शुक्ल पक्ष अष्टमी • ४५% प्रकाशप्रथम पाद (शुक्ल अष्टमी)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ११ जून २०२७

८, ज्येष्ठशुक्ल पक्ष, अष्टमी
२०८३ गुजराती संवत
११
जून २०२७
शुक्रवार
पर्व एवं व्रत सूची:Bhadra∞योग:वज्रसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२
अगला: नवमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०५:२७ अपराह्न
अगला: उत्तराफाल्गुनी

योग

समाप्ति समय १२:५४ अपराह्न
अगला: सिद्धि

करण

समाप्ति समय ०४:२६ अपराह्न
अगला: बव

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:२९ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:२९ पूर्वाह्न, जून १२ (अगला सूर्योदय)
तिथि
अष्टमी (समाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२)
नवमी
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी (समाप्ति समय ०५:२७ अपराह्न)
उत्तराफाल्गुनी
योग
वज्र (समाप्ति समय १२:५४ अपराह्न)
सिद्धि
करण
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०४:२६ अपराह्न)
बव (समाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२)
बालव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:२९ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५८ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे २८ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१४ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
१२:०४ अपराह्न
चंद्रास्त
१२:२७ पूर्वाह्न, जून १२
चंद्र राशि: सिंहरात्रिमान: १० घंटे ३१ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
अष्टमीसमाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२• अगला: नवमी
वज्रसमाप्ति समय १२:५४ अपराह्न• अगला: सिद्धि
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
पूर्वाफाल्गुनीसमाप्ति समय ०५:२७ अपराह्न• अगला: उत्तराफाल्गुनी
करण
विष्टि (भद्रा)(०४:२६ अपराह्न)बव(०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२)बालव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: मृगशिरा (पद १)
चंद्र राशि
सिंह(११:१७ अपराह्न तक)→ कन्या (११:१७ अपराह्न से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
पूर्वाफाल्गुनी (पद २)०५:५१ पूर्वाह्नपूर्वाफाल्गुनी (पद ३)११:३८ पूर्वाह्नपूर्वाफाल्गुनी (पद ४)०५:२७ अपराह्नउत्तराफाल्गुनी (पद १)११:१७ अपराह्नउत्तराफाल्गुनी (पद २)०५:०९ पूर्वाह्न, जून १२उत्तराफाल्गुनी (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ५५.६५°चन्द्र भोगांश: १३९.७९°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
२८(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०६ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२७ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न
  • ११:४७ पूर्वाह्न – १२:४१ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२९ अपराह्न – ०३:२३ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५९ अपराह्न – ०७:२० अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५९ अपराह्न – ०८:०२ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:४१ पूर्वाह्न – ०१:१३ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५३ अपराह्न – १२:३५ पूर्वाह्न, जून १२
शुभ योग (८)१ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल१० सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • १०:३३ पूर्वाह्न – १२:१४ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:३६ अपराह्न – ०५:१८ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०७:११ पूर्वाह्न – ०८:५२ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:१२ पूर्वाह्न – ०९:०६ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:३० पूर्वाह्न – ०२:०४ पूर्वाह्न, जून १२
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    ०५:२९ पूर्वाह्न – ०४:२६ अपराह्न
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०५:२९ पूर्वाह्न – ०५:२७ अपराह्न
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पूर्व(११:१७ अपराह्न तक)→दक्षिण
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
श्मशान(समाप्ति समय ०३:४४ पूर्वाह्न, जून १२)→गौरी (गौरी के साथ)
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
शुक्र
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०५:२९ पूर्वाह्न – ०५:५१ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०५:५१ पूर्वाह्न – ०८:०४ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:०४ पूर्वाह्न – १०:२० पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१०:२० पूर्वाह्न – १२:३१ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:३१ अपराह्न – ०२:४१ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०२:४१ अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:५६ अपराह्न – ०७:११ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०७:११ अपराह्न – ०९:१७ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०९:१७ अपराह्न – ११:०३ अपराह्न
शुभ पंचक
११:०३ अपराह्न – १२:३७ पूर्वाह्न, जून १२
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:३७ पूर्वाह्न – ०२:०८ पूर्वाह्न, जून १२
शुभ पंचक
०२:०८ पूर्वाह्न – ०३:४८ पूर्वाह्न, जून १२
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:४८ पूर्वाह्न – ०५:२९ पूर्वाह्न, जून १२
शुभ पंचक
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उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:२९ पूर्वाह्न – ०५:५१ पूर्वाह्न
०५:५१ पूर्वाह्न – ०८:०४ पूर्वाह्न
०८:०४ पूर्वाह्न – १०:२० पूर्वाह्न
१०:२० पूर्वाह्न – १२:३१ अपराह्न
१२:३१ अपराह्न – ०२:४१ अपराह्न
०२:४१ अपराह्न – ०४:५६ अपराह्न
०४:५६ अपराह्न – ०७:११ अपराह्न
०७:११ अपराह्न – ०९:१७ अपराह्न
०९:१७ अपराह्न – ११:०३ अपराह्न
११:०३ अपराह्न – १२:३७ पूर्वाह्न, जून १२
१२:३७ पूर्वाह्न – ०२:०८ पूर्वाह्न, जून १२
०२:०८ पूर्वाह्न – ०३:४८ पूर्वाह्न, जून १२
०३:४८ पूर्वाह्न – ०५:२९ पूर्वाह्न, जून १२
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३१०२
लाहिरी अयनांश
२४.२३९५६२°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५६७
संशोधित जूलियन दिन
६१५६७
राता डाई (RD)
७४०१४३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२१ ज्येष्ठ, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
२९ मई, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

भाद्रपद

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Bhadra का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Bhadra का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।