कृष्ण पक्ष दशमी • ३३% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १६ सितंबर २०२५

२५, भाद्रपदकृष्ण पक्ष, दशमी
२०८१ गुजराती संवत
१६
सितंबर २०२५
मंगलवार
पर्व एवं व्रत सूची:Bhadrapada EkadashiAadal YogaVidaal Yogaचातुर्मास अवधि∞योग:वरीयान्मरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
अगला: एकादशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०६:४५ पूर्वाह्न
अगला: पुनर्वसु

योग

समाप्ति समय १२:३३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
अगला: परिघ

करण

समाप्ति समय १२:५३ अपराह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

मंगलवार
वार (मंगल)
ग्रह स्वामी: मंगल

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:१६ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७ (अगला सूर्योदय)
तिथि
दशमी (समाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु
योग
वरीयान् (समाप्ति समय १२:३३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)
परिघ
करण
वणिज (समाप्ति समय १२:५३ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:१६ अपराह्न
सूर्य राशि: सिंहदिनमान: १२ घंटे १४ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:०९ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०१:३५ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०२:४३ अपराह्न
चंद्र राशि: मिथुनरात्रिमान: ११ घंटे ४५ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
दशमीसमाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७• अगला: एकादशी
वरीयान्समाप्ति समय १२:३३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७• अगला: परिघ
वार
मंगलवार
मास (अमान्त)
भाद्रपद
आर्द्रासमाप्ति समय ०६:४५ पूर्वाह्न• अगला: पुनर्वसु
करण
वणिज(१२:५३ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(१२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आश्विन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी (पद १)
चंद्र राशि
मिथुन(१२:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७ तक)→ कर्क (१२:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७ से)
सूर्य राशि
सिंह• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
आर्द्रा (पद ४)०६:४५ पूर्वाह्नपुनर्वसु (पद १)१२:३८ अपराह्नपुनर्वसु (पद २)०६:३२ अपराह्नपुनर्वसु (पद ३)१२:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७पुनर्वसु (पद ४)जारीपुष्य (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: १४९.२°चन्द्र भोगांश: ७९.५८°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
३१(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आश्विन(पूर्णिमांत)
भाद्रपद(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:१५ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५२ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३४ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:१२ अपराह्न – ०३:०१ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१७ अपराह्न – ०६:४० अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१७ अपराह्न – ०७:२७ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०४:५१ पूर्वाह्न – ०६:२५ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४६ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०३:१३ अपराह्न – ०४:४५ अपराह्न
  • यमगंड
    ०९:०६ पूर्वाह्न – १०:३८ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १२:०९ अपराह्न – ०१:४१ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:२९ पूर्वाह्न – ०९:१८ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०६:३५ अपराह्न – ०८:१० अपराह्न
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    १२:५३ अपराह्न – १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०६:०२ पूर्वाह्न – ०६:४५ पूर्वाह्न
अशुभ योग (९)३ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

वर्षा ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
वर्षा ऋतु
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
वर्षा ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(१२:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७ तक)→उत्तर
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय १२:२२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
पश्चिम
होमाहुति
राहु
कुम्भ चक्र
दक्षिण
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०६:०२ पूर्वाह्न – ०६:०९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:०९ पूर्वाह्न – ०८:१९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:१९ पूर्वाह्न – १०:३३ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१०:३३ पूर्वाह्न – १२:४९ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
१२:४९ अपराह्न – ०२:५४ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०२:५४ अपराह्न – ०४:४१ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:४१ अपराह्न – ०६:१४ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०६:१४ अपराह्न – ०७:४५ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०७:४५ अपराह्न – ०९:२६ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:२६ अपराह्न – ११:२४ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
११:२४ अपराह्न – ०१:३८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
राज पंचक (राज्य लाभ)
०१:३८ पूर्वाह्न – ०३:५३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
शुभ पंचक
०३:५३ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
चोर पंचक (हानि भय)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०२ पूर्वाह्न – ०६:०९ पूर्वाह्न
०६:०९ पूर्वाह्न – ०८:१९ पूर्वाह्न
०८:१९ पूर्वाह्न – १०:३३ पूर्वाह्न
१०:३३ पूर्वाह्न – १२:४९ अपराह्न
१२:४९ अपराह्न – ०२:५४ अपराह्न
०२:५४ अपराह्न – ०४:४१ अपराह्न
०४:४१ अपराह्न – ०६:१४ अपराह्न
०६:१४ अपराह्न – ०७:४५ अपराह्न
०७:४५ अपराह्न – ०९:२६ अपराह्न
०९:२६ अपराह्न – ११:२४ अपराह्न
११:२४ अपराह्न – ०१:३८ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
०१:३८ पूर्वाह्न – ०३:५३ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
०३:५३ पूर्वाह्न – ०६:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर १७
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२४६९
लाहिरी अयनांश
२४.२१५३६५°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०९३४
संशोधित जूलियन दिन
६०९३४
राता डाई (RD)
७३९५१०
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२५ भाद्रपद, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
३ सितंबर, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

भाद्रपद एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित Bhadrapada Ekadashi का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

Bhadrapada Ekadashi का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

Aadal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Aadal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Aadal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Vidaal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Vidaal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Vidaal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

चातुर्मास अवधि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चातुर्मास अवधि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

चातुर्मास अवधि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।