1 November•Krishna Paksha Saptami

धनतेरस पर पुराने सिक्कों की पूजा क्यों की जाती है?

प्रकाशित:
2 मिनट में पढ़ें
धनतेरस पर पुराने सिक्कों की पूजा क्यों की जाती है?

धनतेरस (Dhanteras 2026) के दिन पुराने सिक्कों की पूजा करने का मुख्य उद्देश्य परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही समृद्धि को स्थिर रखना और माता लक्ष्मी व कुबेर का आशीर्वाद पाना है। इस दिन पुराने सिक्कों को पूजने के बाद उन्हें तिजोरी में सुरक्षित रख दिया जाता है, जिससे साल भर धन का प्रवाह बना रहता है।

धनतेरस पर पुराने सिक्कों की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर पुराने चांदी और सोने के सिक्कों की पूजा की जाती है जिन पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की छवि होती है। घर में रखे ये पुराने सिक्के इस बात का प्रतीक माने जाते हैं कि परिवार में पीढ़ियों से पैसा और समृद्धि स्थिर है।

पुराने सिक्के परिवार की पुरानी धरोहर का भी प्रतीक होते हैं, जिन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को आशीर्वाद के तौर पर दिया जाता है। इनकी पूजा करना पूर्वजों का आभार भी माना जाता है।

धनतेरस पर नए दीपक खरीदने का क्या महत्व है?

धनतेरस के मौके पर नए दीये खरीदने की परंपरा के पीछे यम दीपदान और माता लक्ष्मी व भगवान धनवंतरी का आशीर्वाद प्राप्त करना है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस पर मिट्टी से निर्मित नए दीपक खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

शुभता के लिए

इन नए दीयों को जलाने से घर से नकारात्मकता दूर होती है और परिवार की खुशियां सुरक्षित रहती हैं।

यम दीपदान क्या है और यह क्यों किया जाता है?

धनतेरस के दिन शाम के समय यम दीपदान यानी यमराज के नाम से एक दीया जलाया जाता है। ऐसा करने के पीछे यह मान्यता है कि धनतेरस पर यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का डर नहीं सताता है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

धनतेरस पर यमराज का दीपक किस दिशा में जलाया जाता है?

यमराज के नाम से जलाया जाने वाला यह विशेष दीपक हमेशा घर की दक्षिण दिशा में रखा जाता है। इस अनुष्ठान को पूरे विधि-विधान के साथ शाम के समय निभाया जाता है ताकि परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहे।

धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर के साथ किनकी पूजा होती है?

धनतेरस के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा का विधान है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करके सोना-चांदी, नए बर्तन और नई चीजें खरीदते हैं तथा विधि-विधान से इन देवी-देवताओं की आराधना करते हैं।

यह भी देखें

Share: