कन्या पूजन 2026: अष्टमी और नवमी की सही तिथि, मुहूर्त और विधि

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कन्या पूजन 2026: अष्टमी और नवमी की सही तिथि, मुहूर्त और विधि

शारदीय नवरात्र 2026 में महा अष्टमी और महानवमी के पावन अवसर पर कन्या पूजन का विधान है। इस दिन दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका आदर-सत्कार किया जाता है।

शुभ मुहूर्त

अष्टमी और नवमी तिथि को प्रातःकाल सूर्योदय के बाद चौघड़िया के शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में कंजक पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है। सर्वोत्तम समय प्रातः 06:30 AM से 10:30 AM के मध्य का माना गया है।

2026 में कन्या पूजन (अष्टमी और नवमी) कब है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। साल 2026 में इन तिथियों की जानकारी इस प्रकार है:

  • महा अष्टमी (दुर्गा अष्टमी): 18 अक्टूबर 2026, रविवार
  • महा नवमी (सिद्धिदात्री): 19 अक्टूबर 2026, सोमवार

यदि आपके परिवार में अष्टमी तिथि पर पूजा करने की परंपरा है, तो आप 18 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए कन्याओं को बुला सकते हैं। वहीं, नवमी तिथि पर व्रत तोड़ने वाले कन्या पूजन 19 अक्टूबर 2026 को करेंगे।

अष्टमी और नवमी तिथि के लिए शुभ मुहूर्त क्या हैं?

ज्योतिषीय नजरिए से ये दोनों ही दिन बेहद शुभ माने जाते हैं और शुभ मुहूर्तों में पूजा करने का विशेष फल मिलता है।

  • महा अष्टमी सुबह का शुभ समय: सुबह 7 बजकर 45 मिनट से लेकर 9 बजकर 10 मिनट तक
  • महा अष्टमी अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक
  • महानवमी शुभ चौघड़िया: सुबह 9 बजकर 12 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक
  • महानवमी अमृत काल: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक

कन्या पूजन के लिए कन्याओं की सही आयु कितनी होनी चाहिए?

शास्त्रीय नियमों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उम्र के अनुसार उनका अलग-अलग धार्मिक महत्व होता है।

कंजक पूजन की सरल एवं शास्त्रसम्मत विधि क्या है?

कन्या पूजा के दौरान छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इसकी स्टेप-बाय-स्टेप विधि इस प्रकार है:

  1. स्वागत एवं आदर: कन्याओं को आदरपूर्वक अपने घर आमंत्रित करें।
  2. पद प्रक्षालन: स्वच्छ जल या दूध से उनके पैर धोएं और उन्हें सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाएं।
  3. तिलक एवं कलावा: माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं तथा हाथों में मौली (कलावा) बांधें।
  4. भोग एवं भोजन: मां दुर्गा के प्रसाद के रूप में पूरी, चना और हलवा भक्तिभाव से परोसें।
  5. उपहार एवं दक्षिणा: भोजन कराने के बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार फल, श्रृंगार सामग्री व दक्षिणा दें।
  6. आशीर्वाद: अंत में उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

कन्या पूजन में किन बातों की सावधानी रखनी चाहिए?

धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

  • राहुकाल से बचें: महा अष्टमी के दिन सुबह राहुकाल का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। राहुकाल के समय पूजन करने से बचें।
  • लांगूरा का विधान: शास्त्रों के अनुसार कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भैरव बाबा या लांगूरा के रूप में पूजने का विधान है।

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