शुक्ल पक्ष एकादशी • ७९% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २५ जून २०२६

११, ज्येष्ठशुक्ल पक्ष, एकादशी
२०८२ गुजराती संवत
२५
जून २०२६
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:Jyeshtha Ekadashi∞योग:शिव✦रवि योगअमृत योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न
अगला: द्वादशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०४:२९ अपराह्न
अगला: विशाखा

योग

समाप्ति समय १०:५३ पूर्वाह्न
अगला: सिद्ध

करण

समाप्ति समय ०७:०८ पूर्वाह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०२ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३२ पूर्वाह्न, जून २६ (अगला सूर्योदय)
तिथि
एकादशी (समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न)
द्वादशी
नक्षत्र
स्वाति (समाप्ति समय ०४:२९ अपराह्न)
विशाखा
योग
शिव (समाप्ति समय १०:५३ पूर्वाह्न)
सिद्ध
करण
वणिज
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०२ अपराह्न
सूर्य राशि: मिथुनदिनमान: १३ घंटे २९ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१७ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०३:१४ अपराह्न
चंद्रास्त
०२:१९ पूर्वाह्न, जून २६
चंद्र राशि: तुलारात्रिमान: १० घंटे ३० मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
एकादशीसमाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न• अगला: द्वादशी
शिवसमाप्ति समय १०:५३ पूर्वाह्न• अगला: सिद्ध
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
स्वातिसमाप्ति समय ०४:२९ अपराह्न• अगला: विशाखा
करण
वणिज(०७:०८ पूर्वाह्न)विष्टि (भद्रा)(०८:०९ अपराह्न)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: आर्द्रा (पद १)
चंद्र राशि
तुला(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ वृश्चिक (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मिथुन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
स्वाति (पद ३)०९:४९ पूर्वाह्नस्वाति (पद ४)०४:२९ अपराह्नविशाखा (पद १)११:०९ अपराह्नविशाखा (पद २)जारीविशाखा (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ६९.२६°चन्द्र भोगांश: १९४.५१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
११(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०८ पूर्वाह्न – ०४:५० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२९ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न
  • ११:५० पूर्वाह्न – १२:४४ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३२ अपराह्न – ०३:२६ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०२ अपराह्न – ०७:२३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०२ अपराह्न – ०८:०५ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०४:५९ पूर्वाह्न – ०६:४५ पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५६ अपराह्न – १२:३८ पूर्वाह्न, जून २६
शुभ योग (८)३ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०१:५९ अपराह्न – ०३:४० अपराह्न
  • यमगंड
    ०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:१४ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०८:५५ पूर्वाह्न – १०:३६ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:०२ पूर्वाह्न – १०:५६ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १०:४३ अपराह्न – १२:३० पूर्वाह्न, जून २६
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ०७:०८ पूर्वाह्न – ०८:०९ अपराह्न
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
० (निर्जीव - अशुभ/वर्ज्य)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय ०८:०९ अपराह्न)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
शनि
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:०९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:०९ पूर्वाह्न – ०९:२४ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०९:२४ पूर्वाह्न – ११:३६ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:३६ पूर्वाह्न – ०१:४६ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:४६ अपराह्न – ०४:०० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:०० अपराह्न – ०६:१६ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:१६ अपराह्न – ०८:२१ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:२१ अपराह्न – १०:०८ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:०८ अपराह्न – ११:४१ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:४१ अपराह्न – ०१:१२ पूर्वाह्न, जून २६
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:१२ पूर्वाह्न – ०२:५३ पूर्वाह्न, जून २६
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०२:५३ पूर्वाह्न – ०४:५१ पूर्वाह्न, जून २६
शुभ पंचक
०४:५१ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:०९ पूर्वाह्न
०७:०९ पूर्वाह्न – ०९:२४ पूर्वाह्न
०९:२४ पूर्वाह्न – ११:३६ पूर्वाह्न
११:३६ पूर्वाह्न – ०१:४६ अपराह्न
०१:४६ अपराह्न – ०४:०० अपराह्न
०४:०० अपराह्न – ०६:१६ अपराह्न
०६:१६ अपराह्न – ०८:२१ अपराह्न
०८:२१ अपराह्न – १०:०८ अपराह्न
१०:०८ अपराह्न – ११:४१ अपराह्न
११:४१ अपराह्न – ०१:१२ पूर्वाह्न, जून २६
०१:१२ पूर्वाह्न – ०२:५३ पूर्वाह्न, जून २६
०२:५३ पूर्वाह्न – ०४:५१ पूर्वाह्न, जून २६
०४:५१ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७५१
लाहिरी अयनांश
२४.२२६१४५°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१२१६
संशोधित जूलियन दिन
६१२१६
राता डाई (RD)
७३९७९२
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
४ आषाढ़, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
१२ जून, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

ज्येष्ठ एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित Jyeshtha Ekadashi का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

Jyeshtha Ekadashi का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।