कृष्ण पक्ष षष्ठी • ७०% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ८ अप्रैल २०२६

२१, चैत्रकृष्ण पक्ष, षष्ठी
२०८२ गुजराती संवत
८
अप्रैल २०२६
बुधवार
∞योग:वरीयान्✦रवि योगमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न
अगला: सप्तमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०८:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
अगला: पूर्वाषाढ़ा

योग

समाप्ति समय ०५:०९ अपराह्न
अगला: परिघ

करण

समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

बुधवार
वार (बुध)
ग्रह स्वामी: बुध

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०१ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:३१ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०० पूर्वाह्न, अप्रैल ९ (अगला सूर्योदय)
तिथि
षष्ठी (समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न)
सप्तमी
नक्षत्र
मूल
योग
वरीयान् (समाप्ति समय ०५:०९ अपराह्न)
परिघ
करण
वणिज (समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०१ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:३१ अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे ३० मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१६ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
१२:१२ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०९:५९ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: धनुरात्रिमान: ११ घंटे २८ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
षष्ठीसमाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न• अगला: सप्तमी
वरीयान्समाप्ति समय ०५:०९ अपराह्न• अगला: परिघ
वार
बुधवार
मास (अमान्त)
चैत्र
मूलसमाप्ति समय ०८:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९• अगला: पूर्वाषाढ़ा
करण
वणिज(०७:०२ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(०८:१२ पूर्वाह्न, अप्रैल ९)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
वैशाख

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद ३)
चंद्र राशि
धनु(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मकर (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद ३
नक्षत्र पद
मूल (पद १)१२:३८ अपराह्नमूल (पद २)०७:२२ अपराह्नमूल (पद ३)०२:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ९मूल (पद ४)जारी
सूर्य भोगांश: ३५३.९७°चन्द्र भोगांश: २४०.०६°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
२५(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
वैशाख(पूर्णिमांत)
चैत्र(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)७ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३० पूर्वाह्न – ०५:१६ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५३ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न
  • कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३२ अपराह्न – ०६:५५ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३२ अपराह्न – ०७:४१ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०१:३७ पूर्वाह्न – ०३:२५ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५३ अपराह्न – १२:३९ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • १२:१७ अपराह्न – ०१:५० अपराह्न
  • यमगंड
    ०७:३५ पूर्वाह्न – ०९:०९ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १०:४३ पूर्वाह्न – १२:१७ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ११:५२ पूर्वाह्न – १२:४२ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०७:०० पूर्वाह्न – ०८:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ०७:०२ अपराह्न – ०६:०० पूर्वाह्न, अप्रैल ९
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पूर्व(सम्पूर्ण रात्रि तक)→दक्षिण
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०७:०२ अपराह्न)→श्मशान
राहु वास
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)
होमाहुति
गुरु
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

८ शुभ५ अशुभ
०६:०१ पूर्वाह्न – ०६:२३ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:२३ पूर्वाह्न – ०८:०३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:०३ पूर्वाह्न – १०:०२ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१०:०२ पूर्वाह्न – १२:१५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१२:१५ अपराह्न – ०२:३१ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:३१ अपराह्न – ०४:४२ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:४२ अपराह्न – ०६:५२ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:५२ अपराह्न – ०९:०७ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:०७ अपराह्न – ११:२२ अपराह्न
शुभ पंचक
११:२२ अपराह्न – ०१:२८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०१:२८ पूर्वाह्न – ०३:१४ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०३:१४ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
शुभ पंचक
०४:४८ पूर्वाह्न – ०६:०० पूर्वाह्न, अप्रैल ९
राज पंचक (राज्य लाभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०१ पूर्वाह्न – ०६:२३ पूर्वाह्न
०६:२३ पूर्वाह्न – ०८:०३ पूर्वाह्न
०८:०३ पूर्वाह्न – १०:०२ पूर्वाह्न
१०:०२ पूर्वाह्न – १२:१५ अपराह्न
१२:१५ अपराह्न – ०२:३१ अपराह्न
०२:३१ अपराह्न – ०४:४२ अपराह्न
०४:४२ अपराह्न – ०६:५२ अपराह्न
०६:५२ अपराह्न – ०९:०७ अपराह्न
०९:०७ अपराह्न – ११:२२ अपराह्न
११:२२ अपराह्न – ०१:२८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
०१:२८ पूर्वाह्न – ०३:१४ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
०३:१४ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न, अप्रैल ९
०४:४८ पूर्वाह्न – ०६:०० पूर्वाह्न, अप्रैल ९
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२६७३
लाहिरी अयनांश
२४.२२३१६३°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११३८
संशोधित जूलियन दिन
६११३८
राता डाई (RD)
७३९७१४
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१८ चैत्र, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
२६ मार्च, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।