शुक्ल पक्ष सप्तमी • ३६% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ३ मार्च २०२८

७, फाल्गुनशुक्ल पक्ष, सप्तमी
२०८४ गुजराती संवत
३
मार्च २०२८
शुक्रवार
∞योग:वैधृतिसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४
अगला: अष्टमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०८:१० अपराह्न
अगला: रोहिणी

योग

समाप्ति समय ०९:२२ अपराह्न
अगला: विष्कम्भ

करण

समाप्ति समय ०२:४६ अपराह्न
अगला: वणिज

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:३४ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:१८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
सप्तमी (समाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४)
अष्टमी
नक्षत्र
कृत्तिका (समाप्ति समय ०८:१० अपराह्न)
रोहिणी
योग
वैधृति (समाप्ति समय ०९:२२ अपराह्न)
विष्कम्भ
करण
गरज (समाप्ति समय ०२:४६ अपराह्न)
वणिज (समाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:३४ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:१८ अपराह्न
सूर्य राशि: कुंभदिनमान: ११ घंटे ४४ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२६ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
१०:२७ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
१२:२६ पूर्वाह्न, मार्च ४
चंद्र राशि: वृषभरात्रिमान: १२ घंटे १५ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
सप्तमीसमाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४• अगला: अष्टमी
वैधृतिसमाप्ति समय ०९:२२ अपराह्न• अगला: विष्कम्भ
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
फाल्गुन
कृत्तिकासमाप्ति समय ०८:१० अपराह्न• अगला: रोहिणी
करण
गरज(०२:४६ अपराह्न)वणिज(०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: शतभिषा (पद ४)
चंद्र राशि
वृषभ(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मिथुन (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
कुंभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
कृत्तिका (पद २)०७:४८ पूर्वाह्नकृत्तिका (पद ३)०२:०० अपराह्नकृत्तिका (पद ४)०८:१० अपराह्नरोहिणी (पद १)०२:१७ पूर्वाह्न, मार्च ४रोहिणी (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३१८.७३°चन्द्र भोगांश: ३२.६७°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
२०(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
फाल्गुन(पूर्णिमांत)
फाल्गुन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५६ पूर्वाह्न – ०५:४५ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:२१ पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न
  • १२:०३ अपराह्न – १२:५० अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:११ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१९ अपराह्न – ०६:४३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१९ अपराह्न – ०७:३२ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:०३ पूर्वाह्न – १२:४२ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०२ पूर्वाह्न – १२:५१ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • १०:५९ पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:२३ अपराह्न – ०४:५१ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०८:०३ पूर्वाह्न – ०९:३१ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:५५ पूर्वाह्न – ०९:४२ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०७:४४ पूर्वाह्न – ०९:२३ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    ०२:४४ पूर्वाह्न – ०६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०६:३४ पूर्वाह्न – ०८:१० अपराह्न
अशुभ योग (९)३ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०२:४४ पूर्वाह्न, मार्च ४)→श्मशान
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
शुक्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०६:३४ पूर्वाह्न – ०७:११ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:११ पूर्वाह्न – ०८:४२ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:४२ पूर्वाह्न – १०:२३ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
१०:२३ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:२१ अपराह्न – ०२:३५ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:३५ अपराह्न – ०४:५० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:५० अपराह्न – ०७:०२ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:०२ अपराह्न – ०९:१२ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०९:१२ अपराह्न – ११:२६ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
११:२६ अपराह्न – ०१:४२ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ पंचक
०१:४२ पूर्वाह्न – ०३:४७ पूर्वाह्न, मार्च ४
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:४७ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न, मार्च ४
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०५:३४ पूर्वाह्न – ०६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ पंचक
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—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:३४ पूर्वाह्न – ०७:११ पूर्वाह्न
०७:११ पूर्वाह्न – ०८:४२ पूर्वाह्न
०८:४२ पूर्वाह्न – १०:२३ पूर्वाह्न
१०:२३ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
१२:२१ अपराह्न – ०२:३५ अपराह्न
०२:३५ अपराह्न – ०४:५० अपराह्न
०४:५० अपराह्न – ०७:०२ अपराह्न
०७:०२ अपराह्न – ०९:१२ अपराह्न
०९:१२ अपराह्न – ११:२६ अपराह्न
११:२६ अपराह्न – ०१:४२ पूर्वाह्न, मार्च ४
०१:४२ पूर्वाह्न – ०३:४७ पूर्वाह्न, मार्च ४
०३:४७ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न, मार्च ४
०५:३४ पूर्वाह्न – ०६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२९
कलि अहर्गण
१८७३३६८
लाहिरी अयनांश
२४.२४९७३०°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१८३३
संशोधित जूलियन दिन
६१८३३
राता डाई (RD)
७४०४०९
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१२ फाल्गुन, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१९ फ़रवरी, २०२८ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।