पञ्चाङ्ग के पाँच अंग
२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)
स्थानीय सौर दिवससूर्य एवं चन्द्र
सूर्य
चन्द्र
विस्तृत पंचांग
राशि एवं नक्षत्र विवरण
चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त०४:३३ पूर्वाह्न – ०५:१९ पूर्वाह्न
- प्रातः संध्या०४:५६ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न
- ११:५३ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
- विजय मुहूर्त०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
- गोधूलि मुहूर्त०६:३० अपराह्न – ०६:५४ अपराह्न
- सायं संध्या०६:३० अपराह्न – ०७:४० अपराह्न
- अमृत काल११:२२ पूर्वाह्न – ०१:०५ अपराह्न
- निशीथ मुहूर्त११:५४ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- पूरा दिन
- कोई नहीं
शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।
अशुभ काल
- ०४:५७ अपराह्न – ०६:३० अपराह्न
- यमगंड१२:१८ अपराह्न – ०१:५१ अपराह्न
- गुलिक काल०३:२४ अपराह्न – ०४:५७ अपराह्न
- दुर्मुहूर्त०४:५१ अपराह्न – ०५:४१ अपराह्न
- वर्ज्यम्११:१६ अपराह्न – १२:५७ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
- बाण दोषरोग
- भद्रा (विष्टि)०५:२३ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
- विंचुडोकोई नहीं
- पंचकपूरा दिन
- कोई नहीं
- ०४:३२ अपराह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
- कोई नहीं
परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।
ऋतु एवं अयन
निवास, शूल एवं वास
मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)
चंद्रबलम्
ताराबलम्
पंचक रहित मुहूर्त चक्र
उदय लग्न समय
अन्य कैलेंडर एवं युग गणना
पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान
महाशिवरात्रि
प्रमुख पर्वदेवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के दिव्य विवाह एवं ज्योतिर्लिंग प्राकट्य का महापर्व।
काम, क्रोध, मोह का शमन, चित्त शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।
- ✦Nishita Kaal Maha Lingodbhava Puja at midnight.
- ✦Rudra Abhisheka with 11 recitations of Sri Rudram.
- ✦Offering 108 Bilva leaves with Chandan.
पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग
तिथि
1सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।
नक्षत्र
2चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।
योग
3सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।
करण
4एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।
वार
5सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।