भारत के इन इलाकों में दशहरा पर नहीं जलता रावण, दामाद और विद्वान मानकर होती है पूजा

भारत में कुछ चुनिंदा स्थानों पर विजयादशमी के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। इन जगहों पर धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण को एक प्रकांड विद्वान, भगवान शिव का परम भक्त या क्षेत्र का दामाद मानकर सम्मान दिया जाता है।
भारत में किन-किन जगहों पर रावण की पूजा की जाती है?
देश के कई राज्यों में रावण को बुराई के प्रतीक के रूप में जलाने की बजाय सम्मानित किया जाता है। इन प्रमुख स्थानों की सूची निम्नलिखित है:
- मध्य प्रदेश का मंदसौर
- उत्तर प्रदेश का बिसरख (नोएडा के पास)
- मध्य प्रदेश का रावणग्राम (विदिशा के पास)
- उत्तर प्रदेश का कानपुर
- महाराष्ट्र का गढ़चिरौली
- कर्नाटक का कोलार और मालवल्ली
- राजस्थान का जोधपुर
- मध्य प्रदेश का उज्जैन (चिकली गांव)
- उत्तर प्रदेश का जसवंतनगर
मंदसौर में रावण को दामाद क्यों माना जाता है?
मध्य प्रदेश के मंदसौर के खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय पारंपरिक रूप से रावण को अपना दामाद मानता है। स्थानीय लोगों की धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण की पत्नी मंदोदरी का संबंध इसी क्षेत्र से था, इसलिए यहां रावण का पुतला जलाना अपमान माना जाता है। दशहरा के अवसर पर यहां के लोग एकत्र होकर रावण की याद में प्रार्थना करते हैं।
बिसरख गांव का रावण से क्या संबंध है?
उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास स्थित बिसरख गांव को रावण का जन्मस्थान माना जाता है। इस गांव का नाम रावण के पिता ऋषि विश्रवा से जुड़ा हुआ है। दशहरा के दिन इस गांव में रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है, बल्कि यहां विशेष प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
कानपुर के दशानन मंदिर की क्या विशेषता है?
उत्तर प्रदेश के कानपुर के शिवाला इलाके में रावण का एक दशानन मंदिर स्थित है। इस मंदिर की यह विशेषता है कि यह साल में सिर्फ एक बार दशहरा के मौके पर ही खुलता है। इस दिन स्थानीय लोग मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद रावण की पूजा-पाठ करते हैं और दर्शन के बाद मंदिर को फिर से बंद कर दिया जाता है।
क्या रावण भगवान शिव का परम भक्त था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण वेदों का ज्ञाता और भगवान शिव का अनन्य भक्त था। कर्नाटक और कुछ अन्य क्षेत्रों की परंपराओं में उसे एक शक्तिशाली व्यक्ति तथा शिव के परम भक्त के रूप में याद किया जाता है। स्थानीय लोकाचार के तहत कुछ लोग उसके विद्वान और शिव-भक्त स्वरूप का सम्मान करते हैं।