शुक्ल पक्ष दशमी • ७५% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ९ मार्च २०२५

१०, फाल्गुनशुक्ल पक्ष, दशमी
२०८१ गुजराती संवत
९
मार्च २०२५
रविवार
पर्व एवं व्रत सूची:Phalguna EkadashiAadal YogaVidaal Yoga∞योग:सौभाग्य✦सर्वार्थ सिद्धि✦रवि योग✦पुष्य योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०७:४५ पूर्वाह्न
अगला: एकादशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ११:५५ अपराह्न
अगला: पुष्य

योग

समाप्ति समय ०२:५८ अपराह्न
अगला: शोभन

करण

समाप्ति समय ०७:४५ पूर्वाह्न
अगला: वणिज

वार

रविवार
वार (सूर्य)
ग्रह स्वामी: सूर्य

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:२९ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:२१ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:२८ पूर्वाह्न, मार्च १० (अगला सूर्योदय)
तिथि
दशमी
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु (समाप्ति समय ११:५५ अपराह्न)
पुष्य
योग
सौभाग्य (समाप्ति समय ०२:५८ अपराह्न)
शोभन
करण
गरज
वणिज (समाप्ति समय ०७:४१ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:२९ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:२१ अपराह्न
सूर्य राशि: कुंभदिनमान: ११ घंटे ५१ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२५ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०१:५७ अपराह्न
चंद्रास्त
०३:५७ पूर्वाह्न, मार्च १०
चंद्र राशि: मिथुनरात्रिमान: १२ घंटे ७ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
दशमीसमाप्ति समय ०७:४५ पूर्वाह्न• अगला: एकादशी
सौभाग्यसमाप्ति समय ०२:५८ अपराह्न• अगला: शोभन
वार
रविवार
मास (अमान्त)
फाल्गुन
पुनर्वसुसमाप्ति समय ११:५५ अपराह्न• अगला: पुष्य
करण
गरज(०७:४५ पूर्वाह्न)वणिज(०७:४१ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (पद २)
चंद्र राशि
मिथुन(०५:४५ अपराह्न तक)→ कर्क (०५:४५ अपराह्न से)
सूर्य राशि
कुंभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
पुनर्वसु (पद २)११:३८ पूर्वाह्नपुनर्वसु (पद ३)०५:४५ अपराह्नपुनर्वसु (पद ४)११:५५ अपराह्नपुष्य (पद १)०६:०६ पूर्वाह्न, मार्च १०पुष्य (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३२४.५°चन्द्र भोगांश: ८३.८६°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८१ · शक १९४६
विक्रम संवत्
२०८१पिंगल
शक संवत्
१९४६क्रोधी
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
२६(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
कालयुक्ततक ०२:०९ pm, सोमवार, २९ अप्रैल २०२४
आगामी संवत्
सिद्धार्थी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
फाल्गुन(पूर्णिमांत)
फाल्गुन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१२ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५२ पूर्वाह्न – ०५:४१ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:१७ पूर्वाह्न – ०६:३० पूर्वाह्न
  • १२:०२ अपराह्न – १२:४९ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:११ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:२१ अपराह्न – ०६:४५ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:२१ अपराह्न – ०७:३४ अपराह्न
  • अमृत काल
    १०:१७ अपराह्न – ११:५५ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०१ पूर्वाह्न – १२:४९ पूर्वाह्न, मार्च १०
शुभ योग (८)४ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०४:५२ अपराह्न – ०६:२१ अपराह्न
  • यमगंड
    १२:२५ अपराह्न – ०१:५४ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०३:२३ अपराह्न – ०४:५२ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०४:४६ अपराह्न – ०५:३४ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ११:४१ पूर्वाह्न – ०१:१९ अपराह्न
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    ०७:४१ अपराह्न – ०६:२८ पूर्वाह्न, मार्च १०
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
० (निर्जीव - अशुभ/वर्ज्य)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(०५:४५ अपराह्न तक)→उत्तर
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०७:४५ पूर्वाह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०७:४५ पूर्वाह्न)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
उत्तर
होमाहुति
शनि
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
मंगल
मन्त्री
शनि
सेनापति
शुक्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
मंगल
धान्याधिपति (शीत धान्य)
सूर्य
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
चन्द्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
शुक्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
गुरू
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
मंगल
फलाधिपति
शुक्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०६:२९ पूर्वाह्न – ०६:४९ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:४९ पूर्वाह्न – ०८:२० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०८:२० पूर्वाह्न – १०:०० पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१०:०० पूर्वाह्न – ११:५९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:५९ पूर्वाह्न – ०२:१२ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०२:१२ अपराह्न – ०४:२८ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:२८ अपराह्न – ०६:३९ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०६:३९ अपराह्न – ०८:४९ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:४९ अपराह्न – ११:०३ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:०३ अपराह्न – ०१:१९ पूर्वाह्न, मार्च १०
शुभ पंचक
०१:१९ पूर्वाह्न – ०३:२४ पूर्वाह्न, मार्च १०
शुभ पंचक
०३:२४ पूर्वाह्न – ०५:११ पूर्वाह्न, मार्च १०
राज पंचक (राज्य लाभ)
०५:११ पूर्वाह्न – ०६:२८ पूर्वाह्न, मार्च १०
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:२९ पूर्वाह्न – ०६:४९ पूर्वाह्न
०६:४९ पूर्वाह्न – ०८:२० पूर्वाह्न
०८:२० पूर्वाह्न – १०:०० पूर्वाह्न
१०:०० पूर्वाह्न – ११:५९ पूर्वाह्न
११:५९ पूर्वाह्न – ०२:१२ अपराह्न
०२:१२ अपराह्न – ०४:२८ अपराह्न
०४:२८ अपराह्न – ०६:३९ अपराह्न
०६:३९ अपराह्न – ०८:४९ अपराह्न
०८:४९ अपराह्न – ११:०३ अपराह्न
११:०३ अपराह्न – ०१:१९ पूर्वाह्न, मार्च १०
०१:१९ पूर्वाह्न – ०३:२४ पूर्वाह्न, मार्च १०
०३:२४ पूर्वाह्न – ०५:११ पूर्वाह्न, मार्च १०
०५:११ पूर्वाह्न – ०६:२८ पूर्वाह्न, मार्च १०
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२२७८
लाहिरी अयनांश
२४.२०८०६४°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०७४३
संशोधित जूलियन दिन
६०७४३
राता डाई (RD)
७३९३१९
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१९ फाल्गुन, १९४६
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४६
जूलियन दिनांक
२४ फ़रवरी, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

३ दैनिक व्रत एवं पर्व

फाल्गुन एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित Phalguna Ekadashi का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

Phalguna Ekadashi का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

Aadal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Aadal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Aadal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Vidaal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Vidaal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Vidaal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।