विवाह मुहूर्त, अप्रैल २०२६
अप्रैल २०२६ में 9 शुभ विवाह तिथियाँ: १५, १९, २०, २१, २५, २६, २७, २८, और २९ अप्रैल।
हिंदू विवाह की शुभ तिथियाँ और समय, तिथि और नक्षत्र सहित, आपके स्थान के लिए गणना किए गए।
समय नई दिल्ली के लिए हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए कोई समय मध्यरात्रि के बाद भी पड़ सकता है; तब उसकी तारीख दिखाई जाती है।
बुधवार, १५ अप्रैल २०२६
अप्रैल की सभी 9 तिथियाँ
विवाह मुहूर्त, अप्रैल २०२६
विवाह मुहूर्त हिंदू विवाह के लिए चुना गया शुभ समय है। यह दिन की तिथि, नक्षत्र, योग और करण, चंद्र तथा सौर मास, और बृहस्पति (गुरु) व शुक्र के दिखाई देने या न देने से निकाला जाता है। इस पृष्ठ की तिथियाँ इन्हीं नियमों पर चलती हैं।
तिथि तय होने के बाद फेरों आदि के सटीक समय (लग्न) का निर्णय आमतौर पर परिवार के पुरोहित से किया जाता है, जो वर-वधू की कुंडली और परिवार की परंपराएँ भी देख सकते हैं। यहाँ की तिथियों को आरंभिक आधार मानें और अंतिम समय पंडित से पक्का करें।
विवाह के मुख्य ज्योतिषीय मापदंड:
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती। गंडांत भाग (अश्विनी, मघा और मूल का पहला चरण; आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण) छोड़े जाते हैं।
- योग और करण: विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ और वैधृति योग के समय छोड़े जाते हैं; विष्टि (भद्रा) और स्थिर करणों (शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघ्न) के समय भी छोड़े जाते हैं।
- चातुर्मास निषेध: चातुर्मास में हिंदू विवाह नहीं होते; यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक रहता है।
- सौर मास: जिन दिनों सूर्य कर्क, सिंह, कन्या, धनु या मीन राशि में होता है, वे दिन छोड़े जाते हैं (इनमें खरमास भी आता है, जब सूर्य धनु या मीन में होता है)।
- गुरु और शुक्र अस्त: जिन दिनों बृहस्पति या शुक्र अस्त होते हैं (सूर्य के पास दिखाई नहीं देते), और उनके अस्त होने से ३ दिन पहले तथा उदय होने के ३ दिन बाद तक के दिन छोड़ दिए जाते हैं। अधिक मास भी छोड़ा जाता है।
अप्रैल में छोड़े गए दिन
- १–१४ अप्रैलसूर्य इस मुहूर्त के लिए वर्जित राशि में है
सामान्य प्रश्न
विवाह के लिए कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती। गंडांत भाग (अश्विनी, मघा और मूल का पहला चरण; आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण) छोड़े जाते हैं।
कुछ महीनों में विवाह की तिथियाँ क्यों नहीं होतीं?
चातुर्मास, अधिक मास, वे दिन जब सूर्य कर्क, सिंह, कन्या, धनु या मीन में होता है (इनमें खरमास भी है), और वे दिन जब बृहस्पति या शुक्र अस्त होते हैं, ये सब टाले जाते हैं। जिस महीने में कोई तिथि नहीं होती, यह पृष्ठ बताता है कि इनमें से कौन-सा कारण है।
क्या हर शहर के लिए तिथियाँ एक जैसी हैं?
हमेशा नहीं। किसी समय सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति स्थान पर निर्भर करती है, इसलिए समय कुछ मिनट खिसकते हैं और कभी किसी दिन का मुहूर्त जुड़ या घट जाता है। ऊपर अपना शहर चुनें।
क्या ये तिथियाँ द्रिक पंचांग से मेल खाती हैं?
हम परिणामों को द्रिक पंचांग से मिलाते हैं। २०२६ के लिए नई दिल्ली में उसकी दी हुई हर विवाह तिथि यहाँ भी मिलती है, और समय कुछ ही मिनट के अंतर में मेल खाते हैं।