शुक्ल पक्ष तृतीया • ८% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २७ मई २०२८

३, ज्येष्ठशुक्ल पक्ष, तृतीया
२०८४ गुजराती संवत
२७
मई २०२८
शनिवार
पर्व एवं व्रत सूची:विनायक चतुर्थी∞योग:शूल✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय १०:०८ पूर्वाह्न
अगला: चतुर्थी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०१:१८ अपराह्न
अगला: पुनर्वसु

योग

समाप्ति समय ०९:३४ पूर्वाह्न
अगला: गण्ड

करण

समाप्ति समय १०:०८ पूर्वाह्न
अगला: वणिज

वार

शनिवार
वार (शनि)
ग्रह स्वामी: शनि

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३० पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५२ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३० पूर्वाह्न, मई २८ (अगला सूर्योदय)
तिथि
तृतीया (१०:०८ पूर्वाह्न)
चतुर्थी
नक्षत्र
आर्द्रा (समाप्ति समय ०१:१८ अपराह्न)
पुनर्वसु
योग
शूल (०९:३४ पूर्वाह्न)
गण्ड
करण
गरज (१०:०८ पूर्वाह्न)
वणिज (समाप्ति समय ०९:१७ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३० पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५२ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे २१ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०८:०० पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०९:५३ अपराह्न
चंद्र राशि: मिथुनरात्रिमान: १० घंटे ३७ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
तृतीयासमाप्ति समय १०:०८ पूर्वाह्न• अगला: चतुर्थी
शूलसमाप्ति समय ०९:३४ पूर्वाह्न• अगला: गण्ड
वार
शनिवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
आर्द्रासमाप्ति समय ०१:१८ अपराह्न• अगला: पुनर्वसु
करण
गरज(१०:०८ पूर्वाह्न)वणिज(०९:१७ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: रोहिणी (पद १)
चंद्र राशि
मिथुन(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ कर्क (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
आर्द्रा (पद ३)०७:३१ पूर्वाह्नआर्द्रा (पद ४)०१:१८ अपराह्नपुनर्वसु (पद १)०७:०३ अपराह्नपुनर्वसु (पद २)१२:४८ पूर्वाह्न, मई २८पुनर्वसु (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: ४१.९९°चन्द्र भोगांश: ७५.५१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८५ · शक १९५०
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९५०कीलक
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
१४(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुन्दुभीतक ०५:१६ pm, बुधवार, १२ अप्रैल २०२८
आगामी संवत्
रुधिरोद्गारी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०६ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२७ पूर्वाह्न – ०५:३१ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३९ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२६ अपराह्न – ०३:१९ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५३ अपराह्न – ०७:१४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५३ अपराह्न – ०७:५७ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०७:०६ पूर्वाह्न – ०८:३९ पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५१ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई २८
शुभ योग (८)२ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०८:५१ पूर्वाह्न – १०:३२ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    ०१:५२ अपराह्न – ०३:३२ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०५:३१ पूर्वाह्न – ०७:११ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०५:३१ पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:४७ पूर्वाह्न – ०२:१९ पूर्वाह्न, मई २८
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    ०९:१७ अपराह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई २८
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
० (नेत्रहीन - अशुभ/वर्ज्य)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय १०:०८ पूर्वाह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय १०:०८ पूर्वाह्न)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
पूर्व
होमाहुति
सूर्य
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
चन्द्र
मन्त्री
गुरू
सेनापति
बुध
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
सूर्य
धान्याधिपति (शीत धान्य)
शुक्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शनि
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
बुध
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
मंगल
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
सूर्य
फलाधिपति
बुध

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०५:३० पूर्वाह्न – ०६:४७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०६:४७ पूर्वाह्न – ०९:०० पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०९:०० पूर्वाह्न – ११:१६ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:१६ पूर्वाह्न – ०१:२७ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०१:२७ अपराह्न – ०३:३७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०३:३७ अपराह्न – ०५:५२ अपराह्न
शुभ पंचक
०५:५२ अपराह्न – ०८:०७ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:०७ अपराह्न – १०:१३ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:१३ अपराह्न – ११:५९ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
११:५९ अपराह्न – ०१:३३ पूर्वाह्न, मई २८
शुभ पंचक
०१:३३ पूर्वाह्न – ०३:०४ पूर्वाह्न, मई २८
चोर पंचक (हानि भय)
०३:०४ पूर्वाह्न – ०४:४४ पूर्वाह्न, मई २८
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:४४ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई २८
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३० पूर्वाह्न – ०६:४७ पूर्वाह्न
०६:४७ पूर्वाह्न – ०९:०० पूर्वाह्न
०९:०० पूर्वाह्न – ११:१६ पूर्वाह्न
११:१६ पूर्वाह्न – ०१:२७ अपराह्न
०१:२७ अपराह्न – ०३:३७ अपराह्न
०३:३७ अपराह्न – ०५:५२ अपराह्न
०५:५२ अपराह्न – ०८:०७ अपराह्न
०८:०७ अपराह्न – १०:१३ अपराह्न
१०:१३ अपराह्न – ११:५९ अपराह्न
११:५९ अपराह्न – ०१:३३ पूर्वाह्न, मई २८
०१:३३ पूर्वाह्न – ०३:०४ पूर्वाह्न, मई २८
०३:०४ पूर्वाह्न – ०४:४४ पूर्वाह्न, मई २८
०४:४४ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, मई २८
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२९
कलि अहर्गण
१८७३४५३
लाहिरी अयनांश
२४.२५२९७९°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१९१८
संशोधित जूलियन दिन
६१९१८
राता डाई (RD)
७४०४९४
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
६ ज्येष्ठ, १९५०
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९५०
जूलियन दिनांक
१४ मई, २०२८ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

विनायक चतुर्थी

प्रमुख पर्व

विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव एवं १० दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ।

पूज्य देवता
भगवान श्री गणेश
धार्मिक महत्व

समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
  • ✦२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
  • ✦प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
  • ✦अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।