महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। घर-घर एवं सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा की स्थापना की जाती है, २१ मोदक व दूर्वा अर्पित की जाती है और १० दिनों तक भक्तिभाव से पूजन होता है।
समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
- १चरण १
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
- २चरण २
२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
- ३चरण ३
प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
- ४चरण ४
अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
भगवान श्री गणेश • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ May all sentient beings be joyful. May all be free from illness and distress. May all behold what is auspicious and good. May none suffer. Om Peace, Peace, Peace!
