कैला देवी भजन में लांगुरिया कौन हैं और उनका मैया से क्या है रिश्ता?

शारदीय नवरात्र के दौरान 'कैला देवी के भवन में घुटुमन खेले लांगुरिया' भजन का विशेष महत्व है, जिसके बिना माता रानी का कीर्तन अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस भजन में आने वाले लांगुरिया भगवान हनुमान जी के बाल स्वरूप का प्रतीक हैं और कैला देवी के परम भक्त व द्वारपाल हैं।
लांगुरिया कौन हैं और उनका कैला देवी से क्या संबंध है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, लांगुरिया भगवान हनुमान जी का ही बाल स्वरूप हैं जिन्हें कैला देवी का परम भक्त और द्वारपाल माना जाता है। कैला देवी को माता भवानी का अवतार माना गया है, और लांगुरिया उनके दरबार की शान हैं। मैया और लांगुरिया के बीच अटूट भक्त-भगवान और माता-पुत्र या बाल सखा जैसा स्नेहपूर्ण पवित्र संबंध माना जाता है। लोक आस्था में इन्हें कोई काल्पनिक पात्र नहीं बल्कि साक्षात हनुमान जी का रूप माना गया है।
'कैला देवी के भवन में घुटुमन खेले लांगुरिया' भजन का क्या अर्थ है?
इस प्रसिद्ध भजन में 'घुटुमन खेले' का अर्थ घुटनों के बल चलना या खेलना होता है। इस शब्द के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि बाल स्वरूप हनुमान जी कैला देवी के भवन में एक छोटे बच्चे की तरह घुटनों के बल खेल रहे हैं। यह भजन केवल मनोरंजन या नृत्य का गीत नहीं है, बल्कि यह गहरी भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। इसके बिना कैला मैया की आराधना और कीर्तन को अधूरा माना जाता है।
कैला देवी का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है?
कैला देवी को समर्पित यह भव्य और प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। इस पावन मंदिर में कैला मैया के साथ-साथ भगवान हनुमान जी की प्रतिमा भी विराजमान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करौली मंदिर में लांगुरिया (हनुमान जी) के दर्शन किए बिना कैला देवी के दर्शन अधूरे माने जाते हैं, इसलिए यहाँ आने वाले भक्त उनके दर्शन जरूर करते हैं।
नवरात्र में कैला देवी और लांगुरिया के दर्शन का क्या महत्व है?
चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन पर्व के दौरान कैला देवी के दरबार में विशेष उत्सव का माहौल होता है। इस अवधि में माता रानी के जागरण और चौकी के दौरान भजनों के साथ लांगुरिया गीतों और रसिया का विशेष रूप से गायन किया जाता है। ब्रज और राजस्थान की लोक संस्कृति में इन गीतों की विशेष गूंज होती है, जिसके बिना देवी की पूजा और कीर्तन की पूर्णता नहीं मानी जाती है।
पूजा का नियम
करौली स्थित कैला देवी के मंदिर में माता के दर्शन के साथ हनुमान जी यानी लांगुरिया के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। नवरात्र के दिनों में यहाँ होने वाले कीर्तन और भजनों में लांगुरिया गीतों का गायन जरूर किया जाता है।
यह भी देखें
और पढ़ें
माँ चंडिका ने किन राक्षसों का वध किया था?
मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहा जाता है?
मां दुर्गा के किस रूप ने किया था चंड-मुंड का संहार? ऐसे पड़ा देवी का नाम चामुंडा
रावण वध से पहले भगवान श्रीराम ने क्यों की थी इस देवी की पूजा?
यूपी में दशहरे पर क्यों देखी जाती है दही-मछली?
दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना क्यों शुभ माना जाता है?