शुक्ल पक्ष त्रयोदशी • ९४% प्रकाशशुक्ल पक्ष (कुबड़ा चन्द्र)
दैनिक पंचांग

दैनिक पंचांग, १० मई २०२५

१३, वैशाखशुक्ल पक्ष, त्रयोदशी
२०८१ गुजराती संवत
१०
मई २०२५
शनिवार
पर्व एवं व्रत सूची:शनि त्रयोदशीशनि प्रदोष व्रतRavi YogaVidaal Yoga∞योग:सिद्धि✦सर्वार्थ सिद्धि✦रवि योगमरण योग

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग

तिथि

समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न
अगला: चतुर्दशी

नक्षत्र

समाप्ति समय ०३:१५ पूर्वाह्न, मई ११
अगला: स्वाति

योग

समाप्ति समय ०४:०० पूर्वाह्न, मई ११
अगला: व्यतीपात

करण

समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न
अगला: गरज

वार

शनिवार
वार (शनि)
ग्रह स्वामी: शनि

२४ घंटे का दैनिक प्रवाह (सूर्योदय से सूर्योदय)

स्थानीय सौर दिवस
०५:३७ पूर्वाह्न (सूर्योदय)१२:०००६:४५ अपराह्न (सूर्यास्त)००:०००५:३६ पूर्वाह्न, मई ११ (अगला सूर्योदय)
तिथि
त्रयोदशी (समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न)
चतुर्दशी
नक्षत्र
चित्रा (समाप्ति समय ०३:१५ पूर्वाह्न, मई ११)
स्वाति
योग
सिद्धि (समाप्ति समय ०४:०० पूर्वाह्न, मई ११)
व्यतीपात
करण
तैतिल (समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न)
गरज

सूर्य एवं चन्द्र

सूर्य

सूर्योदय
०५:३७ पूर्वाह्न
सूर्यास्त
०६:४५ अपराह्न
सूर्य राशि: मेषदिनमान: १३ घंटे ७ मिनटमध्याह्न (सौर दोपहर): १२:११ अपराह्न

चन्द्र

चंद्रोदय
०४:५३ अपराह्न
चंद्रास्त
०४:२५ पूर्वाह्न, मई ११
चंद्र राशि: कन्यारात्रिमान: १० घंटे ५१ मिनट

विस्तृत पंचांग

शुक्ल पक्ष
तिथि
त्रयोदशीसमाप्ति समय ०५:३० अपराह्न• अगला: चतुर्दशी
सिद्धिसमाप्ति समय ०४:०० पूर्वाह्न, मई ११• अगला: व्यतीपात
वार
शनिवार
मास (अमान्त)
वैशाख
चित्रासमाप्ति समय ०३:१५ पूर्वाह्न, मई ११• अगला: स्वाति
करण
तैतिल(०५:३० अपराह्न)गरज(०६:४७ पूर्वाह्न, मई ११)वणिज(सम्पूर्ण रात्रि)
पक्ष
शुक्ल पक्ष(शुक्ल पक्ष)
मास (पूर्णिमान्त)
वैशाख

राशि एवं नक्षत्र विवरण

सूर्य नक्षत्र: भरणी (पद ४)
चंद्र राशि
कन्या(०१:४२ अपराह्न तक)→ तुला (०१:४२ अपराह्न से)
सूर्य राशि
मेष• निरयण प्रणाली
सूर्य नक्षत्र
भरणीपद ४
नक्षत्र पद
चित्रा (पद १)०६:५५ पूर्वाह्नचित्रा (पद २)०१:४२ अपराह्नचित्रा (पद ३)०८:२८ अपराह्नचित्रा (पद ४)०३:१५ पूर्वाह्न, मई ११स्वाति (पद १)जारी
सूर्य भोगांश: २५.३९°चन्द्र भोगांश: १७६.०३°

चन्द्रमास, संवत् एवं बृहस्पति संवत्सर

वि.सं. २०८२ · शक १९४७
विक्रम संवत्
शक संवत्
गुजराती संवत्
२०८१नल
प्रविष्टे / गते
२७(सौर मास दिवस)
बृहस्पति संवत्
सिद्धार्थीतक ०२:५६ pm, शुक्रवार, २५ अप्रैल २०२५
आगामी संवत्
रौद्र(परवर्ती बृहस्पति वर्ष)
चन्द्रमास
वैशाख(पूर्णिमांत)
वैशाख(अमान्त)
संवत्सर चक्र
बार्हस्पत्य ६०-वर्षीय चक्र(उत्तर/दक्षिण परम्परा)

शुभ मुहूर्त

१६ मुहूर्त११ सक्रिय
प्रमुख सौर मुहूर्त (८)८ सक्रिय
  • ब्रह्म मुहूर्त
    ०४:१० पूर्वाह्न – ०४:५४ पूर्वाह्न
  • प्रातः संध्या
    ०४:३२ पूर्वाह्न – ०५:३७ पूर्वाह्न
  • ११:४५ पूर्वाह्न – १२:३७ अपराह्न
  • विजय मुहूर्त
    ०२:२२ अपराह्न – ०३:१५ अपराह्न
  • गोधूलि मुहूर्त
    ०६:४५ अपराह्न – ०७:०७ अपराह्न
  • सायं संध्या
    ०६:४५ अपराह्न – ०७:५० अपराह्न
  • अमृत काल
    ०५:१८ अपराह्न – ०७:०७ अपराह्न
  • निशीथ मुहूर्त
    ११:४९ अपराह्न – १२:३३ पूर्वाह्न, मई ११
शुभ योग (८)३ सक्रिय
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शुभ समय मार्गदर्शिका: नए कार्य आरंभ करने, यात्रा और शुभ अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और अमृत काल परंपरागत रूप से चुने जाते हैं।

अशुभ काल

१९ काल९ सक्रिय
प्रतिकूल काल एवं दोष (१०)७ सक्रिय
  • ०८:५४ पूर्वाह्न – १०:३३ पूर्वाह्न
  • यमगंड
    ०१:५० अपराह्न – ०३:२८ अपराह्न
  • गुलिक काल
    ०५:३७ पूर्वाह्न – ०७:१६ पूर्वाह्न
  • दुर्मुहूर्त
    ०५:३७ पूर्वाह्न – ०६:३० पूर्वाह्न
  • वर्ज्यम्
    ०९:११ पूर्वाह्न – १०:५९ पूर्वाह्न
  • बाण दोष
    चोर
  • भद्रा (विष्टि)
    कोई नहीं
  • विंचुडो
    कोई नहीं
  • पंचक
    कोई नहीं
  • ०३:१५ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई ११
अशुभ योग (९)२ सक्रिय
💡

परम्परागत निर्देश: राहुकाल व यमघण्ट में शुभ कार्य, नवीन निवेश एवं यात्रा वर्जित मानी जाती है।

ऋतु एवं अयन

Vasant
दृक अयन
उत्तरायण
दृक ऋतु
Vasant
नेत्रम्
२ (दो नेत्र - अत्यंत शुभ)
वैदिक अयन
उत्तरायण
वैदिक ऋतु
Vasant
जीव
१ (पूर्ण जीव - अति शुभ)

निवास, शूल एवं वास

पंचक रहित: शुभ
चन्द्र निवास
दक्षिण(०१:४२ अपराह्न तक)→पश्चिम
अग्निवास
पृथ्वी (अत्यंत शुभ)(समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न)→आकाश (अशुभ)
दिशा शूल
पूर्व(घी खाकर यात्रा करें)
शिववास
नन्दी (नन्दी सवारी - शुभ फलदायी)(समाप्ति समय ०५:३० अपराह्न)→भोजन (भोजन करते हुए)
राहु वास
पूर्व
होमाहुति
चन्द्र
कुम्भ चक्र
उत्तर
पंचक रहित
शुभ

मन्त्री मण्डल (ग्रह परिषद)

राजा
सूर्य
मन्त्री
सूर्य
सेनापति
शनि
सस्याधिपति (ग्रीष्म धान्य)
बुध
धान्याधिपति (शीत धान्य)
चन्द्र
धनाधिपति (वित्त एवं खजाना)
मंगल
मेघाधिपति (वर्षा एवं बादल)
सूर्य
रसाधिपति (रस एवं तरल पदार्थ)
शुक्र
नीरसाधिपति (धातु एवं रत्न)
बुध
फलाधिपति
शनि

चंद्रबलम्

६ शुभ / अनुकूल१ अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
शुभ / अनुकूल
शुभ / अनुकूल
प्रतिकूल
अष्टम चन्द्र (सावधानी आवश्यक)
शुभ / अनुकूल

ताराबलम्

१५ शुभ / अनुकूल१२ प्रतिकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल
क्षेम (कल्याण)शुभ / अनुकूल
विपत् (विपत्ति)प्रतिकूल
सम्पत् (धन-वैभव)शुभ / अनुकूल
जन्मप्रतिकूल
परम मित्र (अति शुभ)शुभ / अनुकूल
मित्र (हितैषी)शुभ / अनुकूल
निधन (हानि)प्रतिकूल
साधना (सिद्धि)शुभ / अनुकूल
प्रत्यक् (बाधा)प्रतिकूल

पंचक रहित मुहूर्त चक्र

६ शुभ७ अशुभ
०५:३७ पूर्वाह्न – ०५:५७ पूर्वाह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०५:५७ पूर्वाह्न – ०७:५५ पूर्वाह्न
शुभ पंचक
०७:५५ पूर्वाह्न – १०:०८ पूर्वाह्न
मृत्यु पंचक (अत्यंत अशुभ)
१०:०८ पूर्वाह्न – १२:२४ अपराह्न
अग्नि पंचक (अग्नि भय)
१२:२४ अपराह्न – ०२:३६ अपराह्न
शुभ पंचक
०२:३६ अपराह्न – ०४:४६ अपराह्न
राज पंचक (राज्य लाभ)
०४:४६ अपराह्न – ०७:०० अपराह्न
चोर पंचक (हानि भय)
०७:०० अपराह्न – ०९:१६ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
०९:१६ अपराह्न – ११:२१ अपराह्न
रोग पंचक (स्वास्थ्य कष्ट)
११:२१ अपराह्न – ०१:०८ पूर्वाह्न, मई ११
शुभ पंचक
०१:०८ पूर्वाह्न – ०२:४१ पूर्वाह्न, मई ११
राज पंचक (राज्य लाभ)
०२:४१ पूर्वाह्न – ०४:१२ पूर्वाह्न, मई ११
चोर पंचक (हानि भय)
०४:१२ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई ११
राज पंचक (राज्य लाभ)
—
—

उदय लग्न समय

12 राशियां
०५:३७ पूर्वाह्न – ०५:५७ पूर्वाह्न
०५:५७ पूर्वाह्न – ०७:५५ पूर्वाह्न
०७:५५ पूर्वाह्न – १०:०८ पूर्वाह्न
१०:०८ पूर्वाह्न – १२:२४ अपराह्न
१२:२४ अपराह्न – ०२:३६ अपराह्न
०२:३६ अपराह्न – ०४:४६ अपराह्न
०४:४६ अपराह्न – ०७:०० अपराह्न
०७:०० अपराह्न – ०९:१६ अपराह्न
०९:१६ अपराह्न – ११:२१ अपराह्न
११:२१ अपराह्न – ०१:०८ पूर्वाह्न, मई ११
०१:०८ पूर्वाह्न – ०२:४१ पूर्वाह्न, मई ११
०२:४१ पूर्वाह्न – ०४:१२ पूर्वाह्न, मई ११
०४:१२ पूर्वाह्न – ०५:३६ पूर्वाह्न, मई ११
—
—

अन्य कैलेंडर एवं युग गणना

3 क्षेत्र • 9 मान
वैदिक कालक्रम
कलियुग वर्ष
५१२६
कलि अहर्गण
१८७२३४०
लाहिरी अयनांश
२४.२१०४३४°
खगोलीय गणना
जूलियन दिन
२४६०८०५
संशोधित जूलियन दिन
६०८०५
राता डाई (RD)
७३९३८१
राष्ट्रीय एवं जूलियन तिथियाँ
राष्ट्रीय दिनांक
२० वैशाख, १९४७
निरयण दिनांक
१० भाद्रपद, १९४७
जूलियन दिनांक
२७ अप्रैल, २०२५ ई.

पर्व, व्रत एवं अनुष्ठान

४ दैनिक व्रत एवं पर्व

शनि त्रयोदशी

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला शनि त्रयोदशी का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

शनि त्रयोदशी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

शनि प्रदोष व्रत

प्रमुख पर्व

समस्त पापों के शमन, आत्मिक शांति, मोक्ष और भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा हेतु समर्पित शनि प्रदोष व्रत का परम पावन व्रत।

पूज्य देवता
भगवान शिव (देवाधिदेव महादेव / भोलेनाथ)
धार्मिक महत्व

शनि प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप-ताप निवारण: संचित कर्मों और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है। २. आत्मिक शांति: चित्त शांत होता है और ध्यान-साधना में अभूतपूर्व प्रगति होती है। ३. मोक्ष एवं आरोग्य: भोलेनाथ की कृपा से दीर्घायु, स्वास्थ्य और अंततः शिवलोक की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • ✦शिवलिंग पर कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शर्करा (पंचामृत) और शुद्ध गंगाजल से अभिषेक करें।
  • ✦त्रिदल बेलपत्र, धतूरा, श्वेत मदार, भस्म और चंदन अर्पित करें।
  • ✦"ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का १०८ बार या अनवरत जप करें।
  • ✦सायंकाल (प्रदोष काल) में दीपक प्रज्वलित कर शिव चालीसा व आरती करें।
  • ✦अगली सुबह सूर्योदय के पश्चात पूजा कर सात्विक पारण करें।

रवि योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Ravi Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Ravi Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

Vidaal योग

प्रमुख पर्व

वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला Vidaal Yoga का पावन पर्व।

पूज्य देवता
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर
धार्मिक महत्व

Vidaal Yoga का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।

पूजा विधि एवं नियम
  • ✦प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ✦घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • ✦ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ✦पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
  • ✦आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग एवं दैनिक पञ्चाङ्ग

5 अंग
पञ्चाङ्ग वैदिक काल-गणना की प्राचीन प्रणाली है, जो सूर्य एवं चन्द्रमा की गति पर आधारित सूक्ष्म खगोलीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है। 'दैनिक' का अर्थ प्रतिदिन का पञ्चाङ्ग है।

तिथि

1

सूर्य और चन्द्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। यह व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण का मुख्य आधार है।

नक्षत्र

2

चन्द्रमा जिस २७ नक्षत्र मंडलों (१३° २०' प्रत्येक) में भ्रमण करता है, वह नक्षत्र कहलाता है। यह मानसिक प्रकृति और दैनिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

योग

3

सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों का योग २७ भागों में विभाजित होता है, जिसे योग कहते हैं। यह दिन के वातावरण और अंतःकरण की शुद्धि का सूचक है।

करण

4

एक तिथि के आधे भाग (६°) को करण कहते हैं। यह विशिष्ट कार्यों और मुहूर्तों के सूक्ष्म चयन हेतु उपयोगी है।

वार

5

सात ग्रहों के आधिपत्य वाला वार (दिन), जो स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के २४ घंटों के चक्र को नियंत्रित करता है।