कृष्ण पक्ष सप्तमी • ५५% प्रकाशतृतीय पाद (कृष्ण अष्टमी)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, २० मई २०२५

२३, वैशाखकृष्ण पक्ष, सप्तमी
२०८१ गुजराती संवत
२०
मई २०२५
मंगलवार
पर्व एवं व्रत सूची:कालाष्टमीमासिक श्री कृष्ण जन्माष्टमी∞योग:इन्द्रसिद्ध योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न
अगला: अष्टमी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०७:३२ अपराह्न
अगला: शतभिषा

योग

समाप्ति समय ०२:४९ पूर्वाह्न, मई २१
अगला: वैधृति

करण

समाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न
अगला: बालव

वार

मंगलवार
वार (मंगल)
ग्रह स्वामी: मंगल

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३२ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४९ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३२ पूर्वाह्न, मई २१ (अगला सूर्योदय)
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
धनिष्ठा (समाप्ति समय ०७:३२ अपराह्न)
शतभिषा
योग
इन्द्र (समाप्ति समय ०२:४९ पूर्वाह्न, मई २१)
वैधृति
करण
बालव (समाप्ति समय ०५:२८ अपराह्न)
कौलव

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३२ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४९ अपराह्न
सूर्य राशि: वृषभदिनमान: १३ घंटे १६ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०१:०६ पूर्वाह्न
चंद्रास्त
११:५४ पूर्वाह्न
चंद्र राशि: मकररात्रिमान: १० घंटे ४३ मिनट

विस्तृत पंचांग

कृष्ण पक्ष
तिथि
सप्तमीसमाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न• अगला: अष्टमी
इन्द्रसमाप्ति समय ०२:४९ पूर्वाह्न, मई २१• अगला: वैधृति
वार
मंगलवार
मास (अमान्त)
वैशाख
धनिष्ठासमाप्ति समय ०७:३२ अपराह्न• अगला: शतभिषा
करण
बव(०५:५२ पूर्वाह्न)बालव(०५:२८ अपराह्न)कौलव(०४:५५ पूर्वाह्न, मई २१)
पक्ष
कृष्ण पक्ष(कृष्ण पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
ज्येष्ठ

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: कृत्तिका (पद ३)
चंद्र राशि
मकर(०७:३५ पूर्वाह्न तक)→ कुंभ (०७:३५ पूर्वाह्न से)
सूर्य राशि
वृषभ• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
नक्षत्र पद
धनिष्ठा (पद २)०७:३५ पूर्वाह्नधनिष्ठा (पद ३)०१:३४ अपराह्नधनिष्ठा (पद ४)०७:३२ अपराह्नशतभिषा (पद १)०१:२७ पूर्वाह्न, मई २१शतभिषा (पद २)जारी
सूर्य भोगांश: ३५.०३°चन्द्र भोगांश: २९८.८७°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
६(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
ज्येष्ठ(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त१० सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:०७ पूर्वाह्न – ०४:५० पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:२९ पूर्वाह्न – ०५:३३ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३८ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२४ अपराह्न – ०३:१७ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:५० अपराह्न – ०७:११ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:५० अपराह्न – ०७:५४ अपराह्न
  • अमृत काल
    ११:३१ पूर्वाह्न – ०१:०७ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:५० अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई २१
शुभ योग (८)२ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल११ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)८ सक्रिय
  • ०३:३० अपराह्न – ०५:१० अपराह्न
  • यमगंड
    ०८:५२ पूर्वाह्न – १०:३२ पूर्वाह्न
  • गुलिक काल
    १२:११ अपराह्न – ०१:५१ अपराह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०८:१२ पूर्वाह्न – ०९:०५ पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०२:३३ पूर्वाह्न – ०४:०७ पूर्वाह्न, मई २१
  • बाण दोष
    रोग
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    ०७:३५ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, मई २१
  • ०७:३२ अपराह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, मई २१
अशुभ योग (९)३ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
०.५ (अर्ध जीव - मध्यम फल)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०७:३५ पूर्वाह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पाताल (अशुभ)(समाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न)→पृथ्वी (अत्यंत शुभ)
दिशा शूल
उत्तर(गुड़ खाकर यात्रा करें)
शिववास
श्मशान(समाप्ति समय ०५:५२ पूर्वाह्न)→गौरी (गौरी के साथ)
राहु वास
पश्चिम
होमाहुति
गुरु
कुम्भ चक्र
पूर्व
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

७ शुभ६ अशुभ
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:१५ पूर्वाह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०७:१५ पूर्वाह्न – ०९:२९ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०९:२९ पूर्वाह्न – ११:४४ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:४४ पूर्वाह्न – ०१:५६ अपराह्न
शुभ पंचक
०१:५६ अपराह्न – ०४:०६ अपराह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
०४:०६ अपराह्न – ०६:२० अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
०६:२० अपराह्न – ०८:३६ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०८:३६ अपराह्न – १०:४१ अपराह्न
शुभ पंचक
१०:४१ अपराह्न – १२:२८ पूर्वाह्न, मई २१
चोर पंचक (हानि भय)
१२:२८ पूर्वाह्न – ०२:०१ पूर्वाह्न, मई २१
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०२:०१ पूर्वाह्न – ०३:३२ पूर्वाह्न, मई २१
शुभ पंचक
०३:३२ पूर्वाह्न – ०५:१३ पूर्वाह्न, मई २१
शुभ पंचक
०५:१३ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, मई २१
शुभ पंचक
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—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३२ पूर्वाह्न – ०७:१५ पूर्वाह्न
०७:१५ पूर्वाह्न – ०९:२९ पूर्वाह्न
०९:२९ पूर्वाह्न – ११:४४ पूर्वाह्न
११:४४ पूर्वाह्न – ०१:५६ अपराह्न
०१:५६ अपराह्न – ०४:०६ अपराह्न
०४:०६ अपराह्न – ०६:२० अपराह्न
०६:२० अपराह्न – ०८:३६ अपराह्न
०८:३६ अपराह्न – १०:४१ अपराह्न
१०:४१ अपराह्न – १२:२८ पूर्वाह्न, मई २१
१२:२८ पूर्वाह्न – ०२:०१ पूर्वाह्न, मई २१
०२:०१ पूर्वाह्न – ०३:३२ पूर्वाह्न, मई २१
०३:३२ पूर्वाह्न – ०५:१३ पूर्वाह्न, मई २१
०५:१३ पूर्वाह्न – ०५:३२ पूर्वाह्न, मई २१
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—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२३५०
लाहिरी अयनांश
२४.२१०८१६°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०८१५
संशोधित जूलियन दिन
६०८१५
राता डाई (RD)
७३९३९१
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
३० वैशाख, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
७ मई, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

२ दैनिक व्रत एवं पर्व

कालाष्टमी

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला कालाष्टमी का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

कालाष्टमी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

मासिक श्री कृष्ण जन्माष्टमी

प्रमुख पर्व

कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण को समर्पित मासिक उपवास एवं पूजन।

पूज्य देवता
भगवान श्री कृष्ण (बाल गोपाल)
धार्मिक महत्व

श्रीकृष्ण भक्ति, आत्मिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦Midnight Janmotsav Aarti at 12:00 AM with conch and bell chimes.
  • ✦Panchamrit Abhisheka with 108 Shaligram or Laddu Gopal darshan.
  • ✦Rocking Bal Gopal in decorated cradles (Jhula Darshan).

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।