कृष्ण पक्ष अष्टमी • ५५% प्रकाशतृतीय पाद (कृष्ण अष्टमी)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २३ सितंबर २०२७

२३, भाद्रपदकृष्ण पक्ष, अष्टमी
२०८३ गुजराती संवत
२३
सितंबर २०२७
गुरुवार
पर्व एवं व्रत सूची:कालाष्टमीमासिक श्री कृष्ण जन्माष्टमीAshtami ShraddhaJivitputrika VratMahalakshmi Vrat Endsचातुर्मास अवधि∞योग:व्यतीपातमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
अगला: नवमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न
अगला: आर्द्रा

योग

समाप्ति समय ११:३४ अपराह्न
अगला: वरीयान्

करण

समाप्ति समय ०३:५० अपराह्न
अगला: कौलव

वार

गुरुवार
वार (गुरू)
ग्रह स्वामी: गुरू

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०४ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:०९ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०४ पूर्वाह्न, सितम्बर २४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
अष्टमी (समाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४)
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा (समाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न)
आर्द्रा
योग
व्यतीपात (समाप्ति समय ११:३४ अपराह्न)
वरीयान्
करण
बालव (समाप्ति समय ०३:५० अपराह्न)
कौलव (समाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४)
तैतिल

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०४ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:०९ अपराह्न
सूर्य राशि: कन्यादिनमान: १२ घंटे ५ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:०६ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
११:३८ अपराह्न
चंद्रास्त
१२:४७ अपराह्न
चंद्र राशि: मिथुनरात्रिमान: ११ घंटे ५४ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
अष्टमीसमाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४• अगला: नवमी
व्यतीपातसमाप्ति समय ११:३४ अपराह्न• अगला: वरीयान्
वार
गुरुवार
मास (अमान्त)
भाद्रपद
मृगशिरासमाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न• अगला: आर्द्रा
करण
बालव(०३:५० अपराह्न)कौलव(०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४)तैतिल(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आश्विन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी (पद ३)
चंद्र राशि
मिथुन(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ कर्क (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
कन्या• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
मृगशिरा (पद ३)११:२० पूर्वाह्नमृगशिरा (पद ४)०५:०६ अपराह्नआर्द्रा (पद १)१०:५१ अपराह्नआर्द्रा (पद २)०४:३५ पूर्वाह्न, सितम्बर २४आर्द्रा (पद ३)जारी
सूर्य भोगांश: १५५.५३°चन्द्र भोगांश: ६०.३१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
७(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आश्विन(पूर्णिमांत)
भाद्रपद(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:२९ पूर्वाह्न – ०५:१६ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५३ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न
  • ११:४३ पूर्वाह्न – १२:३१ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:०८ अपराह्न – ०२:५६ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:१० अपराह्न – ०६:३४ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:१० अपराह्न – ०७:२१ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०२:४७ अपराह्न – ०४:२० अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४३ अपराह्न – १२:३१ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
शुभ योग (८)० सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०१:३८ अपराह्न – ०३:०८ अपराह्न
  • यमगंड
    ०६:०४ पूर्वाह्न – ०७:३५ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    ०९:०६ पूर्वाह्न – १०:३६ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १०:०६ पूर्वाह्न – १०:५४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०१:०६ पूर्वाह्न – ०२:३७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०५:०६ अपराह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
अशुभ योग (९)४ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

वर्षा ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
वर्षा ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
वर्षा ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
दक्षिण(सरसों खाकर यात्रा करें)
शिववास
गौरी (गौरी के साथ)(समाप्ति समय ०२:५७ पूर्वाह्न, सितम्बर २४)→सभा (शुभ फलदायी)
राहु वास
दक्षिण
होमाहुति
गुरु
कुम्भ चक्र
दक्षिण
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०६:०४ पूर्वाह्न – ०७:५३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:५३ पूर्वाह्न – १०:०८ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:०८ पूर्वाह्न – १२:२३ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१२:२३ अपराह्न – ०२:२९ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०२:२९ अपराह्न – ०४:१५ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:१५ अपराह्न – ०५:४९ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०५:४९ अपराह्न – ०७:२० अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०७:२० अपराह्न – ०९:०० अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०९:०० अपराह्न – १०:५९ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:५९ अपराह्न – ०१:१२ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०१:१२ पूर्वाह्न – ०३:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
शुभ पंचक
०३:२८ पूर्वाह्न – ०५:३९ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
शुभ पंचक
०५:३९ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
चोर पंचक (हानि भय)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०४ पूर्वाह्न – ०७:५३ पूर्वाह्न
०७:५३ पूर्वाह्न – १०:०८ पूर्वाह्न
१०:०८ पूर्वाह्न – १२:२३ अपराह्न
१२:२३ अपराह्न – ०२:२९ अपराह्न
०२:२९ अपराह्न – ०४:१५ अपराह्न
०४:१५ अपराह्न – ०५:४९ अपराह्न
०५:४९ अपराह्न – ०७:२० अपराह्न
०७:२० अपराह्न – ०९:०० अपराह्न
०९:०० अपराह्न – १०:५९ अपराह्न
१०:५९ अपराह्न – ०१:१२ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
०१:१२ पूर्वाह्न – ०३:२८ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
०३:२८ पूर्वाह्न – ०५:३९ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
०५:३९ पूर्वाह्न – ०६:०४ पूर्वाह्न, सितम्बर २४
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३२०६
लाहिरी अयनांश
२४.२४३५३८°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१६७१
संशोधित जूलियन दिन
६१६७१
राता डाई (RD)
७४०२४७
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
१ आश्विन, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१० सितंबर, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

६ दैनिक व्रत एवं पर्व

कालाष्टमी

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला कालाष्टमी का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

कालाष्टमी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

मासिक श्री कृष्ण जन्माष्टमी

प्रमुख पर्व

कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण को समर्पित मासिक उपवास एवं पूजन।

पूज्य देवता
भगवान श्री कृष्ण (बाल गोपाल)
धार्मिक महत्व

श्रीकृष्ण भक्ति, आत्मिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦Midnight Janmotsav Aarti at 12:00 AM with conch and bell chimes.
  • ✦Panchamrit Abhisheka with 108 Shaligram or Laddu Gopal darshan.
  • ✦Rocking Bal Gopal in decorated cradles (Jhula Darshan).

अष्टमी श्राद्ध

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ashtami Shraddha का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ashtami Shraddha का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Jivitputrika व्रत

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Jivitputrika Vrat का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Jivitputrika Vrat का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Mahalakshmi व्रत समाप्त

प्रमुख पर्व

साहस, विजय, पारिवारिक कल्याण और माँ जगदम्बा की असीम कृपा प्राप्ति हेतु समर्पित Mahalakshmi Vrat Ends का पावन शक्ति व्रत।

पूज्य देवता
माँ भगवती आद्यशक्ति दुर्गा (जगदम्बा / भवानी)
धार्मिक महत्व

Mahalakshmi Vrat Ends का आध्यात्मिक महत्व: १. संकट नाश: भय, रोग और दुष्ट शक्तियों का दमन होता है। २. शक्ति एवं सामर्थ्य: आत्मविश्वास, ओज और तेज की वृद्धि होती है। ३. सुख-समृद्धि: परिवार में सुख, आरोग्य और शांति का विस्तार होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और माँ दुर्गा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦माँ को रोली, अक्षत, सिन्दूर, लाल अड़हुल (गुड़हल) के फूल और लाल चुनरी अर्पित करें।
  • ✦दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  • ✦हलवा, पूरी, चना, मखाने की खीर और ऋतुफल का भोग लगाएं।
  • ✦संध्या समय कपूर से माँ दुर्गा की भव्य आरती करें।
  • ✦सात्विक प्रसाद ग्रहण कर व्रत संपन्न करें।

चातुर्मास अवधि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चातुर्मास अवधि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

चातुर्मास अवधि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।