कृष्ण पक्ष तृतीया • ९५% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २१ जुलाई २०२७

१८, आषाढ़कृष्ण पक्ष, तृतीया
२०८३ गुजराती संवत
२१
जुलाई २०२७
बुधवार
पर्व एवं व्रत सूची:संकष्टी चतुर्थी∞योग:आयुष्मान्Prabalarishta

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२
अगला: चतुर्थी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०८:३४ अपराह्न
अगला: शतभिषा

योग

समाप्ति समय ०६:३३ अपराह्न
अगला: सौभाग्य

करण

समाप्ति समय ०३:३५ अपराह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

बुधवार
वार (बुध)
ग्रह स्वामी: बुध

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:४१ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:४२ पूर्वाह्न, जुलाई २२ (अगला सूर्योदय)
तिथि
तृतीया (समाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२)
नक्षत्र
धनिष्ठा (समाप्ति समय ०८:३४ अपराह्न)
शतभिषा
योग
आयुष्मान् (समाप्ति समय ०६:३३ अपराह्न)
सौभाग्य
करण
वणिज (समाप्ति समय ०३:३५ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:४१ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०० अपराह्न
सूर्य राशि: कर्कदिनमान: १३ घंटे १८ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२० अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०८:४३ अपराह्न
चंद्रास्त
०७:४४ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: मकररात्रिमान: १० घंटे ४२ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
तृतीयासमाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२• अगला: चतुर्थी
आयुष्मान्समाप्ति समय ०६:३३ अपराह्न• अगला: सौभाग्य
वार
बुधवार
मास (अमान्त)
आषाढ़
धनिष्ठासमाप्ति समय ०८:३४ अपराह्न• अगला: शतभिषा
करण
वणिज(०३:३५ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
श्रावण

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: पुष्य (पद १)
चंद्र राशि
मकर(०७:०३ पूर्वाह्न तक)→ कुंभ (०७:०३ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
कर्क• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
पुष्यपद १
नक्षत्र पद
धनिष्ठा (पद २)०७:०३ पूर्वाह्नधनिष्ठा (पद ३)०१:४९ अपराह्नधनिष्ठा (पद ४)०८:३४ अपराह्नशतभिषा (पद १)०३:१८ पूर्वाह्न, जुलाई २२शतभिषा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ९३.८२°चन्द्र भोगांश: २९९.३३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
५(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
श्रावण(पूर्णिमांत)
आषाढ़(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)७ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१६ पूर्वाह्न – ०४:५९ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३८ पूर्वाह्न – ०५:४२ पूर्वाह्न
  • कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३४ अपराह्न – ०३:२७ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०० अपराह्न – ०७:२२ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०० अपराह्न – ०८:०४ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:३३ पूर्वाह्न – ०१:२१ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०० पूर्वाह्न – १२:४३ पूर्वाह्न, जुलाई २२
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल१० सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • १२:२१ अपराह्न – ०२:०१ अपराह्न
  • यमगंड
    ०७:२२ पूर्वाह्न – ०९:०१ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १०:४१ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ११:५४ पूर्वाह्न – १२:४८ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०४:३७ पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न, जुलाई २२
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    ०३:३५ अपराह्न – ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    ०७:०३ पूर्वाह्न – ०५:४२ पूर्वाह्न, जुलाई २२
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०७:०३ पूर्वाह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय ०४:४७ पूर्वाह्न, जुलाई २२)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)
होमाहुति
मंगल
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

११ शुभ२ अशुभ
०५:४१ पूर्वाह्न – ०७:४३ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०७:४३ पूर्वाह्न – ०९:५४ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०९:५४ पूर्वाह्न – १२:०४ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१२:०४ अपराह्न – ०२:१८ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:१८ अपराह्न – ०४:३४ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:३४ अपराह्न – ०६:३९ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:३९ अपराह्न – ०८:२६ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:२६ अपराह्न – १०:०० अपराह्न
शुभ पंचक
१०:०० अपराह्न – ११:३१ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
११:३१ अपराह्न – ०१:११ पूर्वाह्न, जुलाई २२
शुभ पंचक
०१:११ पूर्वाह्न – ०३:१० पूर्वाह्न, जुलाई २२
राज पंचक (राज्य लाभ)
०३:१० पूर्वाह्न – ०५:२३ पूर्वाह्न, जुलाई २२
शुभ पंचक
०५:२३ पूर्वाह्न – ०५:४२ पूर्वाह्न, जुलाई २२
शुभ पंचक
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उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:४१ पूर्वाह्न – ०७:४३ पूर्वाह्न
०७:४३ पूर्वाह्न – ०९:५४ पूर्वाह्न
०९:५४ पूर्वाह्न – १२:०४ अपराह्न
१२:०४ अपराह्न – ०२:१८ अपराह्न
०२:१८ अपराह्न – ०४:३४ अपराह्न
०४:३४ अपराह्न – ०६:३९ अपराह्न
०६:३९ अपराह्न – ०८:२६ अपराह्न
०८:२६ अपराह्न – १०:०० अपराह्न
१०:०० अपराह्न – ११:३१ अपराह्न
११:३१ अपराह्न – ०१:११ पूर्वाह्न, जुलाई २२
०१:११ पूर्वाह्न – ०३:१० पूर्वाह्न, जुलाई २२
०३:१० पूर्वाह्न – ०५:२३ पूर्वाह्न, जुलाई २२
०५:२३ पूर्वाह्न – ०५:४२ पूर्वाह्न, जुलाई २२
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३१४२
लाहिरी अयनांश
२४.२४१०९१°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१६०७
संशोधित जूलियन दिन
६१६०७
राता डाई (RD)
७४०१८३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
३० आषाढ़, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
८ जुलाई, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

संकष्टी चतुर्थी

प्रमुख पर्व

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा व संकट निवारण हेतु पावन व्रत, जो चंद्रोदय के पश्चात खोला जाता है।

पूज्य देवता
भगवान श्री गणेश (संकटमोचन गणपति)
धार्मिक महत्व

जीवन के समस्त संकटों का नाश, आर्थिक व मानसिक बाधाओं का निवारण, बुद्धि, विद्या और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल गणेश जी का षोडशोपचार पूजन
  • ✦संकटनाशन गणेश स्तोत्र का ११ या २१ बार पाठ
  • ✦तिल के लड्डू और मोदक का भोग तैयार करना
  • ✦चंद्रोदय समय का अवलोकन कर चंद्र अर्घ्य देना
  • ✦गणेश आरती एवं प्रसाद वितरण

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।