कृष्ण पक्ष तृतीया • ९४% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २३ मई २०२७

१८, वैशाखकृष्ण पक्ष, तृतीया
२०८३ गुजराती संवत
२३
मई २०२७
रविवार
∞योग:साध्य✦सर्वार्थ सिद्धिअमृत योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न
अगला: चतुर्थी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:१७ अपराह्न
अगला: पूर्वाषाढ़ा

योग

समाप्ति समय ११:०१ अपराह्न
अगला: शुभ

करण

समाप्ति समय ०७:४१ पूर्वाह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

रविवार
वार (सूर्य)
ग्रह स्वामी: सूर्य

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३१ पूर्वाह्न, मई २४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
तृतीया (समाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न)
चतुर्थी
नक्षत्र
मूल (समाप्ति समय ०७:१७ अपराह्न)
पूर्वाषाढ़ा
योग
साध्य (समाप्ति समय ११:०१ अपराह्न)
शुभ
करण
वणिज (०७:४१ पूर्वाह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५० अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे १८ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०९:३६ अपराह्न
चंद्रास्त
०७:३० पूर्वाह्न
चंद्र राशि: धनुरात्रिमान: १० घंटे ४१ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
तृतीयासमाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न• अगला: चतुर्थी
साध्यसमाप्ति समय ११:०१ अपराह्न• अगला: शुभ
वार
रविवार
मास (अमान्त)
वैशाख
मूलसमाप्ति समय ०७:१७ अपराह्न• अगला: पूर्वाषाढ़ा
करण
वणिज(०७:४१ पूर्वाह्न)विष्टि (भद्रा)(०८:४२ अपराह्न)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: कृत्तिका (पद ४)
चंद्र राशि
धनु(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मकर (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
मूल (पद २)०६:०० पूर्वाह्नमूल (पद ३)१२:३७ अपराह्नमूल (पद ४)०७:१७ अपराह्नपूर्वाषाढ़ा (पद १)०१:५७ पूर्वाह्न, मई २४पूर्वाषाढ़ा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३७.४३°चन्द्र भोगांश: २४६.४३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
९(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०७ पूर्वाह्न – ०४:४९ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३८ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२५ अपराह्न – ०३:१८ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५१ अपराह्न – ०७:१२ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५१ अपराह्न – ०७:५५ अपराह्न
  • अमृत काल
    १२:१३ अपराह्न – ०१:५९ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५० अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई २४
शुभ योग (८)३ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०५:११ अपराह्न – ०६:५१ अपराह्न
  • यमगंड
    १२:११ अपराह्न – ०१:५१ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०३:३१ अपराह्न – ०५:११ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०५:०४ अपराह्न – ०५:५८ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०५:३१ अपराह्न – ०७:१७ अपराह्न
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ०७:४१ पूर्वाह्न – ०८:४२ अपराह्न
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पूर्व(सम्पूर्ण रात्रि तक)→दक्षिण
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय ०८:४२ अपराह्न)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
उत्तर
होमाहुति
मंगल
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:०६ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०७:०६ पूर्वाह्न – ०९:२० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०९:२० पूर्वाह्न – ११:३५ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
११:३५ पूर्वाह्न – ०१:४७ अपराह्न
शुभ पंचक
०१:४७ अपराह्न – ०३:५७ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०३:५७ अपराह्न – ०६:११ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:११ अपराह्न – ०८:२७ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:२७ अपराह्न – १०:३२ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:३२ अपराह्न – १२:१९ पूर्वाह्न, मई २४
शुभ पंचक
१२:१९ पूर्वाह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, मई २४
शुभ पंचक
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:२३ पूर्वाह्न, मई २४
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०३:२३ पूर्वाह्न – ०५:०४ पूर्वाह्न, मई २४
चोर पंचक (हानि भय)
०५:०४ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न, मई २४
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:०६ पूर्वाह्न
०७:०६ पूर्वाह्न – ०९:२० पूर्वाह्न
०९:२० पूर्वाह्न – ११:३५ पूर्वाह्न
११:३५ पूर्वाह्न – ०१:४७ अपराह्न
०१:४७ अपराह्न – ०३:५७ अपराह्न
०३:५७ अपराह्न – ०६:११ अपराह्न
०६:११ अपराह्न – ०८:२७ अपराह्न
०८:२७ अपराह्न – १०:३२ अपराह्न
१०:३२ अपराह्न – १२:१९ पूर्वाह्न, मई २४
१२:१९ पूर्वाह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, मई २४
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:२३ पूर्वाह्न, मई २४
०३:२३ पूर्वाह्न – ०५:०४ पूर्वाह्न, मई २४
०५:०४ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न, मई २४
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३०८३
लाहिरी अयनांश
२४.२३८८३६°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५४८
संशोधित जूलियन दिन
६१५४८
राता डाई (RD)
७४०१२४
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२ ज्येष्ठ, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१० मई, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।