कृष्ण पक्ष पंचमी • ८१% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २५ मई २०२७

२०, वैशाखकृष्ण पक्ष, पंचमी
२०८३ गुजराती संवत
२५
मई २०२७
मंगलवार
∞योग:शुक्लPrabalarishta

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६
अगला: षष्ठी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०१:१२ पूर्वाह्न, मई २६
अगला: श्रवण

योग

समाप्ति समय १२:५६ पूर्वाह्न, मई २६
अगला: ब्रह्म

करण

समाप्ति समय १२:१४ अपराह्न
अगला: तैतिल

वार

मंगलवार
वार (मंगल)
ग्रह स्वामी: मंगल

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३१ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५१ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३१ पूर्वाह्न, मई २६ (अगला सूर्योदय)
तिथि
पंचमी (समाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६)
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा (समाप्ति समय ०१:१२ पूर्वाह्न, मई २६)
श्रवण
योग
शुक्ल (समाप्ति समय १२:५६ पूर्वाह्न, मई २६)
ब्रह्म
करण
कौलव (समाप्ति समय १२:१४ अपराह्न)
तैतिल (समाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३१ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५१ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे २० मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
११:०० अपराह्न
चंद्रास्त
०९:१९ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: मकररात्रिमान: १० घंटे ३९ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
पंचमीसमाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६• अगला: षष्ठी
शुक्लसमाप्ति समय १२:५६ पूर्वाह्न, मई २६• अगला: ब्रह्म
वार
मंगलवार
मास (अमान्त)
वैशाख
उत्तराषाढ़ासमाप्ति समय ०१:१२ पूर्वाह्न, मई २६• अगला: श्रवण
करण
कौलव(१२:१४ अपराह्न)तैतिल(०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६)गरज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: कृत्तिका (पद ४)
चंद्र राशि
मकर(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ कुंभ (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
उत्तराषाढ़ा (पद २)११:३८ पूर्वाह्नउत्तराषाढ़ा (पद ३)०६:२५ अपराह्नउत्तराषाढ़ा (पद ४)०१:१२ पूर्वाह्न, मई २६श्रवण (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: ३९.३५°चन्द्र भोगांश: २७०.३२°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
११(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०६ पूर्वाह्न – ०४:४९ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३८ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२५ अपराह्न – ०३:१८ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५२ अपराह्न – ०७:१३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५२ अपराह्न – ०७:५६ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०१:२८ अपराह्न – ०३:१६ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५० अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई २६
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)६ सक्रिय
  • ०३:३२ अपराह्न – ०५:१२ अपराह्न
  • यमगंड
    ०८:५२ पूर्वाह्न – १०:३२ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १२:१२ अपराह्न – ०१:५२ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:१२ पूर्वाह्न – ०९:०५ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०७:०९ पूर्वाह्न – ०८:५७ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
० (निर्जीव - अशुभ/वर्ज्य)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०१:३१ पूर्वाह्न, मई २६)→भोजन (भोजन करते हुए)
राहु वास
पश्चिम
होमाहुति
गुरु
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०५:३१ पूर्वाह्न – ०६:५८ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०६:५८ पूर्वाह्न – ०९:११ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०९:११ पूर्वाह्न – ११:२७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:२७ पूर्वाह्न – ०१:३८ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०१:३८ अपराह्न – ०३:४८ अपराह्न
शुभ पंचक
०३:४८ अपराह्न – ०६:०३ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०६:०३ अपराह्न – ०८:१८ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०८:१८ अपराह्न – १०:२४ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
१०:२४ अपराह्न – १२:११ पूर्वाह्न, मई २६
शुभ पंचक
१२:११ पूर्वाह्न – ०१:४४ पूर्वाह्न, मई २६
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०१:४४ पूर्वाह्न – ०३:१५ पूर्वाह्न, मई २६
शुभ पंचक
०३:१५ पूर्वाह्न – ०४:५६ पूर्वाह्न, मई २६
शुभ पंचक
०४:५६ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न, मई २६
राज पंचक (राज्य लाभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३१ पूर्वाह्न – ०६:५८ पूर्वाह्न
०६:५८ पूर्वाह्न – ०९:११ पूर्वाह्न
०९:११ पूर्वाह्न – ११:२७ पूर्वाह्न
११:२७ पूर्वाह्न – ०१:३८ अपराह्न
०१:३८ अपराह्न – ०३:४८ अपराह्न
०३:४८ अपराह्न – ०६:०३ अपराह्न
०६:०३ अपराह्न – ०८:१८ अपराह्न
०८:१८ अपराह्न – १०:२४ अपराह्न
१०:२४ अपराह्न – १२:११ पूर्वाह्न, मई २६
१२:११ पूर्वाह्न – ०१:४४ पूर्वाह्न, मई २६
०१:४४ पूर्वाह्न – ०३:१५ पूर्वाह्न, मई २६
०३:१५ पूर्वाह्न – ०४:५६ पूर्वाह्न, मई २६
०४:५६ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न, मई २६
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३०८५
लाहिरी अयनांश
२४.२३८९१२°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५५०
संशोधित जूलियन दिन
६१५५०
राता डाई (RD)
७४०१२६
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
४ ज्येष्ठ, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१२ मई, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।