कृष्ण पक्ष त्रयोदशी • ९% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ४ अप्रैल २०२७

२८, फाल्गुनकृष्ण पक्ष, त्रयोदशी
२०८३ गुजराती संवत
४
अप्रैल २०२७
रविवार
पर्व एवं व्रत सूची:महाशिवरात्रि∞योग:शुभसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
अगला: चतुर्दशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न
अगला: पूर्वाभाद्रपद

योग

समाप्ति समय १०:१३ पूर्वाह्न
अगला: शुक्ल

करण

समाप्ति समय ०५:०० अपराह्न
अगला: वणिज

वार

रविवार
वार (सूर्य)
ग्रह स्वामी: सूर्य

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०५ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:३० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५ (अगला सूर्योदय)
तिथि
त्रयोदशी (समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५)
नक्षत्र
शतभिषा (समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न)
पूर्वाभाद्रपद
योग
शुभ (१०:१३ पूर्वाह्न)
शुक्ल
करण
गरज (समाप्ति समय ०५:०० अपराह्न)
वणिज (समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०५ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:३० अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे २४ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१७ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०४:४५ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०४:१४ अपराह्न
चंद्र राशि: कुंभरात्रिमान: ११ घंटे ३४ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
त्रयोदशीसमाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५• अगला: चतुर्दशी
शुभसमाप्ति समय १०:१३ पूर्वाह्न• अगला: शुक्ल
वार
रविवार
मास (अमान्त)
फाल्गुन
शतभिषासमाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न• अगला: पूर्वाभाद्रपद
करण
गरज(०५:०० अपराह्न)वणिज(०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
चैत्र

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद १)
चंद्र राशि
कुंभ(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मीन (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद १
नक्षत्र पद
शतभिषा (पद ३)१०:०८ पूर्वाह्नशतभिषा (पद ४)०४:३२ अपराह्नपूर्वाभाद्रपद (पद १)१०:५४ अपराह्नपूर्वाभाद्रपद (पद २)०५:१४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५पूर्वाभाद्रपद (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ३४९.७९°चन्द्र भोगांश: ३१४.५७°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
२१(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
चैत्र(पूर्णिमांत)
फाल्गुन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३३ पूर्वाह्न – ०५:१९ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५६ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न
  • ११:५३ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३० अपराह्न – ०६:५४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३० अपराह्न – ०७:४० अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:२२ पूर्वाह्न – ०१:०५ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५४ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०४:५७ अपराह्न – ०६:३० अपराह्न
  • यमगंड
    १२:१८ अपराह्न – ०१:५१ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०३:२४ अपराह्न – ०४:५७ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०४:५१ अपराह्न – ०५:४१ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ११:१६ अपराह्न – १२:५७ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    ०५:२३ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    पूरा दिन
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: अशुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, अप्रैल ५)→श्मशान
राहु वास
उत्तर
होमाहुति
केतु
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
अशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०६:०५ पूर्वाह्न – ०६:४० पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:४० पूर्वाह्न – ०८:२० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:२० पूर्वाह्न – १०:१९ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१०:१९ पूर्वाह्न – १२:३२ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१२:३२ अपराह्न – ०२:४८ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:४८ अपराह्न – ०४:५९ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:५९ अपराह्न – ०७:०९ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०७:०९ अपराह्न – ०९:२३ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:२३ अपराह्न – ११:३९ अपराह्न
शुभ पंचक
११:३९ अपराह्न – ०१:४४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:४४ पूर्वाह्न – ०३:३१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०३:३१ पूर्वाह्न – ०५:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ पंचक
०५:०५ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०५ पूर्वाह्न – ०६:४० पूर्वाह्न
०६:४० पूर्वाह्न – ०८:२० पूर्वाह्न
०८:२० पूर्वाह्न – १०:१९ पूर्वाह्न
१०:१९ पूर्वाह्न – १२:३२ अपराह्न
१२:३२ अपराह्न – ०२:४८ अपराह्न
०२:४८ अपराह्न – ०४:५९ अपराह्न
०४:५९ अपराह्न – ०७:०९ अपराह्न
०७:०९ अपराह्न – ०९:२३ अपराह्न
०९:२३ अपराह्न – ११:३९ अपराह्न
११:३९ अपराह्न – ०१:४४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०१:४४ पूर्वाह्न – ०३:३१ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०३:३१ पूर्वाह्न – ०५:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
०५:०५ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, अप्रैल ५
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३०३४
लाहिरी अयनांश
२४.२३६९६३°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१४९९
संशोधित जूलियन दिन
६१४९९
राता डाई (RD)
७४००७५
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१४ चैत्र, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
२२ मार्च, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

महाशिवरात्रि

प्रमुख पर्व

देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के दिव्य विवाह एवं ज्योतिर्लिंग प्राकट्य का महापर्व।

पूज्य देवता
भगवान शिव
धार्मिक महत्व

काम, क्रोध, मोह का शमन, चित्त शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦Nishita Kaal Maha Lingodbhava Puja at midnight.
  • ✦Rudra Abhisheka with 11 recitations of Sri Rudram.
  • ✦Offering 108 Bilva leaves with Chandan.

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।