कृष्ण पक्ष नवमी • ३९% प्रकाशकृष्ण पक्ष (अर्धचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, ११ मई २०२६

२४, वैशाखकृष्ण पक्ष, नवमी
२०८२ गुजराती संवत
११
मई २०२६
सोमवार
∞योग:इन्द्रसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न
अगला: दशमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०१:२८ पूर्वाह्न, मई १२
अगला: पूर्वाभाद्रपद

योग

समाप्ति समय ०१:०३ पूर्वाह्न, मई १२
अगला: वैधृति

करण

समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न
अगला: वणिज

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३६ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४५ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३६ पूर्वाह्न, मई १२ (अगला सूर्योदय)
तिथि
नवमी (समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न)
दशमी
नक्षत्र
शतभिषा (समाप्ति समय ०१:२८ पूर्वाह्न, मई १२)
पूर्वाभाद्रपद
योग
इन्द्र (समाप्ति समय ०१:०३ पूर्वाह्न, मई १२)
वैधृति
करण
गरज (समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न)
वणिज (समाप्ति समय ०३:१५ पूर्वाह्न, मई १२)
विष्टि (भद्रा)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३६ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४५ अपराह्न
सूर्य राशि: मेषदिनमान: १३ घंटे ८ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०२:०७ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
०१:१९ अपराह्न
चंद्र राशि: कुंभरात्रिमान: १० घंटे ५१ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
नवमीसमाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न• अगला: दशमी
इन्द्रसमाप्ति समय ०१:०३ पूर्वाह्न, मई १२• अगला: वैधृति
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
वैशाख
शतभिषासमाप्ति समय ०१:२८ पूर्वाह्न, मई १२• अगला: पूर्वाभाद्रपद
करण
गरज(०३:२४ अपराह्न)वणिज(०३:१५ पूर्वाह्न, मई १२)विष्टि (भद्रा)(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: भरणी (पद ४)
चंद्र राशि
कुंभ(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मीन (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
मेष• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
भरणीपद ४
नक्षत्र पद
शतभिषा (पद १)०७:०४ पूर्वाह्नशतभिषा (पद २)०१:१५ अपराह्नशतभिषा (पद ३)०७:२३ अपराह्नशतभिषा (पद ४)०१:२८ पूर्वाह्न, मई १२पूर्वाभाद्रपद (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: २६.११°चन्द्र भोगांश: ३०९.२२°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८३ · शक १९४८
विक्रम संवत्
शक संवत्
१९४८पराभव
गुजराती संवत्
२०८२पिंगल
प्रविष्टे / गते
२८(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
रौद्रतक ०३:४२ pm, मंगलवार, २१ अप्रैल २०२६
आगामी संवत्
दुर्मति(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१० पूर्वाह्न – ०४:५३ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३२ पूर्वाह्न – ०५:३७ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३७ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२३ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:४५ अपराह्न – ०७:०७ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:४५ अपराह्न – ०७:५० अपराह्न
  • अमृत काल
    ०८:३२ अपराह्न – १०:११ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४९ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई १२
शुभ योग (८)१ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)९ सक्रिय
  • ०७:१५ पूर्वाह्न – ०८:५४ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    १०:३३ पूर्वाह्न – १२:११ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:५० अपराह्न – ०३:२८ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:३७ अपराह्न – ०१:३० अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०८:१३ पूर्वाह्न – ०९:५२ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    ०३:१५ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई १२
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    पूरा दिन
  • ०७:२७ अपराह्न – ०१:२८ पूर्वाह्न, मई १२
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: अशुभ
चन्द्र निवास
पश्चिम(सम्पूर्ण रात्रि तक)→उत्तर
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
सभा (शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०३:२४ अपराह्न)→क्रीड़ा (खेलते हुए)
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
राहु
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
अशुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
गुरू
मन्त्री
मंगल
सेनापति
चन्द्र
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
गुरू
धान्याधिपति (शीत धान्य)
बुध
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
गुरू
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
चन्द्र
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शनि
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
गुरू
फलाधिपति
चन्द्र

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

५ शुभ८ अशुभ
०५:३६ पूर्वाह्न – ०५:५३ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०५:५३ पूर्वाह्न – ०७:५२ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:५२ पूर्वाह्न – १०:०५ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
१०:०५ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
शुभ पंचक
१२:२१ अपराह्न – ०२:३२ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:३२ अपराह्न – ०४:४२ अपराह्न
शुभ पंचक
०४:४२ अपराह्न – ०६:५६ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०६:५६ अपराह्न – ०९:१२ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०९:१२ अपराह्न – ११:१७ अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
११:१७ अपराह्न – ०१:०४ पूर्वाह्न, मई १२
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०१:०४ पूर्वाह्न – ०२:३८ पूर्वाह्न, मई १२
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:३८ पूर्वाह्न – ०४:०९ पूर्वाह्न, मई १२
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०४:०९ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई १२
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३६ पूर्वाह्न – ०५:५३ पूर्वाह्न
०५:५३ पूर्वाह्न – ०७:५२ पूर्वाह्न
०७:५२ पूर्वाह्न – १०:०५ पूर्वाह्न
१०:०५ पूर्वाह्न – १२:२१ अपराह्न
१२:२१ अपराह्न – ०२:३२ अपराह्न
०२:३२ अपराह्न – ०४:४२ अपराह्न
०४:४२ अपराह्न – ०६:५६ अपराह्न
०६:५६ अपराह्न – ०९:१२ अपराह्न
०९:१२ अपराह्न – ११:१७ अपराह्न
११:१७ अपराह्न – ०१:०४ पूर्वाह्न, मई १२
०१:०४ पूर्वाह्न – ०२:३८ पूर्वाह्न, मई १२
०२:३८ पूर्वाह्न – ०४:०९ पूर्वाह्न, मई १२
०४:०९ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई १२
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२७
कलि अहर्गण
१८७२७०६
लाहिरी अयनांश
२४.२२४४२४°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६११७१
संशोधित जूलियन दिन
६११७१
राता डाई (RD)
७३९७४७
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२१ वैशाख, १९४८
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४८
जूलियन दिनांक
२८ अप्रैल, २०२६ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

नित्य पूजा एवं दैनिक धार्मिक नियम

प्रातः संध्यावंदन, सूर्य अर्घ्य एवं कुलदेवता की नित्य अर्चना करें। आज की तिथि के अनुसार दान एवं सत्कर्म फलदायी हैं।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।