कृष्ण पक्ष त्रयोदशी • ७% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १३ जून २०२६

२८, AdhikJyesthaकृष्ण पक्ष, त्रयोदशी
२०८२ गुजराती संवत
१३
जून २०२६
शनिवार
पर्व एवं व्रत सूची:शनि त्रयोदशीशनि प्रदोष व्रतRavi YogaVidaal Yoga∞योग:सुकर्मा✦सर्वार्थ सिद्धि✦अमृत सिद्धिसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न
अगला: चतुर्दशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०१:१६ पूर्वाह्न, जून १४
अगला: रोहिणी

योग

समाप्ति समय ०५:२८ अपराह्न
अगला: धृति

करण

समाप्ति समय ०५:५५ पूर्वाह्न
अगला: वणिज

वार

शनिवार
वार (शनि)
ग्रह स्वामी: शनि

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३० पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:५९ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३० पूर्वाह्न, जून १४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
त्रयोदशी (समाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न)
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका (समाप्ति समय ०१:१६ पूर्वाह्न, जून १४)
रोहिणी
योग
सुकर्मा (समाप्ति समय ०५:२८ अपराह्न)
धृति
करण
वणिज (समाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३० पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:५९ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे २९ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:१४ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०४:११ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०५:१३ अपराह्न
चंद्र राशि: मेषरात्रिमान: १० घंटे ३० मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
त्रयोदशीसमाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न• अगला: चतुर्दशी
सुकर्मासमाप्ति समय ०५:२८ अपराह्न• अगला: धृति
वार
शनिवार
मास (अमान्त)
Adhika Jyeshtha
कृत्तिकासमाप्ति समय ०१:१६ पूर्वाह्न, जून १४• अगला: रोहिणी
करण
गरज(०५:५५ पूर्वाह्न)वणिज(०४:०८ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(०२:१५ पूर्वाह्न, जून १४)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
Adhika Ashadha

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: मृगशिरा (पद २)
चंद्र राशि
मेष(०९:२५ पूर्वाह्न तक)→ वृषभ (०९:२५ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
कृत्तिका (पद १)०९:२५ पूर्वाह्नकृत्तिका (पद २)०२:४३ अपराह्नकृत्तिका (पद ३)०८:०० अपराह्नकृत्तिका (पद ४)०१:१६ पूर्वाह्न, जून १४रोहिणी (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: ५७.८°चन्द्र भोगांश: २७.५५°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
३०(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
Adhika Ashadha(पूर्णिमांत)
Adhika Jyeshtha(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०६ पूर्वाह्न – ०४:४८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२७ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न
  • ११:४८ पूर्वाह्न – १२:४२ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:३० अपराह्न – ०३:२४ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५९ अपराह्न – ०७:२० अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५९ अपराह्न – ०८:०२ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०५:३० अपराह्न – ०६:५५ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५४ अपराह्न – १२:३६ पूर्वाह्न, जून १४
शुभ योग (८)३ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०८:५२ पूर्वाह्न – १०:३४ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    ०१:५६ अपराह्न – ०३:३७ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०५:३० पूर्वाह्न – ०७:११ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०५:३० पूर्वाह्न – ०६:२४ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०२:४१ अपराह्न – ०४:०५ अपराह्न
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    ०४:०८ अपराह्न – ०२:१५ पूर्वाह्न, जून १४
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०१:१६ पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १४
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
० (नेत्रहीन - अशुभ/वर्ज्य)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पूर्व(०९:२५ पूर्वाह्न तक)→दक्षिण
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०४:०८ अपराह्न)→श्मशान
राहु वास
पूर्व
होमाहुति
केतु
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

१० शुभ३ अशुभ
०५:३० पूर्वाह्न – ०५:४३ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०५:४३ पूर्वाह्न – ०७:५६ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:५६ पूर्वाह्न – १०:१२ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१०:१२ पूर्वाह्न – १२:२३ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:२३ अपराह्न – ०२:३३ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०२:३३ अपराह्न – ०४:४७ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:४७ अपराह्न – ०७:०३ अपराह्न
शुभ पंचक
०७:०३ अपराह्न – ०९:०९ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:०९ अपराह्न – १०:५५ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:५५ अपराह्न – १२:२९ पूर्वाह्न, जून १४
शुभ पंचक
१२:२९ पूर्वाह्न – ०२:०० पूर्वाह्न, जून १४
शुभ पंचक
०२:०० पूर्वाह्न – ०३:४० पूर्वाह्न, जून १४
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०३:४० पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १४
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३० पूर्वाह्न – ०५:४३ पूर्वाह्न
०५:४३ पूर्वाह्न – ०७:५६ पूर्वाह्न
०७:५६ पूर्वाह्न – १०:१२ पूर्वाह्न
१०:१२ पूर्वाह्न – १२:२३ अपराह्न
१२:२३ अपराह्न – ०२:३३ अपराह्न
०२:३३ अपराह्न – ०४:४७ अपराह्न
०४:४७ अपराह्न – ०७:०३ अपराह्न
०७:०३ अपराह्न – ०९:०९ अपराह्न
०९:०९ अपराह्न – १०:५५ अपराह्न
१०:५५ अपराह्न – १२:२९ पूर्वाह्न, जून १४
१२:२९ पूर्वाह्न – ०२:०० पूर्वाह्न, जून १४
०२:०० पूर्वाह्न – ०३:४० पूर्वाह्न, जून १४
०३:४० पूर्वाह्न – ०५:३० पूर्वाह्न, जून १४
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अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७३९
लाहिरी अयनांश
२४.२२५६८६°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६१२०४
संशोधित जूलियन दिन
६१२०४
राता डाई (RD)
७३९७८०
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२३ ज्येष्ठ, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
३१ मई, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

शनि त्रयोदशी

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला शनि त्रयोदशी का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

शनि त्रयोदशी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

शनि प्रदोष व्रत

प्रमुख पर्व

समस्त पापों के शमन, आत्मिक शांति, मोक्ष और भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा हेतु समर्पित शनि प्रदोष व्रत का परम पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान शिव (देवाधिदेव महादेव / भोलेनाथ)
धार्मिक महत्व

शनि प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप-ताप निवारण: संचित कर्मों और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है। २. आत्मिक शांति: चित्त शांत होता है और ध्यान-साधना में अभूतपूर्व प्रगति होती है। ३. मोक्ष एवं आरोग्य: भोलेनाथ की कृपा से दीर्घायु, स्वास्थ्य और अंततः शिवलोक की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • ✦शिवलिंग पर कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शर्करा (पंचामृत) और शुद्ध गंगाजल से अभिषेक करें।
  • ✦त्रिदल बेलपत्र, धतूरा, श्वेत मदार, भस्म और चंदन अर्पित करें।
  • ✦"ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का १०८ बार या अनवरत जप करें।
  • ✦सायंकाल (प्रदोष काल) में दीपक प्रज्वलित कर शिव चालीसा व आरती करें।
  • ✦अगली सुबह सूर्योदय के पश्चात पूजा कर सात्विक पारण करें।

रवि योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ravi Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ravi Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Vidaal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Vidaal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Vidaal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।