शुक्ल पक्ष षष्ठी • २८% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ३ अप्रैल २०२५

६, चैत्रशुक्ल पक्ष, षष्ठी
२०८१ गुजराती संवत
३
अप्रैल २०२५
गुरुवार
∞योग:सौभाग्य✦रवि योगमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न
अगला: सप्तमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:०२ पूर्वाह्न
अगला: मृगशिरा

योग

समाप्ति समय १२:०१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
अगला: शोभन

करण

समाप्ति समय १०:४१ पूर्वाह्न
अगला: तैतिल

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०५ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:३० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
षष्ठी (समाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न)
सप्तमी
नक्षत्र
मृगशिरा
योग
सौभाग्य (समाप्ति समय १२:०१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४)
शोभन
करण
कौलव (१०:४१ पूर्वाह्न)
तैतिल (समाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०५ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:३० अपराह्न
सूर्य राशि: मीनदिनमान: १२ घंटे २४ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१८ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०९:४७ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
१२:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
चंद्र राशि: वृषभरात्रिमान: ११ घंटे ३४ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
षष्ठीसमाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न• अगला: सप्तमी
सौभाग्यसमाप्ति समय १२:०१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४• अगला: शोभन
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
चैत्र
रोहिणीसमाप्ति समय ०७:०२ पूर्वाह्न• अगला: मृगशिरा
करण
कौलव(१०:४१ पूर्वाह्न)तैतिल(०९:४१ अपराह्न)गरज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
चैत्र

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रेवती (पद १)
चंद्र राशि
वृषभ(०६:२१ अपराह्न तक)→ मिथुन (०६:२१ अपराह्न से)
सूर्य राशि
मीन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
रेवतीपद १
नक्षत्र पद
रोहिणी (पद ४)०७:०२ पूर्वाह्नमृगशिरा (पद १)१२:४० अपराह्नमृगशिरा (पद २)०६:२१ अपराह्नमृगशिरा (पद ३)१२:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४मृगशिरा (पद ४)०५:५१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४आर्द्रा (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: ३४९.३°चन्द्र भोगांश: ५२.७८°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
२१(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
कालयुक्ततक ०२:०९ pm, सोमवार, २९ अप्रैल २०२४
आगामी संवत्
सिद्धार्थी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
चैत्र(पूर्णिमांत)
चैत्र(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३३ पूर्वाह्न – ०५:२० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५६ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न
  • ११:५३ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:३० अपराह्न – ०६:५३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:३० अपराह्न – ०७:४० अपराह्न
  • अमृत काल
    ०३:३४ पूर्वाह्न – ०५:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५४ अपराह्न – १२:४१ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०१:५१ अपराह्न – ०३:२४ अपराह्न
  • यमगंड
    ०६:०६ पूर्वाह्न – ०७:३९ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०९:१२ पूर्वाह्न – १०:४५ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:१४ पूर्वाह्न – ११:०४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:२१ अपराह्न – ०१:५२ अपराह्न
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०५:५१ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०६:२१ अपराह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०९:४१ अपराह्न)→भोजन (भोजन करते हुए)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
बुध
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०६:०५ पूर्वाह्न – ०६:४१ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:४१ पूर्वाह्न – ०८:२२ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०८:२२ पूर्वाह्न – १०:२० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
१०:२० पूर्वाह्न – १२:३३ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१२:३३ अपराह्न – ०२:४९ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०२:४९ अपराह्न – ०५:०० अपराह्न
शुभ पंचक
०५:०० अपराह्न – ०७:११ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०७:११ अपराह्न – ०९:२५ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:२५ अपराह्न – ११:४० अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:४० अपराह्न – ०१:४६ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ पंचक
०१:४६ पूर्वाह्न – ०३:३३ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०३:३३ पूर्वाह्न – ०५:०६ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०५:०६ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०५ पूर्वाह्न – ०६:४१ पूर्वाह्न
०६:४१ पूर्वाह्न – ०८:२२ पूर्वाह्न
०८:२२ पूर्वाह्न – १०:२० पूर्वाह्न
१०:२० पूर्वाह्न – १२:३३ अपराह्न
१२:३३ अपराह्न – ०२:४९ अपराह्न
०२:४९ अपराह्न – ०५:०० अपराह्न
०५:०० अपराह्न – ०७:११ अपराह्न
०७:११ अपराह्न – ०९:२५ अपराह्न
०९:२५ अपराह्न – ११:४० अपराह्न
११:४० अपराह्न – ०१:४६ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०१:४६ पूर्वाह्न – ०३:३३ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०३:३३ पूर्वाह्न – ०५:०६ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
०५:०६ पूर्वाह्न – ०६:०५ पूर्वाह्न, अप्रैल ४
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२३०३
लाहिरी अयनांश
२४.२०९०१९°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०७६८
संशोधित जूलियन दिन
६०७६८
राता डाई (RD)
७३९३४४
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१३ चैत्र, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
२१ मार्च, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।