अद्यतन गौरी-पञ्चाङ्गम्
चितदिनाङ्कस्य स्थानस्य च कृते दिवा तथा रात्रौ गौरीपञ्चाङ्गविभागान् पश्यन्तु।
गुरुवार, ८ अक्टूबर २०२६
वर्तमाना गौरी
रोगः
७:२६ अपराह्न - ८:५८ अपराह्न
वर्ज्यम् - परम्परया प्रतिकूलम्।
दिवा गौरी पञ्चाङ्गम्
६:०८ पूर्वाह्न – ५:५५ अपराह्न
| क्र. | गौरी पञ्चाङ्गम् | समयः | प्रकृतिः |
|---|---|---|---|
| १ | धनम्शुभम् परम्परया धनसमृद्धिकरम्। | ६:०८ पूर्वाह्न-७:३६ पूर्वाह्न | शुभम् |
| २ | सुखम्शुभम् परम्परया सुखशान्तिकरम्। | ७:३६ पूर्वाह्न-९:०४ पूर्वाह्न | शुभम् |
| ३ | चोरःवर्ज्यम् परम्परया हानिकरम्। | ९:०४ पूर्वाह्न-१०:३३ पूर्वाह्न | वर्ज्यम् |
| ४ | उथिशुभम् परम्परया अनुकूलम्। | १०:३३ पूर्वाह्न-१२:०१ अपराह्न | शुभम् |
| ५ | अमृतम्शुभम् परम्परया अत्यन्तं शुभम्। | १२:०१ अपराह्न-१:२९ अपराह्न | शुभम् |
| ६ | विषम्वर्ज्यम् परम्परया अत्यन्तं वर्ज्यम्। | १:२९ अपराह्न-२:५८ अपराह्न | वर्ज्यम् |
| ७ | रोगःवर्ज्यम् परम्परया प्रतिकूलम्। | २:५८ अपराह्न-४:२६ अपराह्न | वर्ज्यम् |
| ८ | लाभःशुभम् परम्परया लाभप्रदम्। | ४:२६ अपराह्न-५:५५ अपराह्न | शुभम् |
रात्रि गौरी पञ्चाङ्गम्
५:५५ अपराह्न – ६:०८ पूर्वाह्न
| क्र. | गौरी पञ्चाङ्गम् | समयः | प्रकृतिः |
|---|---|---|---|
| १ | विषम्वर्ज्यम् परम्परया अत्यन्तं वर्ज्यम्। | ५:५५ अपराह्न-७:२६ अपराह्न | वर्ज्यम् |
| २ | रोगःइदानीम्वर्ज्यम् परम्परया प्रतिकूलम्। | ७:२६ अपराह्न-८:५८ अपराह्न | वर्ज्यम् |
| ३ | लाभःशुभम् परम्परया लाभप्रदम्। | ८:५८ अपराह्न-१०:२९ अपराह्न | शुभम् |
| ४ | धनम्शुभम् परम्परया धनसमृद्धिकरम्। | १०:२९ अपराह्न-१२:०१ पूर्वाह्न | शुभम् |
| ५ | सुखम्शुभम् परम्परया सुखशान्तिकरम्। | १२:०१ पूर्वाह्न-१:३३ पूर्वाह्न | शुभम् |
| ६ | चोरःवर्ज्यम् परम्परया हानिकरम्। | १:३३ पूर्वाह्न-३:०४ पूर्वाह्न | वर्ज्यम् |
| ७ | उथिशुभम् परम्परया अनुकूलम्। | ३:०४ पूर्वाह्न-४:३६ पूर्वाह्न | शुभम् |
| ८ | अमृतम्शुभम् परम्परया अत्यन्तं शुभम्। | ४:३६ पूर्वाह्न-६:०८ पूर्वाह्न | शुभम् |
शुभाः गौरीकालाः
शुभकार्यार्थं परम्परया अनुकूलाः कालाः
परम्परया धनसमृद्धिकरम्।
परम्परया सुखशान्तिकरम्।
परम्परया अनुकूलम्।
परम्परया अत्यन्तं शुभम्।
वर्ज्याः गौरीकालाः
महत्त्वपूर्णकार्यारम्भे परम्परया त्याज्याः कालाः
परम्परया हानिकरम्।
परम्परया अत्यन्तं वर्ज्यम्।
परम्परया प्रतिकूलम्।
परम्परया अत्यन्तं वर्ज्यम्।
गौरीपञ्चाङ्गविषये
गौरीपञ्चाङ्गं दक्षिणभारते प्रसिद्धं पारम्परिकं वैदिकमुहूर्तविधानम् अस्ति। दिवा तथा रात्रौ अष्टसु समानेषु भागेषु विभज्येते।
परम्परया अनुकूलम्।
परम्परया अत्यन्तं शुभम्।
परम्परया प्रतिकूलम्।
परम्परया लाभप्रदम्।
परम्परया धनसमृद्धिकरम्।
परम्परया सुखशान्तिकरम्।
परम्परया हानिकरम्।
परम्परया अत्यन्तं वर्ज्यम्।
गौरीपञ्चाङ्गगणना पारम्परिकदक्षिणभारतीयपद्धत्या क्रियते।
