शुक्ल पक्ष एकादशी • ७९% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ६ जुलाई २०२५

११, आषाढ़शुक्ल पक्ष, एकादशी
२०८१ गुजराती संवत
६
जुलाई २०२५
रविवार
पर्व एवं व्रत सूची:Ashadha Ekadashiदेवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी∞योग:साध्य✦रवि योगमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न
अगला: द्वादशी

नक्षत्र

समाप्ति समय १०:४१ अपराह्न
अगला: अनुराधा

योग

समाप्ति समय ०९:२६ अपराह्न
अगला: शुभ

करण

समाप्ति समय ०८:०९ पूर्वाह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

रविवार
वार (सूर्य)
ग्रह स्वामी: सूर्य

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३५ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०२ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३६ पूर्वाह्न, जुलाई ७ (अगला सूर्योदय)
तिथि
एकादशी (समाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न)
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा (समाप्ति समय १०:४१ अपराह्न)
अनुराधा
योग
साध्य (समाप्ति समय ०९:२६ अपराह्न)
शुभ
करण
वणिज (०८:०९ पूर्वाह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३५ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०२ अपराह्न
सूर्य राशि: मिथुनदिनमान: १३ घंटे २६ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१९ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०३:१८ अपराह्न
चंद्रास्त
०२:१३ पूर्वाह्न, जुलाई ७
चंद्र राशि: तुलारात्रिमान: १० घंटे ३३ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
एकादशीसमाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न• अगला: द्वादशी
साध्यसमाप्ति समय ०९:२६ अपराह्न• अगला: शुभ
वार
रविवार
मास (अमान्त)
आषाढ़
विशाखासमाप्ति समय १०:४१ अपराह्न• अगला: अनुराधा
करण
वणिज(०८:०९ पूर्वाह्न)विष्टि (भद्रा)(०९:१५ अपराह्न)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आषाढ़

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: आर्द्रा (पद ४)
चंद्र राशि
तुला(०४:०० अपराह्न तक)→ वृश्चिक (०४:०० अपराह्न से)
सूर्य राशि
मिथुन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
विशाखा (पद २)०९:१८ पूर्वाह्नविशाखा (पद ३)०४:०० अपराह्नविशाखा (पद ४)१०:४१ अपराह्नअनुराधा (पद १)०५:२१ पूर्वाह्न, जुलाई ७अनुराधा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ७९.९९°चन्द्र भोगांश: २०४.८२°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
२२(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आषाढ़(पूर्णिमांत)
आषाढ़(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१२ पूर्वाह्न – ०४:५४ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३३ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न
  • ११:५२ पूर्वाह्न – १२:४६ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३४ अपराह्न – ०३:२८ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०३ अपराह्न – ०७:२४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०३ अपराह्न – ०८:०६ अपराह्न
  • अमृत काल
    १२:५१ अपराह्न – ०२:३८ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५८ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, जुलाई ७
शुभ योग (८)२ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल१२ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०५:२२ अपराह्न – ०७:०३ अपराह्न
  • यमगंड
    १२:१९ अपराह्न – ०२:०० अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०३:४१ अपराह्न – ०५:२२ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०५:१५ अपराह्न – ०६:०९ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०३:०६ पूर्वाह्न – ०४:५२ पूर्वाह्न, जुलाई ७
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ०८:०९ पूर्वाह्न – ०९:१५ अपराह्न
  • विंचुडो
    ०४:०० अपराह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, जुलाई ७
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)४ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(०४:०० अपराह्न तक)→उत्तर
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय ०९:१५ अपराह्न)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
उत्तर
होमाहुति
शनि
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०५:३५ पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०६:२४ पूर्वाह्न – ०८:४० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:४० पूर्वाह्न – १०:५१ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१०:५१ पूर्वाह्न – ०१:०१ अपराह्न
शुभ पंचक
०१:०१ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०३:१५ अपराह्न – ०५:३१ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०५:३१ अपराह्न – ०७:३६ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०७:३६ अपराह्न – ०९:२३ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०९:२३ अपराह्न – १०:५७ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:५७ अपराह्न – १२:२८ पूर्वाह्न, जुलाई ७
चोर पंचक (हानि भय)
१२:२८ पूर्वाह्न – ०२:०८ पूर्वाह्न, जुलाई ७
शुभ पंचक
०२:०८ पूर्वाह्न – ०४:०७ पूर्वाह्न, जुलाई ७
चोर पंचक (हानि भय)
०४:०७ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, जुलाई ७
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३५ पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न
०६:२४ पूर्वाह्न – ०८:४० पूर्वाह्न
०८:४० पूर्वाह्न – १०:५१ पूर्वाह्न
१०:५१ पूर्वाह्न – ०१:०१ अपराह्न
०१:०१ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्न
०३:१५ अपराह्न – ०५:३१ अपराह्न
०५:३१ अपराह्न – ०७:३६ अपराह्न
०७:३६ अपराह्न – ०९:२३ अपराह्न
०९:२३ अपराह्न – १०:५७ अपराह्न
१०:५७ अपराह्न – १२:२८ पूर्वाह्न, जुलाई ७
१२:२८ पूर्वाह्न – ०२:०८ पूर्वाह्न, जुलाई ७
०२:०८ पूर्वाह्न – ०४:०७ पूर्वाह्न, जुलाई ७
०४:०७ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, जुलाई ७
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२३९७
लाहिरी अयनांश
२४.२१२६१३°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०८६२
संशोधित जूलियन दिन
६०८६२
राता डाई (RD)
७३९४३८
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१५ आषाढ़, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
२३ जून, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

२ दैनिक व्रत एवं पर्व

अषाढ एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित Ashadha Ekadashi का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

Ashadha Ekadashi का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।