पञ्चाङ्ग के पाँच अंग
२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)
स्थानीय सौर दिवससूर्य एवं चन्द्र
सूर्य
चन्द्र
विस्तृत पंचांग
राशि एवं नक्षत्र विवरण
चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त०४:०६ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न
- प्रातः संध्या०४:२७ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न
- ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३९ अपराह्न
- विजय मुहूर्त०२:२६ अपराह्न – ०३:१९ अपराह्न
- गोधूलि मुहूर्त०६:५३ अपराह्न – ०७:१५ अपराह्न
- सायं संध्या०६:५३ अपराह्न – ०७:५७ अपराह्न
- अमृत काल०४:२४ पूर्वाह्न – ०६:१० पूर्वाह्न
- निशीथ मुहूर्त११:५१ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई ३०
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- ०९:४२ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई ३०
- ०५:३० पूर्वाह्न – ०९:४२ पूर्वाह्न
शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।
अशुभ काल
- ०८:५१ पूर्वाह्न – १०:३२ पूर्वाह्न
- यमगंड०१:५२ अपराह्न – ०३:३३ अपराह्न
- गुलिक काल०५:३१ पूर्वाह्न – ०७:११ पूर्वाह्न
- दुर्मुहूर्त०५:३१ पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न
- वर्ज्यम्०४:३५ अपराह्न – ०६:१८ अपराह्न
- बाण दोषअग्नि
- भद्रा (विष्टि)कोई नहीं
- विंचुडोकोई नहीं
- पंचकपूरा दिन
- ०९:४२ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई ३०
- कोई नहीं
- ०८:२० पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई ३०
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।
ऋतु एवं अयन
निवास, शूल एवं वास
मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)
चंद्रबलम्
ताराबलम्
पंचक रहित मुहूर्त चक्र
उदय लग्न समय
अन्य कैलेंडर एवं युग गणना
पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान
कालाष्टमी
प्रमुख पर्ववैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला कालाष्टमी का पावन पर्व।
कालाष्टमी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।
- ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
- ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।
मासिक श्री कृष्ण जन्माष्टमी
प्रमुख पर्वकृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण को समर्पित मासिक उपवास एवं पूजन।
श्रीकृष्ण भक्ति, आत्मिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति।
- ✦Midnight Janmotsav Aarti at 12:00 AM with conch and bell chimes.
- ✦Panchamrit Abhisheka with 108 Shaligram or Laddu Gopal darshan.
- ✦Rocking Bal Gopal in decorated cradles (Jhula Darshan).
पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग
तिथि
1सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।
नक्षत्र
2चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।
योग
3सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।
करण
4एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।
वार
5सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।