शुक्ल पक्ष चतुर्थी • १३% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ३ मार्च २०२५

४, फाल्गुनशुक्ल पक्ष, चतुर्थी
२०८१ गुजराती संवत
३
मार्च २०२५
सोमवार
पर्व एवं व्रत सूची:विनायक चतुर्थीGanda MoolaRavi YogaVidaal Yoga∞योग:शुक्ल✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न
अगला: पंचमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०६:३९ पूर्वाह्न
अगला: अश्विनी

योग

समाप्ति समय ०८:५६ पूर्वाह्न
अगला: ब्रह्म

करण

समाप्ति समय ०७:३१ पूर्वाह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:३४ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:१८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
चतुर्थी (समाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न)
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी
योग
शुक्ल (०८:५६ पूर्वाह्न)
ब्रह्म
करण
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न)
बव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:३४ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:१८ अपराह्न
सूर्य राशि: कुंभदिनमान: ११ घंटे ४३ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:२६ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०८:४० पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०९:५४ अपराह्न
चंद्र राशि: मीनरात्रिमान: १२ घंटे १५ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
चतुर्थीसमाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न• अगला: पंचमी
शुक्लसमाप्ति समय ०८:५६ पूर्वाह्न• अगला: ब्रह्म
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
फाल्गुन
रेवतीसमाप्ति समय ०६:३९ पूर्वाह्न• अगला: अश्विनी
करण
वणिज(०७:३१ पूर्वाह्न)विष्टि (भद्रा)(०६:०२ अपराह्न)बव(०४:३७ पूर्वाह्न, मार्च ४)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: शतभिषा (पद ४)
चंद्र राशि
मीन(०६:३९ पूर्वाह्न तक)→ मेष (०६:३९ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
कुंभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
रेवती (पद ४)०६:३९ पूर्वाह्नअश्विनी (पद १)१२:०५ अपराह्नअश्विनी (पद २)०५:३२ अपराह्नअश्विनी (पद ३)११:०० अपराह्नअश्विनी (पद ४)०४:२९ पूर्वाह्न, मार्च ४भरणी (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: ३१८.४९°चन्द्र भोगांश: ३५९.९६°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८१ · शक १९४६
विक्रम संवत्
२०८१पिंगल
शक संवत्
१९४६क्रोधी
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
२०(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
कालयुक्ततक ०२:०९ pm, सोमवार, २९ अप्रैल २०२४
आगामी संवत्
सिद्धार्थी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
फाल्गुन(पूर्णिमांत)
फाल्गुन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:५७ पूर्वाह्न – ०५:४६ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०५:२१ पूर्वाह्न – ०६:३५ पूर्वाह्न
  • १२:०३ अपराह्न – १२:५० अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:११ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१९ अपराह्न – ०६:४३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१९ अपराह्न – ०७:३२ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०२:१८ पूर्वाह्न – ०३:४५ पूर्वाह्न, मार्च ४
  • निशीथ मुहूर्त
    १२:०२ पूर्वाह्न – १२:५१ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ योग (८)२ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०८:०३ पूर्वाह्न – ०९:३१ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    १०:५९ पूर्वाह्न – १२:२७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:५५ अपराह्न – ०३:२३ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:५० अपराह्न – ०१:३७ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:५१ पूर्वाह्न – ०२:१८ पूर्वाह्न, मार्च ४
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    ०७:३१ पूर्वाह्न – ०६:०२ अपराह्न
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    ०६:३४ पूर्वाह्न – ०६:३९ पूर्वाह्न
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Shishir
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Shishir
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Shishir
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: अशुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(०६:३९ पूर्वाह्न तक)→पूर्व
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
क्रीड़ा (खेलते हुए)(समाप्ति समय ०६:०२ अपराह्न)→कैलाश (अत्यंत शुभ)
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
बुध
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
अशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
मंगल
मन्त्री
शनि
सेनापति
शुक्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
मंगल
धान्याधिपति (शीत धान्य)
सूर्य
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
चन्द्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
शुक्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
गुरू
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
मंगल
फलाधिपति
शुक्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०६:३४ पूर्वाह्न – ०७:१२ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:१२ पूर्वाह्न – ०८:४३ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:४३ पूर्वाह्न – १०:२४ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
१०:२४ पूर्वाह्न – १२:२२ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:२२ अपराह्न – ०२:३५ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:३५ अपराह्न – ०४:५१ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:५१ अपराह्न – ०७:०२ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:०२ अपराह्न – ०९:१३ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:१३ अपराह्न – ११:२७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
११:२७ अपराह्न – ०१:४३ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ पंचक
०१:४३ पूर्वाह्न – ०३:४८ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ पंचक
०३:४८ पूर्वाह्न – ०५:३५ पूर्वाह्न, मार्च ४
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०५:३५ पूर्वाह्न – ०६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:३४ पूर्वाह्न – ०७:१२ पूर्वाह्न
०७:१२ पूर्वाह्न – ०८:४३ पूर्वाह्न
०८:४३ पूर्वाह्न – १०:२४ पूर्वाह्न
१०:२४ पूर्वाह्न – १२:२२ अपराह्न
१२:२२ अपराह्न – ०२:३५ अपराह्न
०२:३५ अपराह्न – ०४:५१ अपराह्न
०४:५१ अपराह्न – ०७:०२ अपराह्न
०७:०२ अपराह्न – ०९:१३ अपराह्न
०९:१३ अपराह्न – ११:२७ अपराह्न
११:२७ अपराह्न – ०१:४३ पूर्वाह्न, मार्च ४
०१:४३ पूर्वाह्न – ०३:४८ पूर्वाह्न, मार्च ४
०३:४८ पूर्वाह्न – ०५:३५ पूर्वाह्न, मार्च ४
०५:३५ पूर्वाह्न – ०६:३३ पूर्वाह्न, मार्च ४
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२२७२
लाहिरी अयनांश
२४.२०७८३४°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०७३७
संशोधित जूलियन दिन
६०७३७
राता डाई (RD)
७३९३१३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१३ फाल्गुन, १९४६
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४६
जूलियन दिनांक
१८ फ़रवरी, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

विनायक चतुर्थी

प्रमुख पर्व

विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव एवं १० दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ।

पूज्य देवता
भगवान श्री गणेश
धार्मिक महत्व

समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
  • ✦२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
  • ✦प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
  • ✦अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन

Ganda Moola

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ganda Moola का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ganda Moola का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

रवि योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ravi Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ravi Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Vidaal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Vidaal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Vidaal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।