श्रावण माहात्म्य
सम्पूर्ण ३० अध्याय एवं सावन व्रत कथा
श्रावण माहात्म्य भगवान शिव द्वारा सनत्कुमार को उपदिष्ट तथा नैमिषारण्य में सूत जी द्वारा शौनकादि ऋषियों को सुनाया गया पावन आख्यान है। इसमें तीस अध्यायों में सावन सोमवार व्रत, मंगला गौरी, स्वर्ण गौरी, नाग पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी और सावन के प्रत्येक नियम-धर्म का विस्तार से वर्णन है।
प्रमुख आराध्य
भगवान शिव (महादेव)
कुल अध्याय
३० अध्याय (अध्याय १ से ३०)
स्रोत पुराण
शिव पुराण, स्कन्द पुराण (सनत्कुमार संहिता)
मास परिचय
श्रावण मास (पवित्र सावन) →श्रावण माहात्म्य अध्याय
सम्पूर्ण ३० अध्यायों की प्रामाणिक कथा एवं सारांश
सूत जी का कथन
नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों ने सूत जी से श्रावण मास के माहात्म्य को सुनाने की प्रार्थना की। सूत जी ने उत्तम श्रोता के बारह गुणों का वर्णन किया और बताया कि कैसे भगवान शिव ने सनत्कुमार को श्रावण की महिमा सुनाई थी।
श्रावण मास का धर्म पालन
भगवान शिव ने श्रावण मास के पावन आचरण, नियम और धर्म पालन का उपदेश दिया—जिसमें प्रातः स्नान, शुचिता, बिल्वपत्र से शिवपूजन, इन्द्रिय-संयम और सात्विक दिनचर्या का विधान है।
नक्त व्रत
श्रावण मास में नक्त व्रत (सूर्यास्त अथवा तारा दर्शन के बाद एक समय भोजन) की अपार महिमा। भगवान शिव ने इस व्रत की विधि, नियम और पाप-मुक्ति के अलौकिक फल का वर्णन किया।
धारण-पारण व्रत
धारण-पारण व्रत का पावन विधान, जिसमें पूरे श्रावण मास एक दिन पूर्ण उपवास और अगले दिन भोजन किया जाता है। यह तपस्या शरीर और आत्मा दोनों को परम पवित्र बनाती है।
कोटिलिंग माहात्म्य एवं रविवार व्रत
कोटिलिंग पूजन का माहात्म्य तथा श्रावण के पवित्र रविवार व्रत की कथा। भगवान सूर्य नारायण एवं शिव की आराधना से निर्धनता, रोग और कोढ़ दूर होकर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
सोमवार व्रत कथा
भगवान शिव बताते हैं कि सोमवार उन्हें क्यों प्रिय है और श्रावण के सोमवार व्रत की विधि: सायं श्वेत पुष्पों से पूजा, नक्त भोजन, और वृषभ पर स्थित शिव-पार्वती की स्वर्ण प्रतिमाओं से उद्यापन।
मंगलवार व्रत कथा (मंगला गौरी)
माता मंगला गौरी को समर्पित श्रावण मंगलवार व्रत। नवविवाहित व सौभाग्यवती स्त्रियाँ अखण्ड सौभाग्य, सन्तान सुख और परिवार की रक्षा के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।
बुधवार और बृहस्पतिवार व्रत कथा
श्रावण मास में बुधवार और गुरुवार के व्रत के नियम, कथा और फल—जो भगवान बुध, श्रीहरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा से विद्या, बुद्धि और धन की वृद्धि करते हैं।
शुक्रवार व्रत कथा
जीवन्तिका देवी का शुक्रवार व्रत, रानी सुकेशी, पुरोहित पुत्र प्रियव्रत, गया यात्रा और षष्ठी तथा जीवन्तिका देवियों के संवाद की कथा द्वारा, जो माता की सन्तान की रक्षा दर्शाती है।
शनिवार व्रत कथा (हनुमान, नृसिंह एवं शनि)
श्रावण शनिवार का पावन व्रत, जिसमें शनिदेव, नृसिंह भगवान और हनुमान जी की आराधना की जाती है। यह व्रत शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और ग्रह पीड़ा से मुक्ति दिलाता है।
तिथि माहात्म्य (प्रतिपदा एवं द्वितीया व्रत)
तिथि माहात्म्य का आरम्भ: श्रावण प्रतिपदा को सोमवार पड़ने पर रोटक व्रत, और द्वितीया का औदुम्बर व्रत, जो गूलर के वृक्ष की पूजा से धन और पुत्र के लिए किया जाता है।
तृतीया व्रत शुक्ल पक्ष
श्रावण शुक्ल तृतीया का स्वर्ण गौरी व्रत: उसकी विधि और उद्यापन, तथा राजा चन्द्रप्रभा और उनकी दो रानियों की कथा, जिनमें से एक ने पवित्र डोरा तोड़ दिया था।
श्रावण शुक्ल चतुर्थी व्रत
श्रावण शुक्ल चतुर्थी का दुर्गा गणपति व्रत: पाँच पत्रों से गणेश जी की स्वर्ण प्रतिमा का पूजन, प्रार्थना और मन्त्र, तथा उद्यापन।
नाग पंचमी व्रत
श्रावण शुक्ल पंचमी का पावन पर्व नाग पंचमी। अनन्त, वासुकि आदि नाग देवताओं का दुग्ध से पूजन करने से सर्पदोष, विष भय और कालसर्प पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
सूपोदन नामक व्रत
श्रावण शुक्ल षष्ठी का सूपोदन व्रत, राजा रोहित के अल्पायु पुत्र शिवदत्त की कथा सहित, जो एक बालिका की शिव-पार्वती में श्रद्धा से पुनः जीवित हो गया।
शीतला सप्तमी व्रत
श्रावण शुक्ल सप्तमी का शीतला सप्तमी व्रत: दही, चावल और ककड़ी से जल देवताओं का पूजन, तथा एक बावड़ी, एक परिवार और माता सुशीला को लौटाए गए पुत्रों की कथा।
पवित्रारोपण विधान
श्रावण शुक्ल अष्टमी को देवी का पवित्रारोपण: पवित्रा कैसे बनता है, कौन करे और क्या फल मिलता है, तथा दोनों पक्षों की नवमी को कुमारी पूजन।
श्रावण शुक्ल दशमी तिथि माहात्म्य
श्रावण शुक्ल दशमी का आशा दशमी व्रत: दस दिशाओं का मन्त्रों सहित पूजन, वर्ष के अन्त में उद्यापन, और राजा, किसान, व्यापारी तथा स्त्रियों के लिए इसका फल।
एकादशी एवं द्वादशी व्रत
श्रावण के दोनों पक्षों की एकादशी का श्रीधर के लिए व्रत, और द्वादशी को विष्णु का पवित्रारोपण: कौन करे, प्रार्थनाएँ और पवित्रा का विसर्जन।
त्रयोदशी एवं चतुर्दशी व्रत (प्रदोष)
श्रावण शुक्ल त्रयोदशी को कामदेव का पूजन, नैवेद्य और पान सहित, तथा चतुर्दशी को शिव के लिए पवित्रारोपण, जो अष्टमी को न हो सके तो किया जाता है।
पूर्णमासी व्रत (रक्षाबंधन)
श्रावण पूर्णिमा का परम पावन पर्व—उपाकर्म (यज्ञोपवीत धारण), रक्षाबंधन और नारली पूर्णिमा। दान, स्नान और पितृतर्पण से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
सर्वकाम फलप्रद संकटहरण व्रत
गणेश जी का संकट हरण व्रत: संकल्प, पूजन, इक्कीस नाम, चन्द्रमा को अर्घ्य और उद्यापन, तथा इसे करने वाले पार्वती, अगस्त्य, दमयन्ती, रुक्मिणी और प्रद्युम्न।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
श्रावण कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव (जन्माष्टमी)। उपवास, रात्रि पूजन और भजन-कीर्तन से भक्ति और मुक्ति मिलती है।
श्री कृष्ण अवतार तथा राजा महासेन कथा
श्रीकृष्ण अवतार की दिव्य महिमा और राजा महासेन की मुक्ति की कथा। शिव और कृष्ण के अभिन्न स्वरूप की भक्ति से परम शांति और भगवत्कृपा की प्राप्ति होती है।
पिठौरा व्रत
श्रावण अमावस्या का पिठोर व्रत: शिव-पार्वती के चारों ओर दीवार पर संसार की वस्तुएँ बनाना, उसका पूजन और उद्यापन, और यह वचन कि जो बनाया जाएगा वह प्राप्त होगा।
श्रावण मास की अमावस्या
वृषभों का पोला व्रत, नन्दी के वरदान की कथा सहित जब उसने अन्धकासुर को मारा था, और श्रावण अमावस्या को कुश संग्रह के नियम।
श्रावण मास के अन्य कार्य
श्रावण के अन्य कर्त्तव्य: नदियाँ कब रजस्वला कही जाती हैं और कब उनमें स्नान करें, सिंह संक्रान्ति पर गौ के ब्याने का उपाय, मास के दान, और व्यास पूजा।
अगस्त्य अर्घ्य विधि
अगस्त्य अर्घ्य: लोपामुद्रा सहित मुनि की प्रतिमा, उदय से पहले सात रात अर्घ्य, मन्त्र और होम, तथा प्रत्येक वर्ण के लिए फल।
श्रावण मास के व्रतों के कृत्य एवं उद्यापन
श्रावण के कर्मों के काल का निर्णय: किस व्रत में कौन सी तिथि ग्राह्य है, वेध के नियम, तथा उपाकर्म, रक्षाबन्धन, जन्माष्टमी और संक्रान्तियों के समय।
श्रावण मास का संक्षिप्त माहात्म्य तथा फलश्रुति
श्रावण माहात्म्य का समापन: सती द्वारा इस मास का सेवन, भस्म और रुद्राक्ष धारण, सभी अध्यायों की क्रमबद्ध अनुक्रमणिका, और श्रवण का फल।