गृह प्रवेश मुहूर्त, अप्रैल २०२७
अप्रैल २०२७ में 1 शुभ गृह प्रवेश तिथि: १ अप्रैल।
आपके स्थान के लिए गणना किए गए शुभ गृह प्रवेश की तिथियाँ और समय, तिथि और नक्षत्र सहित।
समय नई दिल्ली के लिए हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए कोई समय मध्यरात्रि के बाद भी पड़ सकता है; तब उसकी तारीख दिखाई जाती है।
गुरुवार, १ अप्रैल २०२७
अप्रैल की सभी 1 तिथि
गृह प्रवेश मुहूर्त, अप्रैल २०२७
गृह प्रवेश मुहूर्त नए घर में पहली बार प्रवेश करने और वहाँ रहना आरंभ करने का शुभ समय है। यह चंद्र मास, नक्षत्र, तिथि और वार पर निर्भर करता है, और बृहस्पति या शुक्र के अस्त रहने पर टाला जाता है। इस पृष्ठ की तिथियाँ इन्हीं नियमों पर चलती हैं।
पूजा, हवन और नई रसोई में दूध उबालने की रस्म आमतौर पर चुने हुए समय पर की जाती है। यदि तिथि या समय परिवार को अनुकूल न हो तो पंडित दूसरा मुहूर्त बता सकते हैं; यहाँ की तिथियाँ एक अच्छा आरंभ हैं।
गृह प्रवेश के शास्त्रीय नियम और मापदंड:
- शुभ चंद्र मास: वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ और फाल्गुन।
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती।
- तिथियाँ: दोनों पक्षों में चतुर्थी, षष्ठी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी और चतुर्दशी छोड़ी जाती हैं; पूर्णिमा, अमावस्या और कृष्ण त्रयोदशी भी छोड़ी जाती हैं।
- वार: रविवार और मंगलवार छोड़े जाते हैं। जो नक्षत्र मंगलवार को आरंभ होता है, वह भी छोड़ा जाता है।
- गुरु और शुक्र अस्त: जिन दिनों बृहस्पति या शुक्र अस्त होते हैं (सूर्य के पास दिखाई नहीं देते), और उनके अस्त होने से ३ दिन पहले तथा उदय होने के ३ दिन बाद तक के दिन छोड़ दिए जाते हैं। अधिक मास भी छोड़ा जाता है।
अप्रैल में छोड़े गए दिन
- ७–१० अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- १२ अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- १४–१७ अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- १९ अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- २१–२४ अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- २६ अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
- २८–३० अप्रैलअनुकूल चंद्र मास नहीं है
सामान्य प्रश्न
गृह प्रवेश के लिए कौन-से महीने शुभ हैं?
वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ और फाल्गुन। अन्य चंद्र मासों के दिन छोड़े जाते हैं।
कौन-से वार, तिथियाँ और नक्षत्र छोड़े जाते हैं?
रविवार और मंगलवार छोड़े जाते हैं, और मंगलवार को आरंभ होने वाला नक्षत्र भी। चतुर्थी, षष्ठी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा, अमावस्या और कृष्ण त्रयोदशी छोड़ी जाती हैं। शुभ नक्षत्र हैं रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती।
गुरु और शुक्र अस्त क्या है?
बृहस्पति और शुक्र जब सूर्य के पास दिखाई नहीं देते तो उन्हें अस्त कहा जाता है। तब गृह प्रवेश नहीं किया जाता, न ही उनके अस्त होने से ३ दिन पहले या उदय होने के ३ दिन बाद तक, और न अधिक मास में।
क्या ये तिथियाँ द्रिक पंचांग से मेल खाती हैं?
हम परिणामों को द्रिक पंचांग से मिलाते हैं। २०२६ के लिए नई दिल्ली में उसकी दी हुई सभी ३७ गृह प्रवेश तिथियाँ यहाँ उसी समय के साथ मिलती हैं।