कृष्ण पक्ष नवमी • ४२% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १ मार्च २०२७

२४, माघकृष्ण पक्ष, नवमी
२०८३ गुजराती संवत
१
मार्च २०२७
सोमवार
पर्व एवं व्रत सूची:Ganda Moolaविंचुडो∞योग:वज्रसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २
अगला: दशमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०४:२६ अपराह्न
अगला: मूल

योग

समाप्ति समय ११:१० अपराह्न
अगला: सिद्धि

करण

समाप्ति समय १२:५४ अपराह्न
अगला: गरज

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:३६ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:१७ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:३६ पूर्वाह्न, मार्च २ (अगला सूर्योदय)
तिथि
नवमी (समाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २)
दशमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा (समाप्ति समय ०४:२६ अपराह्न)
मूल
योग
वज्र (समाप्ति समय ११:१० अपराह्न)
सिद्धि
करण
तैतिल (समाप्ति समय १२:५४ अपराह्न)
गरज (समाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २)
वणिज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:३६ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:१७ अपराह्न
सूर्य राशि: कुंभदिनमान: ११ घंटे ४० मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२७ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०२:२३ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
१२:१२ अपराह्न
चंद्र राशि: वृश्चिकरात्रिमान: १२ घंटे १८ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
नवमीसमाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २• अगला: दशमी
वज्रसमाप्ति समय ११:१० अपराह्न• अगला: सिद्धि
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
माघ
ज्येष्ठासमाप्ति समय ०४:२६ अपराह्न• अगला: मूल
करण
तैतिल(१२:५४ अपराह्न)गरज(०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २)वणिज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: शतभिषा (पद ३)
चंद्र राशि
वृश्चिक(०४:२६ अपराह्न तक)→ धनु (०४:२६ अपराह्न से)
सूर्य राशि
कुंभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
ज्येष्ठा (पद ३)०९:४४ पूर्वाह्नज्येष्ठा (पद ४)०४:२६ अपराह्नमूल (पद १)११:१० अपराह्नमूल (पद २)०५:५५ पूर्वाह्न, मार्च २मूल (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ३१५.९८°चन्द्र भोगांश: २३५.११°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
१७(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
फाल्गुन(पूर्णिमांत)
माघ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५८ पूर्वाह्न – ०५:४८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:२३ पूर्वाह्न – ०६:३७ पूर्वाह्न
  • १२:०४ अपराह्न – १२:५१ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:११ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१७ अपराह्न – ०६:४२ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१७ अपराह्न – ०७:३१ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:०६ पूर्वाह्न – १२:५३ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०२ पूर्वाह्न – १२:५१ पूर्वाह्न, मार्च २
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०८:०४ पूर्वाह्न – ०९:३२ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    ११:०० पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:५५ अपराह्न – ०३:२२ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:५१ अपराह्न – ०१:३७ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०८:०० अपराह्न – ०९:४६ अपराह्न, फ़रवरी २८
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    ०६:३६ पूर्वाह्न – ०४:२६ अपराह्न
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०४:२६ अपराह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न, मार्च २
अशुभ योग (९)० सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(०४:२६ अपराह्न तक)→पूर्व
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०२:०७ पूर्वाह्न, मार्च २)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
राहु
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०६:३६ पूर्वाह्न – ०७:२२ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०७:२२ पूर्वाह्न – ०८:५३ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०८:५३ पूर्वाह्न – १०:३३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:३३ पूर्वाह्न – १२:३२ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:३२ अपराह्न – ०२:४५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०२:४५ अपराह्न – ०५:०१ अपराह्न
शुभ पंचक
०५:०१ अपराह्न – ०७:१२ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:१२ अपराह्न – ०९:२२ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०९:२२ अपराह्न – ११:३७ अपराह्न
शुभ पंचक
११:३७ अपराह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, मार्च २
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:५८ पूर्वाह्न, मार्च २
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०३:५८ पूर्वाह्न – ०५:४४ पूर्वाह्न, मार्च २
शुभ पंचक
०५:४४ पूर्वाह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न, मार्च २
राज पंचक (राज्य लाभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:३६ पूर्वाह्न – ०७:२२ पूर्वाह्न
०७:२२ पूर्वाह्न – ०८:५३ पूर्वाह्न
०८:५३ पूर्वाह्न – १०:३३ पूर्वाह्न
१०:३३ पूर्वाह्न – १२:३२ अपराह्न
१२:३२ अपराह्न – ०२:४५ अपराह्न
०२:४५ अपराह्न – ०५:०१ अपराह्न
०५:०१ अपराह्न – ०७:१२ अपराह्न
०७:१२ अपराह्न – ०९:२२ अपराह्न
०९:२२ अपराह्न – ११:३७ अपराह्न
११:३७ अपराह्न – ०१:५२ पूर्वाह्न, मार्च २
०१:५२ पूर्वाह्न – ०३:५८ पूर्वाह्न, मार्च २
०३:५८ पूर्वाह्न – ०५:४४ पूर्वाह्न, मार्च २
०५:४४ पूर्वाह्न – ०६:३६ पूर्वाह्न, मार्च २
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३०००
लाहिरी अयनांश
२४.२३५६६३°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१४६५
संशोधित जूलियन दिन
६१४६५
राता डाई (RD)
७४००४१
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१० फाल्गुन, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
१६ फ़रवरी, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

२ दैनिक व्रत एवं पर्व

Ganda Moola

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ganda Moola का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ganda Moola का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

विंचुडो

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला विंचुडो का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

विंचुडो का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।