कृष्ण पक्ष द्वादशी • १३% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १ जुलाई २०२७

२७, ज्येष्ठकृष्ण पक्ष, द्वादशी
२०८३ गुजराती संवत
१
जुलाई २०२७
गुरुवार
∞योग:धृतिमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न
अगला: त्रयोदशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:३० अपराह्न
अगला: रोहिणी

योग

समाप्ति समय ०५:५६ पूर्वाह्न
अगला: शूल

करण

समाप्ति समय ०७:२८ पूर्वाह्न
अगला: तैतिल

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३३ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०२ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३४ पूर्वाह्न, जुलाई २ (अगला सूर्योदय)
तिथि
द्वादशी (समाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न)
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका (समाप्ति समय ०७:३० अपराह्न)
रोहिणी
योग
शूल
करण
कौलव
तैतिल (समाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३३ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०२ अपराह्न
सूर्य राशि: मिथुनदिनमान: १३ घंटे २८ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१८ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०३:१४ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०४:१८ अपराह्न
चंद्र राशि: वृषभरात्रिमान: १० घंटे ३१ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
द्वादशीसमाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न• अगला: त्रयोदशी
धृतिसमाप्ति समय ०५:५६ पूर्वाह्न• अगला: शूल
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
कृत्तिकासमाप्ति समय ०७:३० अपराह्न• अगला: रोहिणी
करण
कौलव(०७:२८ पूर्वाह्न)तैतिल(०६:१५ अपराह्न)गरज(०४:५३ पूर्वाह्न, जुलाई २)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आषाढ़

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: आर्द्रा (पद ३)
चंद्र राशि
वृषभ(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मिथुन (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मिथुन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
कृत्तिका (पद २)०८:२० पूर्वाह्नकृत्तिका (पद ३)०१:५७ अपराह्नकृत्तिका (पद ४)०७:३० अपराह्नरोहिणी (पद १)०१:०२ पूर्वाह्न, जुलाई २रोहिणी (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ७४.७४°चन्द्र भोगांश: ३१.६९°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
१७(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आषाढ़(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१० पूर्वाह्न – ०४:५२ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३१ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न
  • ११:५१ पूर्वाह्न – १२:४५ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३३ अपराह्न – ०३:२७ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०३ अपराह्न – ०७:२४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०३ अपराह्न – ०८:०६ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:१५ पूर्वाह्न – १२:४५ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५८ अपराह्न – १२:४० पूर्वाह्न, जुलाई २
शुभ योग (८)० सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल७ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)६ सक्रिय
  • ०२:०० अपराह्न – ०३:४१ अपराह्न
  • यमगंड
    ०५:३४ पूर्वाह्न – ०७:१५ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०८:५६ पूर्वाह्न – १०:३७ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:०४ पूर्वाह्न – १०:५८ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०८:१५ पूर्वाह्न – ०९:४५ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०६:१५ अपराह्न)→भोजन (भोजन करते हुए)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
केतु
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०५:३३ पूर्वाह्न – ०६:४५ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:४५ पूर्वाह्न – ०९:०१ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०९:०१ पूर्वाह्न – ११:१२ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
११:१२ पूर्वाह्न – ०१:२३ अपराह्न
शुभ पंचक
०१:२३ अपराह्न – ०३:३७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०३:३७ अपराह्न – ०५:५३ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०५:५३ अपराह्न – ०७:५८ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:५८ अपराह्न – ०९:४५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०९:४५ अपराह्न – ११:१८ अपराह्न
शुभ पंचक
११:१८ अपराह्न – १२:४९ पूर्वाह्न, जुलाई २
शुभ पंचक
१२:४९ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, जुलाई २
शुभ पंचक
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:२८ पूर्वाह्न, जुलाई २
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न, जुलाई २
शुभ पंचक
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—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३३ पूर्वाह्न – ०६:४५ पूर्वाह्न
०६:४५ पूर्वाह्न – ०९:०१ पूर्वाह्न
०९:०१ पूर्वाह्न – ११:१२ पूर्वाह्न
११:१२ पूर्वाह्न – ०१:२३ अपराह्न
०१:२३ अपराह्न – ०३:३७ अपराह्न
०३:३७ अपराह्न – ०५:५३ अपराह्न
०५:५३ अपराह्न – ०७:५८ अपराह्न
०७:५८ अपराह्न – ०९:४५ अपराह्न
०९:४५ अपराह्न – ११:१८ अपराह्न
११:१८ अपराह्न – १२:४९ पूर्वाह्न, जुलाई २
१२:४९ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, जुलाई २
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:२८ पूर्वाह्न, जुलाई २
०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न, जुलाई २
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३१२२
लाहिरी अयनांश
२४.२४०३२७°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५८७
संशोधित जूलियन दिन
६१५८७
राता डाई (RD)
७४०१६३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१० आषाढ़, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१८ जून, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।