शुक्ल पक्ष द्वितीया • २% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १८ मई २०२६

२, AdhikJyesthaशुक्ल पक्ष, द्वितीया
२०८२ गुजराती संवत
१८
मई २०२६
सोमवार
∞योग:सुकर्मा✦सर्वार्थ सिद्धि✦अमृत सिद्धिअमृत योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न
अगला: तृतीया

नक्षत्र

समाप्ति समय ११:३१ पूर्वाह्न
अगला: मृगशिरा

योग

समाप्ति समय ०९:४७ अपराह्न
अगला: धृति

करण

समाप्ति समय ०७:४६ पूर्वाह्न
अगला: कौलव

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३३ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४८ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३३ पूर्वाह्न, मई १९ (अगला सूर्योदय)
तिथि
द्वितीया (समाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न)
तृतीया
नक्षत्र
रोहिणी (समाप्ति समय ११:३१ पूर्वाह्न)
मृगशिरा
योग
सुकर्मा (समाप्ति समय ०९:४७ अपराह्न)
धृति
करण
बालव (०७:४६ पूर्वाह्न)
कौलव (समाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न)
तैतिल

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३३ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४८ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे १४ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०६:३१ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०८:४९ अपराह्न
चंद्र राशि: वृषभरात्रिमान: १० घंटे ४४ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
द्वितीयासमाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न• अगला: तृतीया
सुकर्मासमाप्ति समय ०९:४७ अपराह्न• अगला: धृति
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
Adhika Jyeshtha
रोहिणीसमाप्ति समय ११:३१ पूर्वाह्न• अगला: मृगशिरा
करण
बालव(०७:४६ पूर्वाह्न)कौलव(०५:५३ अपराह्न)तैतिल(०४:०३ पूर्वाह्न, मई १९)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
Adhika Jyeshtha

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: कृत्तिका (पद २)
चंद्र राशि
वृषभ(१०:०४ अपराह्न तक)→ मिथुन (१०:०४ अपराह्न से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
रोहिणी (पद ३)०६:१६ पूर्वाह्नरोहिणी (पद ४)११:३१ पूर्वाह्नमृगशिरा (पद १)०४:४७ अपराह्नमृगशिरा (पद २)१०:०४ अपराह्नमृगशिरा (पद ३)०३:२२ पूर्वाह्न, मई १९मृगशिरा (पद ४)जारी
सूर्य भोगांश: ३२.८६°चन्द्र भोगांश: ४९.५५°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
४(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
Adhika Jyeshtha(पूर्णिमांत)
Adhika Jyeshtha(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१२ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०८ पूर्वाह्न – ०४:५१ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२९ पूर्वाह्न – ०५:३४ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३८ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:१७ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:४९ अपराह्न – ०७:१० अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:४९ अपराह्न – ०७:५३ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०८:४३ पूर्वाह्न – १०:०७ पूर्वाह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४९ अपराह्न – १२:३२ पूर्वाह्न, मई १९
शुभ योग (८)४ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०७:१३ पूर्वाह्न – ०८:५२ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    १०:३२ पूर्वाह्न – १२:११ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:५१ अपराह्न – ०३:३० अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:३८ अपराह्न – ०१:३१ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०४:२८ अपराह्न – ०५:५२ अपराह्न
  • बाण दोष
    नृप
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०५:३३ पूर्वाह्न – ११:३१ पूर्वाह्न
अशुभ योग (९)१ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

ग्रीष्म ऋतु
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
नेत्रम्
० (नेत्रहीन - अशुभ/वर्ज्य)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
ग्रीष्म ऋतु
जीव
० (निर्जीव - अशुभ/वर्ज्य)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(१०:०४ अपराह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
गौरी (गौरी के साथ)(समाप्ति समय ०५:५३ अपराह्न)→सभा (शुभ फलदायी)
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
सूर्य
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०५:३३ पूर्वाह्न – ०७:२४ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०७:२४ पूर्वाह्न – ०९:३८ पूर्वाह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०९:३८ पूर्वाह्न – ११:५३ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
११:५३ पूर्वाह्न – ०२:०५ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:०५ अपराह्न – ०४:१५ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०४:१५ अपराह्न – ०६:२९ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:२९ अपराह्न – ०८:४५ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०८:४५ अपराह्न – १०:५० अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१०:५० अपराह्न – १२:३७ पूर्वाह्न, मई १९
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१२:३७ पूर्वाह्न – ०२:१० पूर्वाह्न, मई १९
राज पंचक (राज्य लाभ)
०२:१० पूर्वाह्न – ०३:४१ पूर्वाह्न, मई १९
शुभ पंचक
०३:४१ पूर्वाह्न – ०५:२२ पूर्वाह्न, मई १९
शुभ पंचक
०५:२२ पूर्वाह्न – ०५:३३ पूर्वाह्न, मई १९
राज पंचक (राज्य लाभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३३ पूर्वाह्न – ०७:२४ पूर्वाह्न
०७:२४ पूर्वाह्न – ०९:३८ पूर्वाह्न
०९:३८ पूर्वाह्न – ११:५३ पूर्वाह्न
११:५३ पूर्वाह्न – ०२:०५ अपराह्न
०२:०५ अपराह्न – ०४:१५ अपराह्न
०४:१५ अपराह्न – ०६:२९ अपराह्न
०६:२९ अपराह्न – ०८:४५ अपराह्न
०८:४५ अपराह्न – १०:५० अपराह्न
१०:५० अपराह्न – १२:३७ पूर्वाह्न, मई १९
१२:३७ पूर्वाह्न – ०२:१० पूर्वाह्न, मई १९
०२:१० पूर्वाह्न – ०३:४१ पूर्वाह्न, मई १९
०३:४१ पूर्वाह्न – ०५:२२ पूर्वाह्न, मई १९
०५:२२ पूर्वाह्न – ०५:३३ पूर्वाह्न, मई १९
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७१३
लाहिरी अयनांश
२४.२२४६९२°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११७८
संशोधित जूलियन दिन
६११७८
राता डाई (RD)
७३९७५४
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२८ वैशाख, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
५ मई, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।