कृष्ण पक्ष द्वितीया • ९८% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ३१ जुलाई २०२६

१७, आषाढ़कृष्ण पक्ष, द्वितीया
२०८२ गुजराती संवत
३१
जुलाई २०२६
शुक्रवार
∞योग:सौभाग्यसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय १०:३२ अपराह्न
अगला: तृतीया

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:२६ अपराह्न
अगला: शतभिषा

योग

समाप्ति समय ११:५३ अपराह्न
अगला: शोभन

करण

समाप्ति समय १०:०४ पूर्वाह्न
अगला: गरज

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:४६ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५५ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:४६ पूर्वाह्न, अगस्त १ (अगला सूर्योदय)
तिथि
द्वितीया (समाप्ति समय १०:३२ अपराह्न)
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा (समाप्ति समय ०७:२६ अपराह्न)
शतभिषा
योग
सौभाग्य (समाप्ति समय ११:५३ अपराह्न)
शोभन
करण
तैतिल (१०:०४ पूर्वाह्न)
गरज (समाप्ति समय १०:३२ अपराह्न)
वणिज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:४६ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५५ अपराह्न
सूर्य राशि: कर्कदिनमान: १३ घंटे ९ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२० अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०८:०९ अपराह्न
चंद्रास्त
०७:०३ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: मकररात्रिमान: १० घंटे ५० मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
द्वितीयासमाप्ति समय १०:३२ अपराह्न• अगला: तृतीया
सौभाग्यसमाप्ति समय ११:५३ अपराह्न• अगला: शोभन
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
आषाढ़
धनिष्ठासमाप्ति समय ०७:२६ अपराह्न• अगला: शतभिषा
करण
तैतिल(१०:०४ पूर्वाह्न)गरज(१०:३२ अपराह्न)वणिज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
श्रावण

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: पुष्य (पद ४)
चंद्र राशि
मकर(०६:३७ पूर्वाह्न तक)→ कुंभ (०६:३७ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
कर्क• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
पुष्यपद ४
नक्षत्र पद
धनिष्ठा (पद २)०६:३७ पूर्वाह्नधनिष्ठा (पद ३)०१:०२ अपराह्नधनिष्ठा (पद ४)०७:२६ अपराह्नशतभिषा (पद १)०१:४८ पूर्वाह्न, अगस्त १शतभिषा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: १०३.६२°चन्द्र भोगांश: २९९.५५°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
१६(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
श्रावण(पूर्णिमांत)
आषाढ़(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१९ पूर्वाह्न – ०५:०३ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:४१ पूर्वाह्न – ०५:४६ पूर्वाह्न
  • ११:५५ पूर्वाह्न – १२:४७ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३३ अपराह्न – ०३:२५ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५६ अपराह्न – ०७:१७ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५६ अपराह्न – ०८:०१ अपराह्न
  • अमृत काल
    १०:५२ पूर्वाह्न – १२:३४ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५९ अपराह्न – १२:४३ पूर्वाह्न, अगस्त १
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • १०:४२ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:३८ अपराह्न – ०५:१७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०७:२५ पूर्वाह्न – ०९:०४ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:२४ पूर्वाह्न – ०९:१७ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०३:०२ पूर्वाह्न – ०४:४३ पूर्वाह्न, अगस्त १
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    ०६:३७ पूर्वाह्न – ०५:४६ पूर्वाह्न, अगस्त १
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०६:३७ पूर्वाह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय १०:३२ अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय १०:३२ अपराह्न)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
मंगल
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०५:४६ पूर्वाह्न – ०७:०३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:०३ पूर्वाह्न – ०९:१४ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०९:१४ पूर्वाह्न – ११:२५ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:२५ पूर्वाह्न – ०१:३९ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०१:३९ अपराह्न – ०३:५४ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:५४ अपराह्न – ०६:०० अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०६:०० अपराह्न – ०७:४७ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०७:४७ अपराह्न – ०९:२० अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०९:२० अपराह्न – १०:५१ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:५१ अपराह्न – १२:३२ पूर्वाह्न, अगस्त १
राज पंचक (राज्य लाभ)
१२:३२ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, अगस्त १
चोर पंचक (हानि भय)
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:४३ पूर्वाह्न, अगस्त १
शुभ पंचक
०४:४३ पूर्वाह्न – ०५:४६ पूर्वाह्न, अगस्त १
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:४६ पूर्वाह्न – ०७:०३ पूर्वाह्न
०७:०३ पूर्वाह्न – ०९:१४ पूर्वाह्न
०९:१४ पूर्वाह्न – ११:२५ पूर्वाह्न
११:२५ पूर्वाह्न – ०१:३९ अपराह्न
०१:३९ अपराह्न – ०३:५४ अपराह्न
०३:५४ अपराह्न – ०६:०० अपराह्न
०६:०० अपराह्न – ०७:४७ अपराह्न
०७:४७ अपराह्न – ०९:२० अपराह्न
०९:२० अपराह्न – १०:५१ अपराह्न
१०:५१ अपराह्न – १२:३२ पूर्वाह्न, अगस्त १
१२:३२ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, अगस्त १
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:४३ पूर्वाह्न, अगस्त १
०४:४३ पूर्वाह्न – ०५:४६ पूर्वाह्न, अगस्त १
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७८७
लाहिरी अयनांश
२४.२२७५२१°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१२५२
संशोधित जूलियन दिन
६१२५२
राता डाई (RD)
७३९८२८
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
९ श्रावण, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
१८ जुलाई, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।