दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान गोलू गुड़िया क्यों सजाते हैं?

दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों को 'गोलू गुड़िया' से सजाने की अनोखी परंपरा है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन के अलग-अलग पहलुओं का प्रतीक है, जिसे विजयनगर काल से निभाया जा रहा है।
दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान गुड़ियों को सीढ़ियों पर क्यों सजाया जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोलू बनाने की परंपरा बुराई पर विजय हासिल करने के लिए निभाई जाती है, जो देवी दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर के वध पर जीत का प्रतीक है। इन गुड़ियों को सीढ़ीनुमा संरचनाओं पर कलात्मक रूप से सजाया जाता है जो जीवन, पौराणिक कथाओं और अध्यात्म का प्रतीक मानी जाती हैं। विजयनगर काल से चली आ रही इस संस्कृति में इन गुड़ियों को बहुत श्रद्धा के साथ व्यवस्थित किया जाता है।
'बोम्मई गोलू' या 'गोलू पर्व' क्या है और इसका इतिहास क्या है?
बोम्मई गोलू दक्षिण भारत में नवरात्र के समय मनाया जाने वाला एक पारंपरिक उत्सव है जिसमें घरों में मूर्तियों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। विजयनगर शासनकाल में हम्पी की गलियों में गोलू एक शाही उत्सव हुआ करता था। इस सांस्कृतिक प्रथा को बाद में मैसूर के वोडेयार परिवारों द्वारा आगे बढ़ाया गया था।
गोलू की सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम क्यों रखी जाती है?
परंपरा के अनुसार गोलू की सीढ़ियों (Padi) की संख्या हमेशा विषम यानी 3, 5, 7, 9 या 11 रखी जाती है। हर एक सीढ़ी को कपड़े से ढका जाता है और सजाया जाता है। ये सीढ़ियां जीवन के अलग-अलग पहलुओं और पदानुक्रम को दर्शाती हैं।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस त्योहार को किन नामों से जाना जाता है?
दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में इस पर्व को क्षेत्रीय नामों से पुकारा जाता है। इस त्योहार के प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
- तमिलनाडु में इसे 'बोम्मई गोलू' कहा जाता है।
- आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे 'बोम्माला कोलुवु' कहा जाता है।
- कर्नाटक में इसे 'बॉम्बे हब्बा' कहा जाता है।
गोलू डिस्प्ले में सबसे ऊपर और सबसे नीचे किन मूर्तियों को रखा जाता है?
गोलू की सीढ़ियों पर देवी-देवताओं से लेकर आम जनजीवन और जीव-जंतुओं तक की मूर्तियां सजाई जाती हैं। इसमें गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, मीनाक्षी, कामाक्षी, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव की मूर्तियां प्रमुख होती हैं। इसके साथ ही रामायण और महाभारत के दृश्यों, कामधेनु गाय, तोता, बंदर, हाथी और शेर जैसी आकृतियों को भी प्रदर्शित किया जाता है।
'मरापाची बोम्मई' लकड़ी की गुड़ियों का क्या महत्व है?
इन सभी गुड़ियों में 'मरापाची' को सबसे अधिक शुभ माना जाता है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपी जाती है। मरापाची बोम्मई लाल लकड़ी जैसी विभिन्न लकड़ियों से बनी होती हैं और ये आमतौर पर दंपत्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
गोलू उत्सव के दौरान महिलाओं और बच्चों द्वारा क्या किया जाता है?
इस उत्सव के दौरान लोग अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को गोलू के दर्शन के लिए आमंत्रित करते हैं। घर आने वाले लोग श्लोक पढ़ते हैं और आपस में उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं तथा सात्विक भोजन का आनंद लेते हैं।
नवरात्र समाप्त होने पर इन गुड़ियों के साथ क्या किया जाता है?
उत्सव के समापन पर गुड़ियों को सहेजने की एक सुंदर प्रक्रिया अपनाई जाती है। 10वें दिन से ठीक पहले इन गुड़ियों को प्यार से खड़े स्थान से नीचे लिटाया जाता है। इसके बाद 11वें दिन इन्हें सुरक्षित रूप से गोम्बे यानी 'गुड़िया मंडप' में रख दिया जाता है ताकि अगले साल के दशहरा के लिए फिर से इनका उपयोग किया जा सके।