शुक्ल पक्ष चतुर्दशी • ९६% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १७ जून २०२७

१४, ज्येष्ठशुक्ल पक्ष, चतुर्दशी
२०८३ गुजराती संवत
१७
जून २०२७
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:ज्येष्ठ पूर्णिमाइष्टिविंचुडो∞योग:सिद्ध✦सर्वार्थ सिद्धि✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८
अगला: पूर्णिमा

नक्षत्र

समाप्ति समय ०९:२९ अपराह्न
अगला: ज्येष्ठा

योग

समाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न
अगला: साध्य

करण

समाप्ति समय ०३:५४ अपराह्न
अगला: वणिज

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३० पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०० अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३० पूर्वाह्न, जून १८ (अगला सूर्योदय)
तिथि
चतुर्दशी (समाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८)
नक्षत्र
अनुराधा (समाप्ति समय ०९:२९ अपराह्न)
ज्येष्ठा
योग
साध्य
करण
गरज (समाप्ति समय ०३:५४ अपराह्न)
वणिज (समाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३० पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०० अपराह्न
सूर्य राशि: मिथुनदिनमान: १३ घंटे २९ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१५ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०५:४६ अपराह्न
चंद्रास्त
०४:३१ पूर्वाह्न, जून १८
चंद्र राशि: वृश्चिकरात्रिमान: १० घंटे ३० मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
चतुर्दशीसमाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८• अगला: पूर्णिमा
सिद्धसमाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न• अगला: साध्य
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
अनुराधासमाप्ति समय ०९:२९ अपराह्न• अगला: ज्येष्ठा
करण
गरज(०३:५४ अपराह्न)वणिज(०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: मृगशिरा (पद ३)
चंद्र राशि
वृश्चिक(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ धनु (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मिथुन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
अनुराधा (पद २)०८:३३ पूर्वाह्नअनुराधा (पद ३)०३:०१ अपराह्नअनुराधा (पद ४)०९:२९ अपराह्नज्येष्ठा (पद १)०४:०० पूर्वाह्न, जून १८ज्येष्ठा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ६१.३८°चन्द्र भोगांश: २१८.४२°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
३(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०७ पूर्वाह्न – ०४:४९ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२८ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न
  • ११:४९ पूर्वाह्न – १२:४३ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३१ अपराह्न – ०३:२५ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०० अपराह्न – ०७:२२ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०० अपराह्न – ०८:०४ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०२:३७ अपराह्न – ०४:२० अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५५ अपराह्न – १२:३७ पूर्वाह्न, जून १८
शुभ योग (८)३ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल१० सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)९ सक्रिय
  • ०१:५७ अपराह्न – ०३:३८ अपराह्न
  • यमगंड
    ०५:३१ पूर्वाह्न – ०७:१२ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०८:५३ पूर्वाह्न – १०:३४ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:०१ पूर्वाह्न – १०:५५ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०३:३६ पूर्वाह्न – ०५:२० पूर्वाह्न, जून १८
  • बाण दोष
    मृत्यु
  • भद्रा (विष्टि)
    ०४:३५ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १८
  • विंचुडो
    पूरा दिन
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०९:२९ अपराह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १८
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पूर्व
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०४:३५ पूर्वाह्न, जून १८)→श्मशान
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
चन्द्र
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

१० शुभ३ अशुभ
०५:३० पूर्वाह्न – ०७:४१ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:४१ पूर्वाह्न – ०९:५७ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०९:५७ पूर्वाह्न – १२:०८ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:०८ अपराह्न – ०२:१८ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०२:१८ अपराह्न – ०४:३२ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:३२ अपराह्न – ०६:४८ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:४८ अपराह्न – ०८:५३ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:५३ अपराह्न – १०:४० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१०:४० अपराह्न – १२:१४ पूर्वाह्न, जून १८
शुभ पंचक
१२:१४ पूर्वाह्न – ०१:४५ पूर्वाह्न, जून १८
शुभ पंचक
०१:४५ पूर्वाह्न – ०३:२५ पूर्वाह्न, जून १८
शुभ पंचक
०३:२५ पूर्वाह्न – ०५:२४ पूर्वाह्न, जून १८
राज पंचक (राज्य लाभ)
०५:२४ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १८
चोर पंचक (हानि भय)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३० पूर्वाह्न – ०७:४१ पूर्वाह्न
०७:४१ पूर्वाह्न – ०९:५७ पूर्वाह्न
०९:५७ पूर्वाह्न – १२:०८ अपराह्न
१२:०८ अपराह्न – ०२:१८ अपराह्न
०२:१८ अपराह्न – ०४:३२ अपराह्न
०४:३२ अपराह्न – ०६:४८ अपराह्न
०६:४८ अपराह्न – ०८:५३ अपराह्न
०८:५३ अपराह्न – १०:४० अपराह्न
१०:४० अपराह्न – १२:१४ पूर्वाह्न, जून १८
१२:१४ पूर्वाह्न – ०१:४५ पूर्वाह्न, जून १८
०१:४५ पूर्वाह्न – ०३:२५ पूर्वाह्न, जून १८
०३:२५ पूर्वाह्न – ०५:२४ पूर्वाह्न, जून १८
०५:२४ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १८
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३१०८
लाहिरी अयनांश
२४.२३९७९१°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५७३
संशोधित जूलियन दिन
६१५७३
राता डाई (RD)
७४०१४९
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२७ ज्येष्ठ, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
४ जून, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

३ दैनिक व्रत एवं पर्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

इष्टि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला इष्टि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

इष्टि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

विंचुडो

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला विंचुडो का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

विंचुडो का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।