद २
नक्षत्र पद
पुष्य (पद १)०६:४१ पूर्वाह्नपुष्य (पद २)१२:२० अपराह्नपुष्य (पद ३)०५:५८ अपराह्नपुष्य (पद ४)११:३४ अपराह्नआश्लेषा (पद १)०५:०८ पूर्वाह्न, अप्रैल ५आश्लेषा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३५०.५२°चन्द्र भोगांश: ९६.३१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८५ · शक १९५०
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९५०कीलक
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
२२(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
चैत्र(पूर्णिमांत)
चैत्र(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३२ पूर्वाह्न – ०५:१८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५५ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न
  • ११:५३ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३१ अपराह्न – ०६:५४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३१ अपराह्न – ०७:४० अपराह्न
  • अमृत काल
    ०९:१८ अपराह्न – १०:४९ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५४ अपराह्न – १२:४० पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ योग (८)३ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०३:२४ अपराह्न – ०४:५७ अपराह्न
  • यमगंड
    ०९:११ पूर्वाह्न – १०:४४ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १२:१८ अपराह्न – ०१:५१ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:३४ पूर्वाह्न – ०९:२४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०८:३१ पूर्वाह्न – १०:०१ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०६:०४ पूर्वाह्न – ११:३४ अपराह्न
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पूर्व
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय १०:०७ पूर्वाह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
गौरी (गौरी के साथ)(समाप्ति समय १०:०७ पूर्वाह्न)→सभा (शुभ फलदायी)
राहु वास
पश्चिम
होमाहुति
शुक्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
चन्द्र
मन्त्री
गुरू
सेनापति
बुध
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
सूर्य
धान्याधिपति (शीत धान्य)
शुक्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शनि
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
बुध
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
मंगल
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
सूर्य
फलाधिपति
बुध

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

८ शुभ५ अशुभ
०६:०४ पूर्वाह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:३६ पूर्वाह्न – ०८:१७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:१७ पूर्वाह्न – १०:१५ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:१५ पूर्वाह्न – १२:२९ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१२:२९ अपराह्न – ०२:४४ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:४४ अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०४:५६ अपराह्न – ०७:०६ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:०६ अपराह्न – ०९:२० अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०९:२० अपराह्न – ११:३६ अपराह्न
शुभ पंचक
११:३६ अपराह्न – ०१:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ पंचक
०१:४१ पूर्वाह्न – ०३:२८ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
चोर पंचक (हानि भय)
०३:२८ पूर्वाह्न – ०५:०१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ पंचक
०५:०१ पूर्वाह्न – ०६:०३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०४ पूर्वाह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न
०६:३६ पूर्वाह्न – ०८:१७ पूर्वाह्न
०८:१७ पूर्वाह्न – १०:१५ पूर्वाह्न
१०:१५ पूर्वाह्न – १२:२९ अपराह्न
१२:२९ अपराह्न – ०२:४४ अपराह्न
०२:४४ अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
०४:५६ अपराह्न – ०७:०६ अपराह्न
०७:०६ अपराह्न – ०९:२० अपराह्न
०९:२० अपराह्न – ११:३६ अपराह्न
११:३६ अपराह्न – ०१:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०१:४१ पूर्वाह्न – ०३:२८ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०३:२८ पूर्वाह्न – ०५:०१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०५:०१ पूर्वाह्न – ०६:०३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२९
कलि अहर्गण
१८७३४००
लाहिरी अयनांश
२४.२५०९५३°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१८६५
संशोधित जूलियन दिन
६१८६५
राता डाई (RD)
७४०४४१
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१५ चैत्र, १९५०
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९५०
जूलियन दिनांक
२२ मार्च, २०२८ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

श्री राम नवमी

प्रमुख पर्व

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का पावन जन्मोत्सव एवं चैत्र नवरात्रि की पूर्णाहुति।

पूज्य देवता
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
धार्मिक महत्व

सत्य, धर्म, मर्यादा और न्याय के आदर्श जीवन का दिव्य संदेश।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦दिनभर व्रत एवं श्री राम नाम का अनवरत जप
  • ✦दोपहर ठीक १२ बजे भव्य जन्मोत्सव एवं महाआरती
  • ✦रामचरितमानस, सुंदरकांड एवं राम रक्षा स्तोत्र का पाठ
  • ✦पंचामृत, पंजीरी एवं चरणामृत प्रसाद वितरण

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।