कृष्ण पक्ष एकादशी • १९% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १३ मई २०२६

२६, वैशाखकृष्ण पक्ष, एकादशी
२०८२ गुजराती संवत
१३
मई २०२६
बुधवार
पर्व एवं व्रत सूची:Vaishakha Ekadashi∞योग:विष्कम्भसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न
अगला: द्वादशी

नक्षत्र

समाप्ति समय १२:१७ पूर्वाह्न, मई १४
अगला: रेवती

योग

समाप्ति समय ०८:५४ अपराह्न
अगला: प्रीति

करण

समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न
अगला: कौलव

वार

बुधवार
वार (बुध)
ग्रह स्वामी: बुध

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३५ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४६ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३५ पूर्वाह्न, मई १४ (अगला सूर्योदय)
तिथि
एकादशी (समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न)
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तराभाद्रपद (समाप्ति समय १२:१७ पूर्वाह्न, मई १४)
रेवती
योग
विष्कम्भ (समाप्ति समय ०८:५४ अपराह्न)
प्रीति
करण
बालव (समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न)
कौलव (समाप्ति समय १२:३१ पूर्वाह्न, मई १४)
तैतिल

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३५ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४६ अपराह्न
सूर्य राशि: मेषदिनमान: १३ घंटे १० मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०३:१६ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०३:१२ अपराह्न
चंद्र राशि: मीनरात्रिमान: १० घंटे ४९ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
एकादशीसमाप्ति समय ०१:३० अपराह्न• अगला: द्वादशी
विष्कम्भसमाप्ति समय ०८:५४ अपराह्न• अगला: प्रीति
वार
बुधवार
मास (अमान्त)
वैशाख
उत्तराभाद्रपदसमाप्ति समय १२:१७ पूर्वाह्न, मई १४• अगला: रेवती
करण
बालव(०१:३० अपराह्न)कौलव(१२:३१ पूर्वाह्न, मई १४)तैतिल(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: कृत्तिका (पद १)
चंद्र राशि
मीन(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मेष (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मेष• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
उत्तराभाद्रपद (पद १)०७:०६ पूर्वाह्नउत्तराभाद्रपद (पद २)१२:५३ अपराह्नउत्तराभाद्रपद (पद ३)०६:३६ अपराह्नउत्तराभाद्रपद (पद ४)१२:१७ पूर्वाह्न, मई १४रेवती (पद १)जारीरेवती (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: २८.०४°चन्द्र भोगांश: ३३५.८°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
३०(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त८ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)७ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०९ पूर्वाह्न – ०४:५३ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३१ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न
  • कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२३ अपराह्न – ०३:१६ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:४६ अपराह्न – ०७:०८ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:४६ अपराह्न – ०७:५१ अपराह्न
  • अमृत काल
    ०५:२३ अपराह्न – ०६:५५ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४९ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई १४
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल७ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • १२:११ अपराह्न – ०१:५० अपराह्न
  • यमगंड
    ०७:१५ पूर्वाह्न – ०८:५४ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १०:३२ पूर्वाह्न – १२:११ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३७ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    १०:२९ पूर्वाह्न – १२:०१ अपराह्न
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    पूरा दिन
  • कोई नहीं
अशुभ योग (९)० सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: अशुभ
चन्द्र निवास
उत्तर(सम्पूर्ण रात्रि तक)→पूर्व
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
कैलाश (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०१:३० अपराह्न)→नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)
राहु वास
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)
होमाहुति
राहु
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
अशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

९ शुभ४ अशुभ
०५:३५ पूर्वाह्न – ०५:४५ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०५:४५ पूर्वाह्न – ०७:४४ पूर्वाह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०७:४४ पूर्वाह्न – ०९:५७ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०९:५७ पूर्वाह्न – १२:१३ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
१२:१३ अपराह्न – ०२:२४ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:२४ अपराह्न – ०४:३४ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:३४ अपराह्न – ०६:४८ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०६:४८ अपराह्न – ०९:०४ अपराह्न
शुभ पंचक
०९:०४ अपराह्न – ११:१० अपराह्न
शुभ पंचक
११:१० अपराह्न – १२:५६ पूर्वाह्न, मई १४
शुभ पंचक
१२:५६ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, मई १४
शुभ पंचक
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:०१ पूर्वाह्न, मई १४
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०४:०१ पूर्वाह्न – ०५:३५ पूर्वाह्न, मई १४
चोर पंचक (हानि भय)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३५ पूर्वाह्न – ०५:४५ पूर्वाह्न
०५:४५ पूर्वाह्न – ०७:४४ पूर्वाह्न
०७:४४ पूर्वाह्न – ०९:५७ पूर्वाह्न
०९:५७ पूर्वाह्न – १२:१३ अपराह्न
१२:१३ अपराह्न – ०२:२४ अपराह्न
०२:२४ अपराह्न – ०४:३४ अपराह्न
०४:३४ अपराह्न – ०६:४८ अपराह्न
०६:४८ अपराह्न – ०९:०४ अपराह्न
०९:०४ अपराह्न – ११:१० अपराह्न
११:१० अपराह्न – १२:५६ पूर्वाह्न, मई १४
१२:५६ पूर्वाह्न – ०२:३० पूर्वाह्न, मई १४
०२:३० पूर्वाह्न – ०४:०१ पूर्वाह्न, मई १४
०४:०१ पूर्वाह्न – ०५:३५ पूर्वाह्न, मई १४
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७०८
लाहिरी अयनांश
२४.२२४५०१°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११७३
संशोधित जूलियन दिन
६११७३
राता डाई (RD)
७३९७४९
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२३ वैशाख, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
३० अप्रैल, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

वैशाख एकादशी

एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित Vaishakha Ekadashi का पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
धार्मिक महत्व

Vaishakha Ekadashi का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • ✦भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।
  • ✦विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।
  • ✦रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।
  • ✦द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।