शुक्ल पक्ष पंचमी • २४% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २ मई २०२५

५, वैशाखशुक्ल पक्ष, पंचमी
२०८१ गुजराती संवत
२
मई २०२५
शुक्रवार
∞योग:धृति✦सर्वार्थ सिद्धि✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०९:१५ पूर्वाह्न
अगला: षष्ठी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०१:०४ अपराह्न
अगला: पुनर्वसु

योग

समाप्ति समय ०३:१९ पूर्वाह्न, मई ३
अगला: शूल

करण

समाप्ति समय ०९:१५ पूर्वाह्न
अगला: कौलव

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:४२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४१ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:४१ पूर्वाह्न, मई ३ (अगला सूर्योदय)
तिथि
पंचमी (०९:१५ पूर्वाह्न)
षष्ठी
नक्षत्र
आर्द्रा (समाप्ति समय ०१:०४ अपराह्न)
पुनर्वसु
योग
धृति (समाप्ति समय ०३:१९ पूर्वाह्न, मई ३)
शूल
करण
बालव (०९:१५ पूर्वाह्न)
कौलव (समाप्ति समय ०८:२७ अपराह्न)
तैतिल

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:४२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४१ अपराह्न
सूर्य राशि: मेषदिनमान: १२ घंटे ५९ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०९:३८ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
११:४९ अपराह्न
चंद्र राशि: मिथुनरात्रिमान: १० घंटे ५९ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
पंचमीसमाप्ति समय ०९:१५ पूर्वाह्न• अगला: षष्ठी
धृतिसमाप्ति समय ०३:१९ पूर्वाह्न, मई ३• अगला: शूल
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
वैशाख
आर्द्रासमाप्ति समय ०१:०४ अपराह्न• अगला: पुनर्वसु
करण
बालव(०९:१५ पूर्वाह्न)कौलव(०८:२७ अपराह्न)तैतिल(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
वैशाख

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: भरणी (पद २)
चंद्र राशि
मिथुन(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ कर्क (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मेष• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
भरणीपद २
नक्षत्र पद
आर्द्रा (पद ३)०७:१९ पूर्वाह्नआर्द्रा (पद ४)०१:०४ अपराह्नपुनर्वसु (पद १)०६:५१ अपराह्नपुनर्वसु (पद २)१२:४२ पूर्वाह्न, मई ३पुनर्वसु (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: १७.६५°चन्द्र भोगांश: ७५.७३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
१९(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
वैशाख(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१४ पूर्वाह्न – ०४:५८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३६ पूर्वाह्न – ०५:४२ पूर्वाह्न
  • ११:४६ पूर्वाह्न – १२:३८ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१४ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:४१ अपराह्न – ०७:०३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:४१ अपराह्न – ०७:४७ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०७:०० पूर्वाह्न – ०८:३१ पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४९ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई ३
शुभ योग (८)३ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल७ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)६ सक्रिय
  • १०:३४ पूर्वाह्न – १२:१२ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:२७ अपराह्न – ०५:०४ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०७:२० पूर्वाह्न – ०८:५७ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:१८ पूर्वाह्न – ०९:१० पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:४९ पूर्वाह्न – ०२:२३ पूर्वाह्न, मई ३
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०९:१५ पूर्वाह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
कैलाश (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०९:१५ पूर्वाह्न)→नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
बुध
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

८ शुभ५ अशुभ
०५:४२ पूर्वाह्न – ०६:२८ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:२८ पूर्वाह्न – ०८:२७ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:२७ पूर्वाह्न – १०:४० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:४० पूर्वाह्न – १२:५६ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१२:५६ अपराह्न – ०३:०७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०३:०७ अपराह्न – ०५:१७ अपराह्न
शुभ पंचक
०५:१७ अपराह्न – ०७:३२ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०७:३२ अपराह्न – ०९:४७ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०९:४७ अपराह्न – ११:५३ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
११:५३ अपराह्न – ०१:४० पूर्वाह्न, मई ३
शुभ पंचक
०१:४० पूर्वाह्न – ०३:१३ पूर्वाह्न, मई ३
राज पंचक (राज्य लाभ)
०३:१३ पूर्वाह्न – ०४:४४ पूर्वाह्न, मई ३
शुभ पंचक
०४:४४ पूर्वाह्न – ०५:४१ पूर्वाह्न, मई ३
शुभ पंचक
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उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:४२ पूर्वाह्न – ०६:२८ पूर्वाह्न
०६:२८ पूर्वाह्न – ०८:२७ पूर्वाह्न
०८:२७ पूर्वाह्न – १०:४० पूर्वाह्न
१०:४० पूर्वाह्न – १२:५६ अपराह्न
१२:५६ अपराह्न – ०३:०७ अपराह्न
०३:०७ अपराह्न – ०५:१७ अपराह्न
०५:१७ अपराह्न – ०७:३२ अपराह्न
०७:३२ अपराह्न – ०९:४७ अपराह्न
०९:४७ अपराह्न – ११:५३ अपराह्न
११:५३ अपराह्न – ०१:४० पूर्वाह्न, मई ३
०१:४० पूर्वाह्न – ०३:१३ पूर्वाह्न, मई ३
०३:१३ पूर्वाह्न – ०४:४४ पूर्वाह्न, मई ३
०४:४४ पूर्वाह्न – ०५:४१ पूर्वाह्न, मई ३
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२३३२
लाहिरी अयनांश
२४.२१०१२८°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०७९७
संशोधित जूलियन दिन
६०७९७
राता डाई (RD)
७३९३७३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१२ वैशाख, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
१९ अप्रैल, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।