कृष्ण पक्ष द्वितीया • ९७% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २६ नवंबर २०२६

१७, कार्तिककृष्ण पक्ष, द्वितीया
२०८३ गुजराती संवत
२६
नवंबर २०२६
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:चातुर्मास अवधि∞योग:सिद्धमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न
अगला: तृतीया

नक्षत्र

समाप्ति समय ०५:४६ अपराह्न
अगला: आर्द्रा

योग

समाप्ति समय ०७:४९ पूर्वाह्न
अगला: साध्य

करण

समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न
अगला: वणिज

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:३४ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००५:२८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:३५ पूर्वाह्न, नवम्बर २७ (अगला सूर्योदय)
तिथि
द्वितीया (समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न)
तृतीया
नक्षत्र
मृगशिरा (समाप्ति समय ०५:४६ अपराह्न)
आर्द्रा
योग
सिद्ध
साध्य
करण
गरज (समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न)
वणिज (समाप्ति समय ११:३० अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:३४ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०५:२८ अपराह्न
सूर्य राशि: वृश्चिकदिनमान: १० घंटे ५३ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:०१ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०७:११ अपराह्न
चंद्रास्त
०८:२० पूर्वाह्न
चंद्र राशि: वृषभरात्रिमान: १३ घंटे ७ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
द्वितीयासमाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न• अगला: तृतीया
सिद्धसमाप्ति समय ०७:४९ पूर्वाह्न• अगला: साध्य
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
कार्तिक
मृगशिरासमाप्ति समय ०५:४६ अपराह्न• अगला: आर्द्रा
करण
गरज(०१:१५ अपराह्न)वणिज(११:३० अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
मार्गशीर्ष

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: अनुराधा (पद २)
चंद्र राशि
वृषभ(०७:१० पूर्वाह्न तक)→ मिथुन (०७:१० पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
वृश्चिक• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
मृगशिरा (पद २)०७:१० पूर्वाह्नमृगशिरा (पद ३)१२:२८ अपराह्नमृगशिरा (पद ४)०५:४६ अपराह्नआर्द्रा (पद १)११:०५ अपराह्नआर्द्रा (पद २)०४:२५ पूर्वाह्न, नवम्बर २७आर्द्रा (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: २१९.५४°चन्द्र भोगांश: ५९.६२°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
११(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
मार्गशीर्ष(पूर्णिमांत)
कार्तिक(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५० पूर्वाह्न – ०५:४३ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:१६ पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न
  • ११:४० पूर्वाह्न – १२:२४ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०१:५१ अपराह्न – ०२:३४ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०५:२९ अपराह्न – ०५:५५ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०५:२९ अपराह्न – ०६:४७ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०३:३९ अपराह्न – ०५:०४ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:३६ अपराह्न – १२:२८ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
शुभ योग (८)० सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०१:२३ अपराह्न – ०२:४५ अपराह्न
  • यमगंड
    ०६:३५ पूर्वाह्न – ०७:५७ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०९:१८ पूर्वाह्न – १०:४० पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:१३ पूर्वाह्न – १०:५६ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०१:१५ पूर्वाह्न – ०२:४० पूर्वाह्न, नवम्बर २७
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ११:३० अपराह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

शरद् ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
शरद् ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
शरद् ऋतु
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०७:१० पूर्वाह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०१:१५ अपराह्न)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
मंगल
कुम्भ चक्र
पश्चिम
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०६:३४ पूर्वाह्न – ०८:१० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:१० पूर्वाह्न – १०:१५ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:१५ पूर्वाह्न – १२:०२ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:०२ अपराह्न – ०१:३५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०१:३५ अपराह्न – ०३:०६ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०३:०६ अपराह्न – ०४:४७ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:४७ अपराह्न – ०६:४५ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०६:४५ अपराह्न – ०८:५९ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:५९ अपराह्न – ११:१४ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
११:१४ अपराह्न – ०१:२६ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०१:२६ पूर्वाह्न – ०३:३६ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
शुभ पंचक
०३:३६ पूर्वाह्न – ०५:५० पूर्वाह्न, नवम्बर २७
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०५:५० पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:३४ पूर्वाह्न – ०८:१० पूर्वाह्न
०८:१० पूर्वाह्न – १०:१५ पूर्वाह्न
१०:१५ पूर्वाह्न – १२:०२ अपराह्न
१२:०२ अपराह्न – ०१:३५ अपराह्न
०१:३५ अपराह्न – ०३:०६ अपराह्न
०३:०६ अपराह्न – ०४:४७ अपराह्न
०४:४७ अपराह्न – ०६:४५ अपराह्न
०६:४५ अपराह्न – ०८:५९ अपराह्न
०८:५९ अपराह्न – ११:१४ अपराह्न
११:१४ अपराह्न – ०१:२६ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
०१:२६ पूर्वाह्न – ०३:३६ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
०३:३६ पूर्वाह्न – ०५:५० पूर्वाह्न, नवम्बर २७
०५:५० पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न, नवम्बर २७
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२९०५
लाहिरी अयनांश
२४.२३२०३१°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१३७०
संशोधित जूलियन दिन
६१३७०
राता डाई (RD)
७३९९४६
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
५ मार्गशीर्ष, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
१३ नवंबर, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

चातुर्मास अवधि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चातुर्मास अवधि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

चातुर्मास अवधि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।