कृष्ण पक्ष षष्ठी • ७१% प्रकाशकृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २५ जून २०२७

२१, ज्येष्ठकृष्ण पक्ष, षष्ठी
२०८३ गुजराती संवत
२५
जून २०२७
शुक्रवार
∞योग:प्रीति✦रवि योगसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न
अगला: सप्तमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न
अगला: पूर्वाभाद्रपद

योग

समाप्ति समय ११:५५ पूर्वाह्न
अगला: आयुष्मान्

करण

समाप्ति समय ०७:१७ पूर्वाह्न
अगला: वणिज

वार

शुक्रवार
वार (शुक्र)
ग्रह स्वामी: शुक्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००७:०२ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३२ पूर्वाह्न, जून २६ (अगला सूर्योदय)
तिथि
षष्ठी (समाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न)
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा (समाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न)
पूर्वाभाद्रपद
योग
प्रीति (समाप्ति समय ११:५५ पूर्वाह्न)
आयुष्मान्
करण
गरज
वणिज (समाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०७:०२ अपराह्न
सूर्य राशि: मिथुनदिनमान: १३ घंटे ३० मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१७ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
११:१२ अपराह्न
चंद्रास्त
१०:३८ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: कुंभरात्रिमान: १० घंटे ३० मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
षष्ठीसमाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न• अगला: सप्तमी
प्रीतिसमाप्ति समय ११:५५ पूर्वाह्न• अगला: आयुष्मान्
वार
शुक्रवार
मास (अमान्त)
ज्येष्ठ
शतभिषासमाप्ति समय ०५:०६ अपराह्न• अगला: पूर्वाभाद्रपद
करण
गरज(०७:१७ पूर्वाह्न)वणिज(०८:१७ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आषाढ़

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: आर्द्रा (पद १)
चंद्र राशि
कुंभ(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मीन (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मिथुन• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
शतभिषा (पद ३)१०:२७ पूर्वाह्नशतभिषा (पद ४)०५:०६ अपराह्नपूर्वाभाद्रपद (पद १)११:४३ अपराह्नपूर्वाभाद्रपद (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ६९.०१°चन्द्र भोगांश: ३१४.२१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८४ · शक १९४९
विक्रम संवत्
२०८४रौद्र
शक संवत्
गुजराती संवत्
प्रविष्टे / गते
११(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
दुर्मतितक ०४:२९ pm, शनिवार, १७ अप्रैल २०२७
आगामी संवत्
दुन्दुभी(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आषाढ़(पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०८ पूर्वाह्न – ०४:५० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२९ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न
  • ११:५० पूर्वाह्न – १२:४४ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३२ अपराह्न – ०३:२६ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०७:०२ अपराह्न – ०७:२३ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०७:०२ अपराह्न – ०८:०५ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:४५ पूर्वाह्न – ०१:३२ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५६ अपराह्न – १२:३८ पूर्वाह्न, जून २६
शुभ योग (८)२ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)९ सक्रिय
  • १०:३६ पूर्वाह्न – १२:१७ अपराह्न
  • यमगंड
    ०३:४० अपराह्न – ०५:२१ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०७:१३ पूर्वाह्न – ०८:५५ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:१४ पूर्वाह्न – ०९:०८ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    १२:०६ पूर्वाह्न – ०१:५१ पूर्वाह्न, जून २६
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    ०८:१७ अपराह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    पूरा दिन
  • ०५:०६ अपराह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
० (निर्जीव - अशुभ/वर्ज्य)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: अशुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
पश्चिम(जौ खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०८:१७ अपराह्न)→श्मशान
राहु वास
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
होमाहुति
गुरु
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
अशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
बुध
मन्त्री
बुध
सेनापति
मंगल
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
शनि
धान्याधिपति (शीत धान्य)
गुरू
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
शुक्र
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
मंगल
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
सूर्य
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
शुक्र
फलाधिपति
मंगल

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

८ शुभ५ अशुभ
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:१० पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:१० पूर्वाह्न – ०९:२५ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०९:२५ पूर्वाह्न – ११:३७ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
११:३७ पूर्वाह्न – ०१:४७ अपराह्न
शुभ पंचक
०१:४७ अपराह्न – ०४:०१ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:०१ अपराह्न – ०६:१७ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:१७ अपराह्न – ०८:२२ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:२२ अपराह्न – १०:०९ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:०९ अपराह्न – ११:४२ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
११:४२ अपराह्न – ०१:१४ पूर्वाह्न, जून २६
शुभ पंचक
०१:१४ पूर्वाह्न – ०२:५४ पूर्वाह्न, जून २६
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:५४ पूर्वाह्न – ०४:५३ पूर्वाह्न, जून २६
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:५३ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:१० पूर्वाह्न
०७:१० पूर्वाह्न – ०९:२५ पूर्वाह्न
०९:२५ पूर्वाह्न – ११:३७ पूर्वाह्न
११:३७ पूर्वाह्न – ०१:४७ अपराह्न
०१:४७ अपराह्न – ०४:०१ अपराह्न
०४:०१ अपराह्न – ०६:१७ अपराह्न
०६:१७ अपराह्न – ०८:२२ अपराह्न
०८:२२ अपराह्न – १०:०९ अपराह्न
१०:०९ अपराह्न – ११:४२ अपराह्न
११:४२ अपराह्न – ०१:१४ पूर्वाह्न, जून २६
०१:१४ पूर्वाह्न – ०२:५४ पूर्वाह्न, जून २६
०२:५४ पूर्वाह्न – ०४:५३ पूर्वाह्न, जून २६
०४:५३ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, जून २६
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२८
कलि अहर्गण
१८७३११६
लाहिरी अयनांश
२४.२४००९७°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१५८१
संशोधित जूलियन दिन
६१५८१
राता डाई (RD)
७४०१५७
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
४ आषाढ़, १९४९
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४९
जूलियन दिनांक
१२ जून, २०२७ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।