शुक्ल पक्ष सप्तमी • ४१% प्रकाशशुक्ल पक्ष (बालचन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २९ सितंबर २०२५

७, आश्विनशुक्ल पक्ष, सप्तमी
२०८१ गुजराती संवत
२९
सितंबर २०२५
सोमवार
पर्व एवं व्रत सूची:चातुर्मास अवधि∞योग:सौभाग्यसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न
अगला: अष्टमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०६:१७ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
अगला: पूर्वाषाढ़ा

योग

समाप्ति समय १२:५९ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
अगला: शोभन

करण

समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न
अगला: विष्टि (भद्रा)

वार

सोमवार
वार (चन्द्र)
ग्रह स्वामी: चन्द्र

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०६:०६ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:०३ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००६:०६ पूर्वाह्न, सितम्बर ३० (अगला सूर्योदय)
तिथि
सप्तमी (समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न)
अष्टमी
नक्षत्र
मूल
योग
सौभाग्य (समाप्ति समय १२:५९ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०)
शोभन
करण
वणिज (समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न)
विष्टि (भद्रा) (समाप्ति समय ०५:२३ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०)

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०६:०६ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:०३ अपराह्न
सूर्य राशि: कन्यादिनमान: ११ घंटे ५७ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:०४ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
१२:२७ अपराह्न
चंद्रास्त
११:०४ अपराह्न
चंद्र राशि: धनुरात्रिमान: १२ घंटे २ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
सप्तमीसमाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न• अगला: अष्टमी
सौभाग्यसमाप्ति समय १२:५९ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०• अगला: शोभन
वार
सोमवार
मास (अमान्त)
आश्विन
मूलसमाप्ति समय ०६:१७ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०• अगला: पूर्वाषाढ़ा
करण
वणिज(०४:३२ अपराह्न)विष्टि (भद्रा)(०५:२३ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०)बव(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
आश्विन

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: हस्त (पद १)
चंद्र राशि
धनु(सम्पूर्ण रात्रि तक)→ मकर (सम्पूर्ण रात्रि से)
सूर्य राशि
कन्या• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
हस्तपद १
नक्षत्र पद
मूल (पद १)१०:३३ पूर्वाह्नमूल (पद २)०५:०९ अपराह्नमूल (पद ३)११:४४ अपराह्नमूल (पद ४)जारीपूर्वाषाढ़ा (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: १६१.९२°चन्द्र भोगांश: २४१.१°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
१३(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
आश्विन(पूर्णिमांत)
आश्विन(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त९ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:३० पूर्वाह्न – ०५:१८ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:५४ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न
  • ११:४१ पूर्वाह्न – १२:२९ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:०४ अपराह्न – ०२:५२ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:०४ अपराह्न – ०६:२८ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:०४ अपराह्न – ०७:१६ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:१५ अपराह्न – ०१:०० पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४१ अपराह्न – १२:२९ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
शुभ योग (८)१ सक्रिय
✨

शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल८ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०७:३६ पूर्वाह्न – ०९:०५ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    १०:३५ पूर्वाह्न – १२:०५ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०१:३५ अपराह्न – ०३:०४ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    १२:२९ अपराह्न – ०१:१७ अपराह्न
  • वर्ज्यम्
    ०४:३१ पूर्वाह्न – ०६:१७ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
  • बाण दोष
    अग्नि
  • भद्रा (विष्टि)
    ०४:३२ अपराह्न – ०५:२३ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • पूरा दिन
अशुभ योग (९)० सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

शरद् ऋतु
दृक अयन
दक्षिणायन
दृक ऋतु
शरद् ऋतु
नेत्रम्
१ (एक नेत्र - मध्यम फल)
वैदिक अयन
दक्षिणायन
वैदिक ऋतु
शरद् ऋतु
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
पूर्व(सम्पूर्ण रात्रि तक)→दक्षिण
अग्निवास
आकाश (अशुभ)(समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न)→पाताल (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
भोजन (भोजन करते हुए)(समाप्ति समय ०४:३२ अपराह्न)→श्मशान
राहु वास
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)
होमाहुति
शुक्र
कुम्भ चक्र
दक्षिण
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

८ शुभ५ अशुभ
०६:०६ पूर्वाह्न – ०७:२८ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:२८ पूर्वाह्न – ०९:४२ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०९:४२ पूर्वाह्न – ११:५८ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
११:५८ पूर्वाह्न – ०२:०३ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०२:०३ अपराह्न – ०३:५० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०३:५० अपराह्न – ०५:२३ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०५:२३ अपराह्न – ०६:५४ अपराह्न
शुभ पंचक
०६:५४ अपराह्न – ०८:३५ अपराह्न
शुभ पंचक
०८:३५ अपराह्न – १०:३३ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
१०:३३ अपराह्न – १२:४७ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
शुभ पंचक
१२:४७ पूर्वाह्न – ०३:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
शुभ पंचक
०३:०२ पूर्वाह्न – ०५:१४ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०५:१४ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
शुभ पंचक
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०६:०६ पूर्वाह्न – ०७:२८ पूर्वाह्न
०७:२८ पूर्वाह्न – ०९:४२ पूर्वाह्न
०९:४२ पूर्वाह्न – ११:५८ पूर्वाह्न
११:५८ पूर्वाह्न – ०२:०३ अपराह्न
०२:०३ अपराह्न – ०३:५० अपराह्न
०३:५० अपराह्न – ०५:२३ अपराह्न
०५:२३ अपराह्न – ०६:५४ अपराह्न
०६:५४ अपराह्न – ०८:३५ अपराह्न
०८:३५ अपराह्न – १०:३३ अपराह्न
१०:३३ अपराह्न – १२:४७ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
१२:४७ पूर्वाह्न – ०३:०२ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
०३:०२ पूर्वाह्न – ०५:१४ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
०५:१४ पूर्वाह्न – ०६:०६ पूर्वाह्न, सितम्बर ३०
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२४८२
लाहिरी अयनांश
२४.२१५८६२°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०९४७
संशोधित जूलियन दिन
६०९४७
राता डाई (RD)
७३९५२३
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
७ आश्विन, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
१६ सितंबर, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

१ दैनिक व्रत एवं पर्व

चातुर्मास अवधि

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला चातुर्मास अवधि का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

चातुर्मास अवधि का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।